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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   in last 20 days 75 new born child are refer and 10 die

20 दिन में 75 नवजात रिफर, 10 ने तोड़ दिया दम

Sun, 23 Jul 2017 01:16 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 23 Jul 2017 01:16 AM IST
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बरेली। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में पिछले 20 दिनों के अंदर 10 नवजात शिशुआें की मौत हो गई है। यहां अधिकतर बच्चे महिला अस्पताल से भेजे गए हैं। बच्चा वार्ड में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैनात टेक्निकल सपोर्ट यूनिट की नर्स एजुकेटर ने प्रमुख अधीक्षक को पत्र लिखकर उनसे इस मामले पर आपत्ति जताई है और बढ़ रही मृत्यु दर पर रोक लगाने के पर्याप्त कदम उठाने को कहा है। महिला अस्पताल में दो और जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, बावजूद इसके बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के बीच आपसी तालमेल नहीं है। बच्चा वार्ड में अधिकतर बच्चे इमरजेंसी से ट्रांसफर होकर आते हैं जबकि कुछ बच्चाें को डॉक्टर भर्ती करते हैं। जबकि महिला अस्पताल में एनआईसीयू न होने के चलते नवजात बच्चों को पैदा होने के कुछ देर बाद बच्चा वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। महिला अस्पताल से बच्चा वार्ड में आने की आपाधापी के चलते 10 नवजात बच्चाें की मौत 20 दिन में हो गई है। यही नहीं, जो बच्चे महिला अस्पताल से बच्चा वार्ड में भेजे गए हैं वह भी 20 दिनाें में 75 हैं। ऐसे में प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता ने नर्स एजुकेटर के पत्र का संज्ञान लेते हुए महिला अस्पताल की सीएमओ को कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने यह भी लिखा है कि नवजात बच्चाें का उपचार न करके सीधे बच्चा वार्ड में भेज दिया जा रहा है जिससे लगता है कि महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ पर्याप्त रुचि नहीं ले रहे हैं।
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- आखिर क्यों नहीं चला रहे हैं वेंटीलेटर नवजात बच्चाें की जान खतरे में है और बाल रोग विशेषज्ञ वेंटीलेटर चलाने से बच रहे हैं। नर्स एजुकेटर ने पत्र में लिखा है कि बच्चा वार्ड में वेंटीलेटर न चलाए जाने से भी नवजात बच्चाें को दिक्कत हो रही है इसे जल्द शुरू किया जाए। जबकि जिला अस्पताल के डॉ. करमेंद्र और डॉ. एसके सागर रुचि नहीं ले रहे हैं।
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कोट महिला अस्पताल से सीधे बच्चाें को बच्चा वार्ड में भेज दिया जाता है जिससे उनकी तबियत बिगड़ रही है और जान खतरे में पड़ती है जबकि वहां बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। अगर वहां वार्ड नहीं है तो वहां के डॉक्टर हमारे यहां आकर इलाज करें।
डॉ. केएस गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक हमारे यहां नवजात बच्चाें को भर्ती करने का वार्ड नहीं है इसलिए सिर्फ गंभीर बच्चों को ही बच्चा वार्ड में भर्ती करने के लिए भेजा जाता है। डॉ. अनीता धस्माना, सीएमएस, महिला अस्पताल
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