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झाड़फूंक के चक्कर में बच्चे की जान चली गई
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 07 Aug 2016 01:47 AM IST
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सांप काटे हुए चार साल के बच्चे को लेकर गरीब रिक्शा चालक पहले झाड़ फूंक के चक्कर में बरेली से सहसवान गया। वहां कुछ नहीं हो पाया तो उसे अस्पताल की याद आयी लेकिन इस चक्कर में मासूम दम तोड़ गया। अब पिता का कहना है कि जिला अस्पताल इमरजेंसी मेें इलाज कर रहे डॉक्टर मोबाइल पर बात करने में मशगूल रहे। जब मोबाइल कट हुआ तो डॉक्टरों ने कह दिया कि अब इस बच्चे में कुछ नहीं बचा।
थाना अलीगंज के गांव गैनी निवासी ओंकार शहर में रिक्शा चलाते हैं। शनिवार को उनका मझला बेटा सन्नू (चार साल) घर के आंगन में तिरपाल बिछाकर सो रहा था। पूर्वाह्न 11 बजे पास में ही लगे ईंट पत्थरों से निकले सांप (कोयलिया गडार) ने उसे काट लिया। जैसे ही ये बात परिवार वालों को पता चली तो सबने मिलकर सांप पकड़ लिया और फौरन बच्चे को सहसवान (बदायूं) में झाड़ फूंक कर जहर उतारने वाले हकीम विद्यानंदन के पास ले गए। जब यहां फायदा नहीं हो पाया तो शाम पांच बजे मझगवां के पीएचसी पर भागे। यहां पीएचसी केंद्र प्रभारी ने 108 नंबर एंबुलेंस बुलाकर बरेली रेफर कर दिया। एंबूलेंस बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गई। ग्राम प्रधान नन्हें सिंह के मुताबिक अस्पताल की इमरजेंसी में दो डॉक्टर थे। पिता का आरोप है कि दोनों मोबाइल पर बात कर रहे थे। जब बातचीत खत्म हुई तो एक डॉक्टर ने बच्चे को देखते ही मृत घोषित करते हुए कहा कि अब इसे घर ले जाओ। इसमें कुछ नहीं बचा। मायूस बाप गांव वालों के साथ अपने चार साल के मासूम को लेकर रात 11 बजे अमर उजाला के दफ्तर पहुंचा और अपनी आप बीती सुनाई।
हम इसके बारे में पूरी बात मालूम करेंगे। अगर ये बात सही है तो एक्शन लिया जाएगा। डा. परवीन जहां, सीएमएस जिला अस्पताल
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थाना अलीगंज के गांव गैनी निवासी ओंकार शहर में रिक्शा चलाते हैं। शनिवार को उनका मझला बेटा सन्नू (चार साल) घर के आंगन में तिरपाल बिछाकर सो रहा था। पूर्वाह्न 11 बजे पास में ही लगे ईंट पत्थरों से निकले सांप (कोयलिया गडार) ने उसे काट लिया। जैसे ही ये बात परिवार वालों को पता चली तो सबने मिलकर सांप पकड़ लिया और फौरन बच्चे को सहसवान (बदायूं) में झाड़ फूंक कर जहर उतारने वाले हकीम विद्यानंदन के पास ले गए। जब यहां फायदा नहीं हो पाया तो शाम पांच बजे मझगवां के पीएचसी पर भागे। यहां पीएचसी केंद्र प्रभारी ने 108 नंबर एंबुलेंस बुलाकर बरेली रेफर कर दिया। एंबूलेंस बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गई। ग्राम प्रधान नन्हें सिंह के मुताबिक अस्पताल की इमरजेंसी में दो डॉक्टर थे। पिता का आरोप है कि दोनों मोबाइल पर बात कर रहे थे। जब बातचीत खत्म हुई तो एक डॉक्टर ने बच्चे को देखते ही मृत घोषित करते हुए कहा कि अब इसे घर ले जाओ। इसमें कुछ नहीं बचा। मायूस बाप गांव वालों के साथ अपने चार साल के मासूम को लेकर रात 11 बजे अमर उजाला के दफ्तर पहुंचा और अपनी आप बीती सुनाई।
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हम इसके बारे में पूरी बात मालूम करेंगे। अगर ये बात सही है तो एक्शन लिया जाएगा। डा. परवीन जहां, सीएमएस जिला अस्पताल