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पैसे से नेता बनते तो पीएम होते टाटा-अंबानी: डॉ. तोमर
बरेली
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:37 AM IST
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भाजपा से उमेश गौतम के प्रत्याशी घोषित होने के बाद बृहस्पतिवार को सपा के मेयर प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर ने बगैर नाम लिए कहा, ‘वह तो बड़े आदमी हैं, मैं छोटा ही नहीं बहुत छोटा हूं। इसलिए उन पर कोई कमेंट नहीं करूं गा।’ डॉ. तोमर ने कहा कि नगर निगम तो जनता को सर्विस देने वाली एजेंसी है। इसमें सफाई कर्मी की तरह काम करना होता है जो जमीन से जुड़े लोग ही कर सकते हैं। पैसे से अगर लोग नेता बन जाते तो नरेंद्र मोदी के बजाय टाटा, बिरला और अंबानी परिवार के लोग प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे होते। उन्होंने कहा कि नेता पब्लिक चुनती है। कौन जीतेगा और कौन हारेगा यह भी जनता ही तय करेगी। चुनाव लड़ने वाला खुद अपनी हार-जीत तय नहीं कर सकता।
बुधवार को अपने आवास पर अमर उजाला से बातचीत में डॉ. तोमर ने कहा कि उन्होंने शहर में बिना भेदभाव के विकास कार्य कराए हैं। उन्हें गली-गली से वोट मिलेगा। जनता मोहब्बत और विश्वास से जुड़ती है, पैसे से जनता को नहीं खरीदा जा सकता। उन्होंने शहर में काम कराए हैं, उन्हें लेकर जनता के बीच जाएंगे। जनता उनकी सफलता और असफलता तय करके वोट देगी। शहर के लोगों के लिए उन्होंने जो काम किया है, जनता सब जानती है। उनका प्रतिद्वंद्वी सफलता और असफलता तय नहीं कर सकता। वह इस पर कोई कमेंट भी नहीं करेंगे कि पैसे वाले के अलावा कोई और प्रत्याशी होता तो उनका मुकाबला कड़ा होता या नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कहना कि ‘रूठों को मना लूंगा, सबको हरा लूंगा’, घमंड का इससे बड़ा सुबूत और क्या हो सकता है। घमंडी तो ईश्वर को ही पसंद नही है, जनता क्या पसंद करेगी। बोले, हम तो बहुत छोटे लोग हैं। जनता की मोहब्बत की वजह से दो बार सेवा का मौका मिला है। जितना हो सका विकास भी कराया।
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बुधवार को अपने आवास पर अमर उजाला से बातचीत में डॉ. तोमर ने कहा कि उन्होंने शहर में बिना भेदभाव के विकास कार्य कराए हैं। उन्हें गली-गली से वोट मिलेगा। जनता मोहब्बत और विश्वास से जुड़ती है, पैसे से जनता को नहीं खरीदा जा सकता। उन्होंने शहर में काम कराए हैं, उन्हें लेकर जनता के बीच जाएंगे। जनता उनकी सफलता और असफलता तय करके वोट देगी। शहर के लोगों के लिए उन्होंने जो काम किया है, जनता सब जानती है। उनका प्रतिद्वंद्वी सफलता और असफलता तय नहीं कर सकता। वह इस पर कोई कमेंट भी नहीं करेंगे कि पैसे वाले के अलावा कोई और प्रत्याशी होता तो उनका मुकाबला कड़ा होता या नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कहना कि ‘रूठों को मना लूंगा, सबको हरा लूंगा’, घमंड का इससे बड़ा सुबूत और क्या हो सकता है। घमंडी तो ईश्वर को ही पसंद नही है, जनता क्या पसंद करेगी। बोले, हम तो बहुत छोटे लोग हैं। जनता की मोहब्बत की वजह से दो बार सेवा का मौका मिला है। जितना हो सका विकास भी कराया।
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