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Bareilly News: अवैध डेयरियों से परेशानी, गोकुल धाम योजना 29 साल बाद भी अधूरी
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बरेली। नगर निगम क्षेत्र में 833 अवैध डेयरियों के कारण लोगों को 30 साल पुरानी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इन डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालों को जाम कर रहा है, जिससे जलभराव और सड़कों पर घूमते पशुओं से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए 29 साल पहले गोकुल धाम बसाने की योजना बनी थी, लेकिन यह आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
शहर के बानखाना, सुरखा छावनी, नीम की चढ़ाई, साहूकारा, मढ़ीनाथ और पुराने शहर जैसे इलाकों में डेयरियां अधिक हैं। कई डेयरियों में 500 से 700 भैंसें पाली जाती हैं। डेयरी संचालक पानी की मशीन से गोबर को सीधे नालों में बहा देते हैं। इससे शहर के नाले पूरी तरह जाम हो जाते हैं। थोड़ी सी बारिश होने पर भी घुटने भर पानी भर जाता है। नगरवासी इस जलभराव की समस्या से जूझने को मजबूर हैं। सड़कों पर घूम रहे पालतू पशु भी लोगों को घायल कर रहे हैं। यह समस्या नगरवासियों के लिए पिछले तीन दशकों से बनी हुई है।
अधिकारियों के स्थानांतरण से योजना ठंडे बस्ते में चली गई
इस समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर से गोकुल धाम बसाने की योजना बनी थी। पहली बार 1998 में बरेली विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद को इस संबंध में पत्र मिला। इसमें लखनऊ की तर्ज पर साढ़े छह एकड़ में भूखंड आवंटित करने और पांच हजार मवेशियों को रखने का प्रस्ताव था। अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2013-14 में तत्कालीन बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शशांक विक्रम ने दूसरा प्रयास किया, पर वह भी सफल नहीं हुआ।
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कार्रवाई में ढिलाई से बढ़ रहा हौसला
नगर निगम डेयरी संचालकों पर पांच हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाता है। हालांकि, कई संचालक जुर्माना भरने के बजाय कोर्ट में सुनवाई का विकल्प चुनते हैं। कोर्ट अक्सर मामूली जुर्माना तय कर उन्हें छोड़ देती है। नगर निगम अधिकारियों द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने से डेयरी संचालकों का हौसला बढ़ा है।
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वर्जन ...
डेयरियों को हटाने के लिए प्रशासन से सहयोग मिले तो नगर निगम इसके लिए तैयार है। गोकुल धाम बसाने के लिए बीडीए या जिला पंचायत क्षेत्र में भूमि का आवंटन कर दिया जाए तो शहर से डेयरियों को प्रशासन व फोर्स के सहयोग से हटा दिया जाएगा। - डाॅ. भानुप्रकाश, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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वर्जन ...
1998 में शासन से नगर निगम की डेयरियों को हटाकर बरेली विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद क्षेत्र में बसाने के लिए पत्र प्राप्त आया था। उस समय जितने भूभाग की आवश्यकता थी, वह नहीं प्राप्त हुआ। फिलहाल इसके लिए पुन: बैठक आगे का निर्णय लिया जाएगा। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बरेली विकास प्राधिकरण
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शहर के बानखाना, सुरखा छावनी, नीम की चढ़ाई, साहूकारा, मढ़ीनाथ और पुराने शहर जैसे इलाकों में डेयरियां अधिक हैं। कई डेयरियों में 500 से 700 भैंसें पाली जाती हैं। डेयरी संचालक पानी की मशीन से गोबर को सीधे नालों में बहा देते हैं। इससे शहर के नाले पूरी तरह जाम हो जाते हैं। थोड़ी सी बारिश होने पर भी घुटने भर पानी भर जाता है। नगरवासी इस जलभराव की समस्या से जूझने को मजबूर हैं। सड़कों पर घूम रहे पालतू पशु भी लोगों को घायल कर रहे हैं। यह समस्या नगरवासियों के लिए पिछले तीन दशकों से बनी हुई है।
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अधिकारियों के स्थानांतरण से योजना ठंडे बस्ते में चली गई
इस समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर से गोकुल धाम बसाने की योजना बनी थी। पहली बार 1998 में बरेली विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद को इस संबंध में पत्र मिला। इसमें लखनऊ की तर्ज पर साढ़े छह एकड़ में भूखंड आवंटित करने और पांच हजार मवेशियों को रखने का प्रस्ताव था। अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2013-14 में तत्कालीन बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शशांक विक्रम ने दूसरा प्रयास किया, पर वह भी सफल नहीं हुआ।
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कार्रवाई में ढिलाई से बढ़ रहा हौसला
नगर निगम डेयरी संचालकों पर पांच हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाता है। हालांकि, कई संचालक जुर्माना भरने के बजाय कोर्ट में सुनवाई का विकल्प चुनते हैं। कोर्ट अक्सर मामूली जुर्माना तय कर उन्हें छोड़ देती है। नगर निगम अधिकारियों द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने से डेयरी संचालकों का हौसला बढ़ा है।
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वर्जन ...
डेयरियों को हटाने के लिए प्रशासन से सहयोग मिले तो नगर निगम इसके लिए तैयार है। गोकुल धाम बसाने के लिए बीडीए या जिला पंचायत क्षेत्र में भूमि का आवंटन कर दिया जाए तो शहर से डेयरियों को प्रशासन व फोर्स के सहयोग से हटा दिया जाएगा। - डाॅ. भानुप्रकाश, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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वर्जन ...
1998 में शासन से नगर निगम की डेयरियों को हटाकर बरेली विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद क्षेत्र में बसाने के लिए पत्र प्राप्त आया था। उस समय जितने भूभाग की आवश्यकता थी, वह नहीं प्राप्त हुआ। फिलहाल इसके लिए पुन: बैठक आगे का निर्णय लिया जाएगा। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बरेली विकास प्राधिकरण