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विशाल मेगामार्ट पार्किंग भी अवैध, माह में आठ लाख की कमाई
ब्ययूराो, अमर उजाल बरेली।
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:15 AM IST
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शहर के प्रतिष्ठित शोरूम विशाल मेगामार्ट में रोजाना खरीदारी करने आने वाले ग्राहकों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। प्राधिकरण नियमों में ग्राहकों को वाहन पार्किंग की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद शोरूम की पार्किंग में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात के 10 बजे तक खड़े होने वाले औसतन 15 सौ वाहनों से वसूली हो रही है। इससे प्रतिमाह औसतन आठ लाख की कमाई हो रही है। बिल्डिंग के मालिक कह रहे हैं कि पैसा कर्मचारी वसूलते हैं और उनका इससे खर्च चलता है। जबकि वहां मौजूद कर्मचारी यही बताते हैं कि ठेका विशाल का है। वसूल कोई रहा हो पब्लिक तो पार्किंग के नाम पर लुट ही रही है।
पटेल चौक से चौपुला जाने वाले मार्ग पर स्थित शोरूम विशाल मेगामार्ट भवन के नीचे पार्किंग बनी है। मेगामार्ट ने सामने सड़क के किनारे खाली पड़ी सरकारी जमीन भी घेर रखी है। इस पर भी अनाधिकृत तरीके से कार, बाइक या अन्य वाहन खड़े होते हैं। बीडीए नियमों के मुताबिक व्यावसायिक भवनों में बेसमेंट पार्किंग बनाना अनिवार्य है। वाहनों की पार्किंग ग्राहकों को मुफ्त में दी जाने वाली सेवा है। मगर, विशाल मेगामार्ट की बेसमेंट पार्किंग में प्रतिदिन करीब एक हजार बाइक और पांच सौ कारें व अन्य वाहन खड़े होते हैं। यहां चार कर्मचारी प्रति बाइक 10 रुपये और प्रति कार 30 रुपये पार्किंग शुल्क वसूलते हैं। इस तरह पार्किंग से प्रतिदिन 25 हजार और प्रति माह औसतन आठ लाख से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। नगर निगम से न तो इस पार्किंग की अनुमति ली जाती है और न ही कोई टैक्स मिलता है। बीडीए की मेहरबानी से शोरूम का ये अवैध कमाई का धंधा पूरे जोर शोर से चल रहा है।
क्या हैं पार्किंग के नियम
बीडीए नियमों के मुताबिक शॉपिंग सेंटर, बाजार स्ट्रीट, मल्टीप्लेक्स सिनेमा, थिएटर, या शॉपिंग माल को प्रत्येक 100 वर्ग मीटर तल क्षेत्रफल पर पार्किंग बनाए। खुले में 23 वर्ग मीटर, कवर्ड में 28 वर्ग मीटर, बेसमेंट मेें 32 वर्ग मीटर और मेकेनाइज्ड पार्किंग 16 वर्ग मीटर में बनाना अनिवार्य है। व्यवसायिक भवनों में ग्राहकों को पार्किंग की सुविधा निशुल्क होगी।
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नगर निगम की अनुमति से होंगे ठेके
शहर में किसी भी स्थल की पार्किंग की अनुमति नगर निगम से लेनी होगी। नगर निगम की बिना अनुमति पार्किंग का ठेका देना या वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूलना नियम विरुद्ध है। सार्वजनिक पार्किंग के ठेके नगर निगम खुले तौर पर नीलामी में बोली के आधार पर तय करता है।
‘पार्किंग का कोई पैसा न तो हम ग्राहकों से लेते हैं न किसी और से। ग्राहक सड़क पर गाड़ियां खड़ी करते थे। तब पुलिस परेशान करती थी या फिर गाड़ियां चोरी हो जाती थीं। यहां एक इलैक्ट्रीशियन ने बेसमेंट में कर्मचारी रखकर गाड़ियों की सुरक्षा की बात कही तो उसे बेसमेंट दे दिया गया। वही ग्राहकों से गाड़ियां खड़ी करने के बदले पैसा वसूलता है जिससे उनके कर्मचारियों का खर्चा चल जाता है।’ राधेश्याम जुनेजा, भवन मालिक, विशाल मेगामार्ट
‘बेसमेंट पार्किंग से वसूली रोकना तो बीडीए का काम है। मेगामार्ट शोरूम ने सड़क पर वाहन खड़े कराकर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है, उसे पुलिस की मदद से हर हाल में हटवाया जाएगा।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त
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पटेल चौक से चौपुला जाने वाले मार्ग पर स्थित शोरूम विशाल मेगामार्ट भवन के नीचे पार्किंग बनी है। मेगामार्ट ने सामने सड़क के किनारे खाली पड़ी सरकारी जमीन भी घेर रखी है। इस पर भी अनाधिकृत तरीके से कार, बाइक या अन्य वाहन खड़े होते हैं। बीडीए नियमों के मुताबिक व्यावसायिक भवनों में बेसमेंट पार्किंग बनाना अनिवार्य है। वाहनों की पार्किंग ग्राहकों को मुफ्त में दी जाने वाली सेवा है। मगर, विशाल मेगामार्ट की बेसमेंट पार्किंग में प्रतिदिन करीब एक हजार बाइक और पांच सौ कारें व अन्य वाहन खड़े होते हैं। यहां चार कर्मचारी प्रति बाइक 10 रुपये और प्रति कार 30 रुपये पार्किंग शुल्क वसूलते हैं। इस तरह पार्किंग से प्रतिदिन 25 हजार और प्रति माह औसतन आठ लाख से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। नगर निगम से न तो इस पार्किंग की अनुमति ली जाती है और न ही कोई टैक्स मिलता है। बीडीए की मेहरबानी से शोरूम का ये अवैध कमाई का धंधा पूरे जोर शोर से चल रहा है।
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क्या हैं पार्किंग के नियम
बीडीए नियमों के मुताबिक शॉपिंग सेंटर, बाजार स्ट्रीट, मल्टीप्लेक्स सिनेमा, थिएटर, या शॉपिंग माल को प्रत्येक 100 वर्ग मीटर तल क्षेत्रफल पर पार्किंग बनाए। खुले में 23 वर्ग मीटर, कवर्ड में 28 वर्ग मीटर, बेसमेंट मेें 32 वर्ग मीटर और मेकेनाइज्ड पार्किंग 16 वर्ग मीटर में बनाना अनिवार्य है। व्यवसायिक भवनों में ग्राहकों को पार्किंग की सुविधा निशुल्क होगी।
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नगर निगम की अनुमति से होंगे ठेके
शहर में किसी भी स्थल की पार्किंग की अनुमति नगर निगम से लेनी होगी। नगर निगम की बिना अनुमति पार्किंग का ठेका देना या वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूलना नियम विरुद्ध है। सार्वजनिक पार्किंग के ठेके नगर निगम खुले तौर पर नीलामी में बोली के आधार पर तय करता है।
‘पार्किंग का कोई पैसा न तो हम ग्राहकों से लेते हैं न किसी और से। ग्राहक सड़क पर गाड़ियां खड़ी करते थे। तब पुलिस परेशान करती थी या फिर गाड़ियां चोरी हो जाती थीं। यहां एक इलैक्ट्रीशियन ने बेसमेंट में कर्मचारी रखकर गाड़ियों की सुरक्षा की बात कही तो उसे बेसमेंट दे दिया गया। वही ग्राहकों से गाड़ियां खड़ी करने के बदले पैसा वसूलता है जिससे उनके कर्मचारियों का खर्चा चल जाता है।’ राधेश्याम जुनेजा, भवन मालिक, विशाल मेगामार्ट
‘बेसमेंट पार्किंग से वसूली रोकना तो बीडीए का काम है। मेगामार्ट शोरूम ने सड़क पर वाहन खड़े कराकर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है, उसे पुलिस की मदद से हर हाल में हटवाया जाएगा।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त