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कोरोना से कैसे लड़ी जाए जंग, जब करोड़ों के उपकरण खा रहे जंग

Fri, 17 Jul 2020 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 01:54 AM IST
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How to fight the battle with Corona, when crores of equipment are eating rust
एक शख्स के स्वैब का नमूना एकत्र करती महिला स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI

विशेषज्ञों के अभाव में चार साल से धूल फांक रहा है वेंटिलेटर
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बीएसएल-2 लैब और एंटीजन किट चलाने के लिए भी नहीं है कोई प्रशिक्षित

बरेली। कोरोना से लड़ी जा रही जंग में स्वास्थ्य विभाग भले ही निजी अस्पतालों के भरोसे व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा करे, लेकिन संसाधनों की कमी दावों की पोल खोल रही है। विभाग के पास कहने को दो वेंटिलेटर हैं, सैंपल की जांच के लिए बीएसएल-2 लैब और एंटीजन किटें भी मिल गईं हैं। मगर प्रशिक्षित न होने की वजह से यह अहम उपकरण अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में करीब तीन साल से दो वेंटिलेटर रखे हैं लेकिन अब तक उनका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। दरअसल, उन्हें चलाने के लिए कोई प्रशिक्षित स्टाफ ही अस्पताल में नहीं है। जिला अस्पताल में 11 जून, 2017 को दो वेंटिलेटर आए थे। इन्हें खरीदने के लिए एमएलसी प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने अपनी निधि से धनराशि दी थी। लंबे समय से इस्तेमाल न होने से यह वेंटिलेटर जंग खा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के इस दौर में वेंटिलेटर बेहद जरूरी है।
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अफसरों की लापरवाही भी आई सामने

कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद आईडीएसपी टीम की ओर से वेंटिलेटर चालू करने के प्रयास भी किए गए थे। अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के टेक्निकल एक्सपर्ट इसके लिए निशुल्क सेवाएं देने को भी तैयार थे, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। करीब दो माह से ज्यादा समय के लॉकडाउन के दौरान वे वेंटिलेटर चालू करने के प्रयास करते रहे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सहयोग न करने पर लौट गए गए।
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बीएसएल-2 लैब भी निरर्थक साबित हो रही

करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार बायोसेफ्टी लेवल-2 लैब का लोकार्पण हुए हफ्ता भर हो चुका है, लेकिन लैब में अब तक एक भी सैंपल की जांच नहीं हो सकी है। उम्मीद जताई जा रही थी लैब में लोकार्पण के बाद हर दिन कम से कम सौ सैंपल की रोजाना जांच होने से तेजी से संक्रमितों की पहचान हो सकेगी और संक्रमण रोकने में मदद मिलेगी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक लैब को चालू नहीं कर सका है। इस बाबत सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल का कहना है कि माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट न होने से लैब में सैंपल की जांच शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट के आने के बाद ही लैब में सैंपल की जांच शुरू होने की बात कही है।

एंटीजन किट आ गईं मगर प्रशिक्षित स्टाफ नहीं

कोरोना के हाईरिस्क संदिग्ध संक्रमितों की तत्काल जांच के लिए शासन की ओर से पांच हजार एंटीजन किट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गईं हैं। दो दिन पहले ही सारी किट बरेली पहुंच चुकी हैं मगर किट के संचालन के बाबत विशेषज्ञ न होने से इनका प्रयोग शुरू नहीं हो सका है। बता दें कि यह किट कोरोना सैंपल की जांच का बेहद सटीक परिणाम देती हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो संक्रमण की पुष्टि मान ली जाती है, लेकिन निगेटिव आने पर आरटीपीसीआर जांच कराना जरूरी होता है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल के मुताबिक, किट से कैसे जांच की जानी है, इसका किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। उच्चाधिकारियों से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया है।
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