Bareilly News: जीनोम एडिटिंग के लिए स्वदेशी तकनीकी की जरूरत, सीएआरआई में बोले एएसआरबी के चेयरमैन
एएसआरबी चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने कहा कि कड़कनाथ के मांस और हड्डियों के काले रंग को बदलने, कम समय और कम चारे में मुर्गे-मुर्गियों का वजन चार गुना तक बढ़ाने के लिए जीनोम एडिटिंग जरूरी है।
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कुक्कुट प्रजाति को सर्वग्राही बनाने के लिए जीनोम एडिटिंग जरूरी है। इसके लिए वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही क्रिस्पर कैस तकनीकी विदेशी है। शर्तों के मुताबिक, इस तकनीकी से जीनोम एडिटिंग पर पेटेंट विदेशियों का होगा। लिहाजा, स्वदेशी वेक्टर तकनीकी विकसित करनी होगी। कृषि विज्ञान चयन मंडल (एएसआरबी) के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने सोमवार को केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) इज्जतनगर में ये बातें कहीं।
संस्थान में आयोजित ‘हैंड्स ऑन ट्रेनिंग इन एविएशन बायोटेक्नोलॉजी : एडवांसेज, इंपैक्ट एंड प्रॉसपेक्ट्स’ के उद्घाटन के मौके पर वह वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अनुसंधान के जरिये हमने देसी-विदेशी टर्की, बत्तख, मुर्गियों, बटेर आदि की उन्नत नस्लें विकसित की हैं। कड़कनाथ के मांस और हड्डियों के काले रंग को बदलने, कम समय और कम चारे में मुर्गे-मुर्गियों का वजन चार गुना तक बढ़ाने के लिए जीनोम एडिटिंग जरूरी है।
कार्यक्रम में बिहार एनिमल रिसर्च साइंस यूनिवर्सिटी के शोध निदेशक डॉ. वीके सक्सेना, सीएआरआई निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सिम्मी तोमर, वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकाड़े, डॉ. गौतम कोल्लूरी, डॉ. संदीप सरन, डॉ. एमपी सागर समेत अन्य वैज्ञानिक व शोधार्थी मौजूद रहे।
एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस से निजात के लिए विकल्प की तलाश
डॉ. संजय कुमार ने बताया कि कई किसान मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए उनको एंटीबॉयोटिक का सेवन कराते हैं। इससे एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस विकसित होता है, पर सीएआरआई ने हर्बी ग्रो व अन्य खाद्य उत्पाद तैयार किए हैं। उनके सेवन से एंटीबॉयोटिक की जरूरी नहीं पड़ती। अब दूसरे संस्थान भी एंटीबॉयोटिक दवाओं का विकल्प खोज रहे हैं।
एएसआरबी के पास कोई रिक्त पद नहीं
चेयरमैन के मुताबिक एएसआरबी के पास आईसीएआर के अधीन संचालित देश के किसी भी अनुसंधान संस्थान में अब वैज्ञानिकों का कोई पद रिक्त नहीं है। मानव संसाधन की जरूरत के लिए संस्थानों को आईसीएआर में प्रस्ताव रखना होगा। उन्होंने समाजहित में वैज्ञानिकों को निरंतर नवाचार के लिए प्रेरित किया। अनुसूचित वर्ग के किसानों को सिलाई मशीन, कुक्कुट, चारा आदि वितरित किया गया।
क्या है क्रिस्पर कैस तकनीकी
जीनोम में मौजूद डीएनए को संपादित करने की तकनीकी क्रिस्पर कैस है। इसके जरिये किसी जीव के आनुवंशिक गठन में बदलाव किया जा सकता है।
75 वर्षों में कई गुना बढ़ा उत्पादन
एएसआरबी चेयरमैन ने बताया कि वर्ष 1950 में देश में अंडा उत्पादन 1.8 बिलियन था, जो अब 122 बिलियन पहुंच गया है। यह अनुसंधान का ही परिणाम है। कैरी निर्भीक नस्ल मुक्तेश्वर भेजी गई और परिणाम बेहतर मिल रहे हैं। अगर जीनोम के साथ इंजीनियरिंग का मेल हो तो टर्की, बत्तख तटीय के बजाय मैदानी क्षेत्र में तेजी भी बढ़ेंगे।