जनकपुरी में बंदरों के आतंक से जेलखाने बने घर

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 01:00 AM IST
बंदरों के भय से लोगों ने घरों को लोहे का जालों से किया बंद।
बंदरों के भय से लोगों ने घरों को लोहे का जालों से किया बंद। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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हर रोज लोगों पर करते हैं हमला, छतों पर जाना ही नहीं गली में निकलना भी खतरनाक
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पूर्व फौजी को किया लहूलुहान, चेहरे पर आए कई टांके, बचाने वालों को भी दौड़ाया

बरेली। जनकपुरी में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। सोमवार को घर के बाहर खड़े एक पूर्व सैनिक पर बंदरों के झुंड ने हमला कर लहूलुहान कर दिया। उन्हें बचाने को भी किसी को पास नहीं आने दिया। बुरी तरह घायल पूर्व सैनिक के चेहरे पर कई लगे हैं। कॉलोनी बंदरों की इतनी दहशत है कि लोगों को घरों को बंद करने के लिए लोहे का जाल लगवाना पड़ रहा है।
जनकपुरी में सोमवार सुबह राकेश सक्सेना बंदरों के हमले का शिकार हुए। उनके चेहरे पर कई जगह काटकर उन्हें लहूलुहान कर दिया। शोर मचाने पर कॉलोनी के लोग बचाने दौड़े तो बंदरों ने उन्हें भी दौड़ा लिया। राकेश की पत्नी नीलम ने बताया कि बमुश्किल लोगों ने उनके पति को बचाया। उनके चेहरे पर कई टांके आए हैं। बंदरों के आतंक के कारण उन्हाेंने घर के बाहर चारों ओर जाल लगवा लिया है।

घर पर कुछ सामान लाना हो तो करने पड़ते हैं बचाव के इंतजाम

बंदरों की बढ़ती तादाद और हमलों की वजह से जनकपुरी में यह हाल है कि लोग छतों पर बिना लाठी-डंडा लिए नहीं जा सकते। मकानों की छतों और गलियों में बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। लिहाजा गली में सामान लेकर निकलना भी खतरनाक हो गया है। बंदर कभी भी हमला कर घायल कर देते हैं। छतों पर कपड़े सुखाने बंद कर दिए गए हैं। सुबह स्कूल जाते बच्चों के साथ अभिभावकों को जाना जाना पड़ता है। बंदरों के हमले के डर से लोगों घरों में जेल की तरह रहने पड़ता है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाया जाएगा।

लोग बोले- बंदरों के हमले हर रोज की बात

बंदरों से बचने के लिए लोहे के जाल लगवाने पड़ रहे हैं। मेरी दुकान में बंदर घुस आते हैं इसलिए जाल का गेट बंद कर दुकानदारी करनी पड़ती है। बंदरों को पकड़वाया जाए। -किशोर कुमार, दुकानदार

गलियों में सुबह बंदर झुंड बनाकर घूमते हैं। हमले से बचने के लिए खुद बच्चों को छोड़ने जाना पड़ता है। हाथ में डंडा लेकर बाहर निकलते हैं। बंदरों से मुक्ति मिलनी चाहिए। -दुर्गा सिंह


बंदरों के झुंड ने आज मुझे भी दौड़ा लिया। मेरे हाथ में डंडा था, मोहल्ले के लोग भी आ गए तब कहीं बंदरों को भगा पाए। ऐसा यहां रोज होता है। किसी न किसी को बंदर काट लेते हैं। -अमृत बत्रा

आए दिन बंदर उत्पात मचाते हैं। सोमवार को सुबह कई लोगों को दौड़ा लिया। सभी के हाथ में डंडा था नहीं तो बंदरों से बचना मुश्किल था। नगर निगम को बंदरों को पकड़वाना चाहिए। -चंद्रप्रभा गंगवार

सोमवार को बंदरों ने कई लोगों पर हमला कर दिया। आवाजें सुनकर मैं बाहर छज्जे पर आई तो बंदरों के झुंड ने मुझ पर भी हमला कर दिया। मैं अंदर भागी, बेटी ने डंडे मारकर उन्हें भगाया। - रामदेवी गंगवार

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