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UP: 135 साल का हुआ आईवीआरआई, तय किया लैब से उत्कृष्ट संस्थान का सफर; जानें उपलब्धियां और इतिहास
Mon, 09 Dec 2024 12:44 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 09 Dec 2024 12:44 PM IST
सार
IVRI Bareilly: बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान 135 साल का हो गया है। इस लंबे सफर में संस्थान ने अपने नाम पर कई उपलब्धियां दर्ज की हैं।
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IVRI Bareilly
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) नौ दिसंबर को 135 साल का हो गया। वर्ष 1889 में पुणे में इंपीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लैब के रूप में इसका संचालन शुरू हुआ और आज यह देश का उत्कृष्ट पशु चिकित्सा संस्थान बन चुका है। रिंडरपेस्ट महामारी उन्मूलन समेत पशुओं को अन्य जानलेवा रोगों से बचाने के लिए संस्थान के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं।
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गोवंश को घातक लंपी स्किन डिजीज से निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिकों ने दूसरे संस्थानों के सहयोग से टीका बनाया। कई वैक्सीन, नॉवेल आहार संपूरक, ओवेरियन सिस्ट एबलेशन डिवाइस, ब्लूटंग के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित ब्लॉकिंग एलाइजा किट, मेसेनकाइमल स्टेम सेल कंडिशंड मीडिया आधारित फार्मूलेशन, हार्वेस्टिंग ऑफ चिकन स्किन फैट फ्रॉम पोल्ट्री स्लीव्स का प्रमाणीकरण आदि कई अहम कार्य किए हैं।
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निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक संस्थान में 22 विषयों में राष्ट्रीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक (बीवीएससी, एएच), बायोटेक्नोलोजी, 18 विषयों में एमवीएससी, 03 विषयों में एमएससी, 18 विषयों में पीएचडी की उपाधि, 68 सर्टिफिकेट तथा वोकेशनल कोर्स शुरू किए गए हैं।
पशु संबंधी वैक्सीन का क्वालिटी टेस्ट करते हैं वैज्ञानिक
संस्थान में वर्ष 1969 में जैविक मानकीकरण विभाग स्थापित हुआ, जो वैक्सीन क्वालिटी कंट्रोल का कार्य कर रहा है। यहां उन्हीं वैक्सीन की जांच होती है, जो राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में इस्तेमाल की जाती हैं। कई नैदानिकी का भी यहां टेस्ट होता है। पशु पोषण विभाग देशभर के चिड़ियाघरों में जानवरों को दिए जाने वाला आहार की जांच कर सुझाव देता है। वन्यजीव प्राणी संस्थान, चिड़ियाघर समेत सफारी, टाइगर रिजर्व, रेस्क्यू सेंटर के जरिये पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल करता है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियां
संस्थान में वर्ष 1969 में जैविक मानकीकरण विभाग स्थापित हुआ, जो वैक्सीन क्वालिटी कंट्रोल का कार्य कर रहा है। यहां उन्हीं वैक्सीन की जांच होती है, जो राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में इस्तेमाल की जाती हैं। कई नैदानिकी का भी यहां टेस्ट होता है। पशु पोषण विभाग देशभर के चिड़ियाघरों में जानवरों को दिए जाने वाला आहार की जांच कर सुझाव देता है। वन्यजीव प्राणी संस्थान, चिड़ियाघर समेत सफारी, टाइगर रिजर्व, रेस्क्यू सेंटर के जरिये पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल करता है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियां
- रिंडरपेस्ट बीमारी का उन्मूलन, एफएमडी वैक्सीन का विकास।
- पशुओं की टूटी हड्डी जोड़ने की तकनीक का विकास।
- फ्रैक्चर के इलाज के लिए स्टेम सेल चिकित्सा पद्धति का प्रयोग।
- उन्नत बोन फिक्सेटर तकनीक, लंपी डिजीज की वैक्सीन व अन्य।
- 34 पेटेंट, 26 डिजाइन, 46 कॉपीराइट पंजीकृत।
- 160 उद्योग को 47 तकनीकियों का व्यवसायीकरण।
- 43 शैक्षणिक वीडियो, 6 पॉडकास्ट, 21 मोबाइल एप, 3 चैटबोट एप।
- ऑनलाइन पशु चिकित्सा क्लीनिक, टेली कन्सलटेंसी सर्विस संचालित।
इतिहास
अनुवांशिक विकास से विकसित की वृंदावनी गाय और लैंडली सूकर
पशुधन के अनुवांशिक विकास पर अनुसंधान से वैज्ञानिकों ने वृंदावनी गाय, लैंडली सूकर विकसित किया। रुहेलखंडी गाय, रुहेलखंडी बकरी, घुर्रा सूकर को चिह्नित कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत कराया है। पशुधन उत्पाद में चिकन नगेट्स, चिकन उत्पाद, मांस उत्पाद, प्रीमियम चिकन सूप और मिल्क चिप्स तैयार किया है। ए-2 मिल्क से आइसक्रीम, पनीर, मट्ठा, घी आदि तैयार कर संस्थान में बिक्री कर रहे हैं।
- 1889 : इम्पीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लेबोरेटरी (आईबीएल) पुणे में स्थापित।
- 1893 : आईबीएल लैब मुक्तेश्वर कुमाऊं हिल्स उत्तराखंड में शिफ्ट।
- 1913 : आईवीआरआई की स्थापना इज्जतनगर बरेली में।
- 1940 : पोल्ट्री में रानीखेत बीमारी रोकने के लिए पहली वैक्सीन बनी।
- 1947 : निदेशालय मुक्तेश्वर से आईवीआरआई इज्जतनगर में शिफ्ट।
- 1971 : आईवीआरआई के बंगलूरू परिसर की स्थापना।
अनुवांशिक विकास से विकसित की वृंदावनी गाय और लैंडली सूकर
पशुधन के अनुवांशिक विकास पर अनुसंधान से वैज्ञानिकों ने वृंदावनी गाय, लैंडली सूकर विकसित किया। रुहेलखंडी गाय, रुहेलखंडी बकरी, घुर्रा सूकर को चिह्नित कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत कराया है। पशुधन उत्पाद में चिकन नगेट्स, चिकन उत्पाद, मांस उत्पाद, प्रीमियम चिकन सूप और मिल्क चिप्स तैयार किया है। ए-2 मिल्क से आइसक्रीम, पनीर, मट्ठा, घी आदि तैयार कर संस्थान में बिक्री कर रहे हैं।