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Bareilly News: जीत की चाह में नेताजी लगा रहे ग्रहों की थाह
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बरेली। राजनीति के धुरंधर इस समय ज्योतिषियों की शरण में है। उनकी सियासत ग्रहों की चाल पर अटक गई है। सियासी बाण चलाने में निपुण होने के बाद भी वे पर्चा भरने में कोई रिस्क लेना नहीं चाहते। इसके लिए वे पंडितों से मुहूर्त निकलवा रहे हैं। शुभ मुहूर्त, राहुकाल के अलावा कब घर से निकलें और कौन सा पैर आगे रखें, कैसे वस्त्र पहनें और किस मंत्र को बोलकर घर से निकलें, इसकी जानकारी पंडितों से ले रहे हैं। इन्हीं वजहों से सोमवार को नामांकन के पहले दिन अधिकारी इंतजार करते रहे, लेकिन किसी भी दावेदार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया।
ज्योतिर्विद डॉ. सौरभ शंखधार बताते हैं कि उनके पास चुनाव लड़ने वाले कई लोग आ रहे हैं। उन्हें वह बताते भी हैं कि शुभ लग्न वह है, जिसमें चतुर्थ, नवम एवं दशम भाव प्रभावशाली हो। इसमें चतुर्थ भाव प्रजा का सुख, नवम भाव से भाग्य तथा दशम भाव से कर्म स्थान देखा जाता है। इन तीनों भाव की प्रबलता बहुत आवश्यक होती है। जहां तक संभव हो, स्थिर लग्न में नामांकन तथा शपथ ग्रहण करना चाहिए। यहां शनि को प्रजा के सुख का कारक व सूर्य को राजकीय शासन व्यवस्था का कारक माना गया है। चतुर्थ ग्रही योग में नामांकन और परिणाम दोनों शुभ रहेंगे।
शुभ तिथियां
तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी व कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा श्रेष्ठ होती है।
शुभ दिन
रविवार, सोमवार, बुधवार, शुक्रवार।
शुभ नक्षत्र
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र शुभ माने गए हैं।
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कुछ आवश्यक उपाय
- नामांकन से परिणाम आने के दिन तक सूर्य के दर्शन अवश्य करें।
- लाल रंग के सूर्य के दर्शन अवश्य करें।
- गुण मिश्रित दान गरीबों को अवश्य करें।
- सफेद कपड़े पहन कर नामांकन करना शुभ होगा।
- देवियों में मां पीतांबरा व देवताओं में हनुमान जी, भैरव जी की साधना विशेष मानी जाती है।
राहुकाल
रविवार शाम 4.30 से 6.00 बजे तक।
सोमवार सुबह 7.30 से 9.00 बजे तक।
मंगलवार दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक।
बुधवार दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक।
गुरुवार दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक।
शुक्रवार सुबह 10.30 से दोपहर 12.00 बजे तक।
शनिवार सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक।
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ज्योतिर्विद डॉ. सौरभ शंखधार बताते हैं कि उनके पास चुनाव लड़ने वाले कई लोग आ रहे हैं। उन्हें वह बताते भी हैं कि शुभ लग्न वह है, जिसमें चतुर्थ, नवम एवं दशम भाव प्रभावशाली हो। इसमें चतुर्थ भाव प्रजा का सुख, नवम भाव से भाग्य तथा दशम भाव से कर्म स्थान देखा जाता है। इन तीनों भाव की प्रबलता बहुत आवश्यक होती है। जहां तक संभव हो, स्थिर लग्न में नामांकन तथा शपथ ग्रहण करना चाहिए। यहां शनि को प्रजा के सुख का कारक व सूर्य को राजकीय शासन व्यवस्था का कारक माना गया है। चतुर्थ ग्रही योग में नामांकन और परिणाम दोनों शुभ रहेंगे।
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शुभ तिथियां
तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी व कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा श्रेष्ठ होती है।
शुभ दिन
रविवार, सोमवार, बुधवार, शुक्रवार।
शुभ नक्षत्र
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र शुभ माने गए हैं।
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कुछ आवश्यक उपाय
- नामांकन से परिणाम आने के दिन तक सूर्य के दर्शन अवश्य करें।
- लाल रंग के सूर्य के दर्शन अवश्य करें।
- गुण मिश्रित दान गरीबों को अवश्य करें।
- सफेद कपड़े पहन कर नामांकन करना शुभ होगा।
- देवियों में मां पीतांबरा व देवताओं में हनुमान जी, भैरव जी की साधना विशेष मानी जाती है।
राहुकाल
रविवार शाम 4.30 से 6.00 बजे तक।
सोमवार सुबह 7.30 से 9.00 बजे तक।
मंगलवार दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक।
बुधवार दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक।
गुरुवार दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक।
शुक्रवार सुबह 10.30 से दोपहर 12.00 बजे तक।
शनिवार सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक।