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कश्मीर में बंद पड़े अनुसंधान केंद्र को शुरू करने में जुटा आईवीआरआई
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बरेली। जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होती देख भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भी वर्षों से बंद पड़े अपने अनुसंधान केंद्र को फिर से शुरू करने में जुट गया है। श्रीनगर स्थित केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान (सीएसआरआई) नब्बे के दशक में आतंकी कार्रवाईयों को देखते हुए सरकार ने बंद कर दिया था। वहां तैनात वैज्ञानिक आईवीआरआई बरेली समेत विभिन्न स्थानों पर तैनात कर दिए गए थे।
जम्मू-कश्मीर स्थित सीएसआरआई श्रीनगर भेड़ पर अनुसंधान कर वैक्सीन बनाता था। भेड़ के फेफड़ों में होने वाली बीमारी से निपटने के लिए फ्लो वर्म वैक्सीन तैयार कर वैज्ञानिक उपचार करते थे। वैक्सीन की सप्लाई नेपाल, भूटान और हिमाचल प्रदेश आदि स्थानों को होती थी। साथ ही पश्मीना बकरी, बागवानी संस्थान, भामा एरोनॉटिक्स रेडियशन केंद्र (बीएआरसी) चल रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत यह सभी केंद्र संचालित थे। वर्ष 1990 में कश्मीर में अशांति की चलते केंद्र सरकार को कई प्रतिष्ठान, अनुसंधान केंद्र आदि बंद करने पड़े। वैज्ञानिक और कर्मचारियों को बरेली समेत अन्य स्थानों पर समायोजित कर तैनात किया गया था।
केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान (सीएसआरआई) श्रीनगर में तैनात वैज्ञानिक ओके रैना बरेली स्थित आईवीआरआई में तैनात किया गया, जबकि छोटे कर्मचारी वहीं पर केंद्रीय बागवानी केंद्र में समायोजित कर दिए गए। भामा एरोनॉटिक्स रेडियशन केंद्र (बीएआरसी) केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान को सहयोग करता था, लेकिन इसे भी बंद कर दिया गया। आईवीआरआई के निदेशक आरके सिंह ने करीब पांच वर्ष पहले बीएआरसी के उपकरण आदि की शिफ्टिंग के लिए बरेली से ओेके रैना आदि को लगाया गया था। पिछले सप्ताह से जम्मू-कश्मीर में हालात बदलना शुरू हो गए हैं। स्थिति तेजी से सामान्य हो रही हैं। इसलिए आईवीआरआई भी अब अपने बंद पड़े अनुसंधान संस्थान और अन्य केंद्र खोलने की कवायद में जुट गया है। यहां बता दें कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य करने के साथ ही वहां बंद पड़े प्रोजेक्ट और सेंटर भी शुरू कराना चाहता है। ऐसे संकेत भी केंद्र सरकार लगातार दे रही है। इसलिए आईवीआरआई के सहयोगी सेंटर फिर शुरू होने की उम्मीदें जागी हैं। प्रधान वैज्ञानिक ओके रैना ने बताया कि बंद शोध संस्थान शुरू होने से परिस्थितियां और अनुकूल होंगी।
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‘केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य करने में लगी है। कृषि मंत्रालय भी अपने बंद संस्थान फिर से शुरू करने का फैसला कभी भी ले सकता है। फिलहाल, आईवीआरआई प्रबंधन ने अपनी अनौपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान श्रीनगर और पश्मीना बकरी पर काफी काम हुआ है। यह केंद्र काफी महत्वपूर्ण है। हमारे यहां कार्यरत प्रधान वैज्ञानिक ओके रैना भी वहां कार्य करते थे।’
- आरके सिंह, निदेशक, आईवीआरआई
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जम्मू-कश्मीर स्थित सीएसआरआई श्रीनगर भेड़ पर अनुसंधान कर वैक्सीन बनाता था। भेड़ के फेफड़ों में होने वाली बीमारी से निपटने के लिए फ्लो वर्म वैक्सीन तैयार कर वैज्ञानिक उपचार करते थे। वैक्सीन की सप्लाई नेपाल, भूटान और हिमाचल प्रदेश आदि स्थानों को होती थी। साथ ही पश्मीना बकरी, बागवानी संस्थान, भामा एरोनॉटिक्स रेडियशन केंद्र (बीएआरसी) चल रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत यह सभी केंद्र संचालित थे। वर्ष 1990 में कश्मीर में अशांति की चलते केंद्र सरकार को कई प्रतिष्ठान, अनुसंधान केंद्र आदि बंद करने पड़े। वैज्ञानिक और कर्मचारियों को बरेली समेत अन्य स्थानों पर समायोजित कर तैनात किया गया था।
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केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान (सीएसआरआई) श्रीनगर में तैनात वैज्ञानिक ओके रैना बरेली स्थित आईवीआरआई में तैनात किया गया, जबकि छोटे कर्मचारी वहीं पर केंद्रीय बागवानी केंद्र में समायोजित कर दिए गए। भामा एरोनॉटिक्स रेडियशन केंद्र (बीएआरसी) केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान को सहयोग करता था, लेकिन इसे भी बंद कर दिया गया। आईवीआरआई के निदेशक आरके सिंह ने करीब पांच वर्ष पहले बीएआरसी के उपकरण आदि की शिफ्टिंग के लिए बरेली से ओेके रैना आदि को लगाया गया था। पिछले सप्ताह से जम्मू-कश्मीर में हालात बदलना शुरू हो गए हैं। स्थिति तेजी से सामान्य हो रही हैं। इसलिए आईवीआरआई भी अब अपने बंद पड़े अनुसंधान संस्थान और अन्य केंद्र खोलने की कवायद में जुट गया है। यहां बता दें कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य करने के साथ ही वहां बंद पड़े प्रोजेक्ट और सेंटर भी शुरू कराना चाहता है। ऐसे संकेत भी केंद्र सरकार लगातार दे रही है। इसलिए आईवीआरआई के सहयोगी सेंटर फिर शुरू होने की उम्मीदें जागी हैं। प्रधान वैज्ञानिक ओके रैना ने बताया कि बंद शोध संस्थान शुरू होने से परिस्थितियां और अनुकूल होंगी।
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‘केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य करने में लगी है। कृषि मंत्रालय भी अपने बंद संस्थान फिर से शुरू करने का फैसला कभी भी ले सकता है। फिलहाल, आईवीआरआई प्रबंधन ने अपनी अनौपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान श्रीनगर और पश्मीना बकरी पर काफी काम हुआ है। यह केंद्र काफी महत्वपूर्ण है। हमारे यहां कार्यरत प्रधान वैज्ञानिक ओके रैना भी वहां कार्य करते थे।’
- आरके सिंह, निदेशक, आईवीआरआई