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विधायक निधि में घपला करने वाली फर्म पर कसा शिकंजा
बरेली।
Updated Sat, 04 Nov 2017 01:37 AM IST
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सपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में विधायक निधि के कामों में करोड़ों रुपये का घपला करने वाली संस्था आईपीसीएल पर शिकंजा कसता जा रहा है। संस्था के खिलाफ जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। संस्था को फायदा पहुंचाने वाले बाबू और फर्म के महाप्रबंधक जांच कमेटी को घपले से जुड़े अभिलेख उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। लिहाजा उन्हें तीसरी बार नोटिस दिया गया है।
वर्ष 2012 से 2017 तक बरेली के नौ विधायकों में से सात ने अपनी निधि से सड़क, नाली, खड़ंजा, बारातघर निर्माण, सोलर और स्ट्रीट लाइट के अलावा सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे काम सरकारी संस्था आरईएस से न कराके प्रतापगढ़ की निजी फर्म इंडियन प्रोजेक्ट्स एंड कंस्ट्रक्शन कोआपरेटिव लिमिटेड (आईपीसीएल) से कराए थे। यह संस्था पहले से ही गोरखपुर की डिफाल्टर घोषित थी। बरेली में संस्था ने सात विधायकों के 10 करोड़ से ज्यादा के काम आधे-अधूरे कराकर पटल कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरा भुगतान पा लिया। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद बहेड़ी विधायक छत्रपाल सिंह ने आईपीसीएल के कामों में बड़े घोटाले की जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. पिंकी जोवल को पत्र लिखा था। इस पर सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर पूरे प्रदेश में सांसद या विधायक निधि समेत कोई भी सरकारी काम न देकर संस्था को ब्लैक लिस्टेड घोषित करने के लिए शासन को पत्र लिखा था।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी में पीडब्ल्यूडी एई राजेंद्र बहादुर आंवला, एई आशीष सक्सेना बिथरी चैनपुर और बीपी सिंह भोजीपुरा में आईपीसीएल के कामों की जांच कर रहे हैं। डीआरडीए के सहायक अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग कैंट और शहर के अलावा फरीदपुर विधानक्षेत्र में कराए गए संस्था के कामों की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। विधायक निधि के कामों के अभिलेख न मिलने से जांच छह महीने से बहुत धीमी गति से चल रही थी। हालांकि अब यह जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद संस्था पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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आईपीसीएल द्वारा पांच साल में विधायक निधि से कराए गए कामों की जांच पूरी होने के करीब पहुंच चुकी है। संबंधित लोगों को तीसरा नोटिस भेजकर जांच कमेटी को अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - वीरेंद्र सिंह यादव, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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वर्ष 2012 से 2017 तक बरेली के नौ विधायकों में से सात ने अपनी निधि से सड़क, नाली, खड़ंजा, बारातघर निर्माण, सोलर और स्ट्रीट लाइट के अलावा सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे काम सरकारी संस्था आरईएस से न कराके प्रतापगढ़ की निजी फर्म इंडियन प्रोजेक्ट्स एंड कंस्ट्रक्शन कोआपरेटिव लिमिटेड (आईपीसीएल) से कराए थे। यह संस्था पहले से ही गोरखपुर की डिफाल्टर घोषित थी। बरेली में संस्था ने सात विधायकों के 10 करोड़ से ज्यादा के काम आधे-अधूरे कराकर पटल कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरा भुगतान पा लिया। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद बहेड़ी विधायक छत्रपाल सिंह ने आईपीसीएल के कामों में बड़े घोटाले की जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. पिंकी जोवल को पत्र लिखा था। इस पर सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर पूरे प्रदेश में सांसद या विधायक निधि समेत कोई भी सरकारी काम न देकर संस्था को ब्लैक लिस्टेड घोषित करने के लिए शासन को पत्र लिखा था।
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तीन सदस्यीय जांच कमेटी में पीडब्ल्यूडी एई राजेंद्र बहादुर आंवला, एई आशीष सक्सेना बिथरी चैनपुर और बीपी सिंह भोजीपुरा में आईपीसीएल के कामों की जांच कर रहे हैं। डीआरडीए के सहायक अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग कैंट और शहर के अलावा फरीदपुर विधानक्षेत्र में कराए गए संस्था के कामों की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। विधायक निधि के कामों के अभिलेख न मिलने से जांच छह महीने से बहुत धीमी गति से चल रही थी। हालांकि अब यह जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद संस्था पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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आईपीसीएल द्वारा पांच साल में विधायक निधि से कराए गए कामों की जांच पूरी होने के करीब पहुंच चुकी है। संबंधित लोगों को तीसरा नोटिस भेजकर जांच कमेटी को अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - वीरेंद्र सिंह यादव, परियोजना निदेशक डीआरडीए