फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Hoping to get a precious land between the city and

शहर के बीच और एक कीमती जमीन मिलने की उम्मीद

Sun, 17 Sep 2017 01:51 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 17 Sep 2017 01:51 AM IST
विज्ञापन
पुरानी जेल की जमीन मिल ही चुकी है, रबर फैक्ट्री की जमीन के भी जल्द हस्तांतरण की उम्मीद जताई जा रही है लेकिन नेकपुर चीनी मिल को बेचने पर रोक लगने के बाद अब शहर में एक और कीमती भूमि विकास के बड़े प्रोजेक्ट के लिए मिलने की संभावनाएं जाग गई हैं। अगर यह जमीन भी मिल जाती है तो शहर में प्रस्तावित बरेली सेंट्रल योजना को और विस्तारित किया जा सकेगा। 
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने बरेली की नेकपुर चीनी मिल समेत 21 चीनी मिलों को बेचने पर रोक लगा दी है। इससे अपने करीब एक करोड़ रुपये के ईपीएफ के बकाये के लिए वर्षों से लड़ाई लड़ रहे श्रमिक संगठन नेताओं के चेहरे खिल गए हैं। बसपा सरकार ने करीब दो अरब कीमत की नेकपुर चीनी मिल को वर्ष 2011 में नम्रता मार्केटिंग, सविता विहार नई दिल्ली के नाम मात्र 14.11 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इस फर्म ने अनुबंध प्रक्रिया पूरी होते ही मिल परिसर में पड़े स्क्रैप और उपकरण ही 15 करोड़ रुपये में बेच डाले थे। श्रमिकों के विरोध पर ईपीएफ कमिश्नर ने परिसर को सील कर दिया, क्योंकि श्रमिकों का मिल पर 26 लाख रुपये से ज्यादा ईपीएफ बकाया था। सपा सरकार ने भी बसपा कार्यकाल में लिए गए इस फैसले पर मौन साध लिया था। इस खेल में पोंटी चड्ढा ग्रुप के अलावा सरकार में मंत्री भी शामिल थे।
विज्ञापन

करीब 38 एकड़ क्षेत्रफल में फैली नेकपुर चीनी मिल सितंबर 1998 में बंद हो गई थी। श्रमिकों को दो वर्ष बाद वीआरएस ले लिया, लेकिन 13 कर्मी कोर्ट चले गए थे। इनका वाद अभी तक लंबित है। अब 19 वर्ष बाद शीर्ष न्यायालय के रुख से संभावना जागी है कि चीनी मिल की कीमती जमीन भी सरकार के स्वामित्व में वापस हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक करोड़ हो गया ईपीएफ
चीनी मिल को बंद करने से पहले कर्मचारियों को ईपीएफ भुगतान नहीं किया गया। मिल बेचने के बाद तत्कालीन उप्र चीनी निगम प्रबंध निदेशक विनय प्रिय दुबे ने क्रेता फर्म को आदेश दिया था कि बकाया ईपीएफ राशि और अन्य सभी भुगतान कर्मचारियों को उसे करने होंगे। क्योंकि पुराने बकाया भुगतान आदि अनुबंधन का एक हिस्सा था।

फोटो: संतोष जी
हमने सुझाव मांगे हैं
नेकपुर चीनी मिल श्रमिक नेताओं से अगले सप्ताह बैठक कर बात करेंगे। शनिवार दोपहर मिलने आए कुछ लोगों ने लिखित ज्ञापन दिया है। उन्होंने पुराना ईपीएफ भुगतान कराने और कीमती जमीन पर कोई प्लान बनाने का आग्रह किया है। मैंने शनिवार को इन नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया है। - संतोष गंगवार, केंद्रीय श्रम मंत्री स्वतंत्र प्रभार

----
फोटो: सतीश मेहता
आंदोलन रंग लाया
करीब 66 वर्ष तक पेराई कार्य करने वाली चीनी मिल बीच शहर में आ गई थी। इसे सैदपुर शिफ्ट करने के लिए कवायद शुरू हुई थी लेकिन सपा-बसपा सरकारों ने पूंजीपतियों से साठगांठ कर श्रमिकों को धोखा दे दिया। अब फिर काफी उम्मीद जागी है। केंद्रीय श्रम मंत्री पूरा सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने अगले सप्ताह बुलाया है। हम वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल से मिलकर भी इंसाफ की फरियाद करेंगे।
- सतीश मेहता, प्रांतीय उपाध्यक्ष, इंटक
---
एक नजर...एचआर चीनी मिल
स्थापना         सन् 1932
रिसीवर तैनात   सन् 1977  
चीनी निगम ने
अधिग्रहण किया अक्टूबर, 1984  
शिफ्ंिटग प्रक्रिया  सन् 1989
पेराई सत्र बंद    सितंबर, 1998
वीआरएस मिला  सन् 2000
कर्मचारी         करीब 900 
बचे कर्मी         13
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed