फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Injured tigress found in the forest of Pilibhit Tiger Reserve dies during treatment

पीलीभीत टाइगर रिजर्व: घायल बाघिन की इलाज के दौरान मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आंतों में संक्रमण की पुष्टि

Sun, 26 Jul 2026 04:10 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 26 Jul 2026 04:10 PM IST
सार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज में घायल अवस्था में मिली बाघिन की उपचार के दौरान शनिवार रात मौत हो गई। करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद बाघिन उपचार के लिए माला गेस्ट हाउस लाई गई थी। बाघिन के शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया। 

विज्ञापन
Injured tigress found in the forest of Pilibhit Tiger Reserve dies during treatment
जंगल में घायल मिली थी बाघिन - फोटो : वन विभाग

विस्तार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज से शनिवार को घायल अवस्था में रेस्क्यू की गई करीब आठ वर्षीय बाघिन ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बाघिन का पोस्टमॉर्टम भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली में विशेषज्ञों के पैनल ने किया। जांच में उसके कान के पीछे, गर्दन और रीढ़ के आसपास गहरे जख्म मिले, इनमें कीड़े पड़ चुके थे। प्रथम दृष्टया यह चोटें किसी दूसरे बाघ से संघर्ष के दौरान लगी बताई गई हैं। वहीं, आंतों में कीड़े पड़ने से संक्रमण फैल गया। इससे बाघिन कमजोर होती गई।

विज्ञापन


शनिवार सुबह नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों ने माला रेंज में बाघिन को घायल अवस्था में देखा था। सूचना पर डीएफओ मनीष सिंह, रेंजर आरके सिंह और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हाथियों और जाल की मदद से घेराबंदी कर बाघिन का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और उसे माला रेंज कार्यालय परिसर लाकर उपचार शुरू किया गया।
विज्ञापन

उसकी निगरानी के लिए पांच सदस्यीय टीम भी गठित की गई थी। 

उपचार के दौरान हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। रात में ही बाघिन की मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बरेली आईवीआरआई भेजा गया, जहां डॉ. एमके पावड़े, डॉ. एम करीकलन और डॉ. दक्ष गंगवार की टीम ने परीक्षण किया। पोस्टमॉर्टम में कान के पीछे, गर्दन और रीढ़ के आसपास पुराने गहरे जख्म मिले, जिनमें कीड़े पड़ चुके थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

आंतों में कीड़े पड़ना बनी मौत की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष के बाद बाघिन घायल हुई। इसके बाद संभवतः जंगली सुअर का मांस खाने से बाघिन के पेट में परजीवी संक्रमण हुआ, इससे बाघिन की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आंतों में ब्लीडिंग भी होने लगी। संक्रमण के कारण वह भोजन भी नहीं कर पा रही थी। इससे वह कमजोर होती गई। उसकी मौत की वजह भी यही माना जा रहा है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि आईवीआरआई में विशेषज्ञों के पैनल ने बाघिन का पोस्टमॉर्टम किया। जांच में कान के पीछे, गर्दन और रीढ़ के पास पुराने जख्म मिले, जिनमें कीड़े पड़ चुके थे। प्रथम दृष्टया यह चोटें आपसी संघर्ष की हैं। आंतों में भी कीड़े मिले हैं, इससे संक्रमण हो गया था। संभवतः इसी कारण बाघिन खाना-पीना छोड़ चुकी थी।

चार कैमरों से शुरू की निगरानी, टीमों को भी किया अलर्ट
बाघिन के घायल अवस्था में मिलने और आपसी संघर्ष की बात सामने आने के बाद अधिकारी अलर्ट हो गए। डीएफओ मनीष सिंह के अनुसार घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में चार कैमरे लगा दिए गए। इसके अलावा टीमों को भी अलर्ट किया गया है। संघर्ष की स्थिति परखने के लिए लगातार सतर्कता बरती जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed