Holashtak 2024: होलाष्टक शुरू, कई ग्रहों की बदलेगी चाल, राशियों पर पड़ेगा प्रभाव; आठ दिनों तक न करें ये काम
Holashtak 2024: होली के आठ दिन पहले के समय को होलाष्टक कहा जाता है। इसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल की अष्टमी तिथी से होती है और होली दहन के साथ पूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दौरान मांगलिक कार्य व नये कार्य की शरुआत नहीं करते हैं।
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इस बार होली का त्योहार 25 मार्च को मनाया जाएगा। रविवार 17 मार्च से होलाष्टक शुरू हो गए हैं, जोकि आठ दिनों तक रहेंगे। इसमें राशियों के परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। इस साल होलाष्टक में कुछ राशियों के लिए शनि, सूर्य और राहु शुभ नहीं माने जा रहे।
बरेली के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय शर्मा ने बताया कि 18 मार्च को शनि उदय होंगे। शनि का उदय कुंभ राशि में हो रहा है, जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। वहीं, 14 मार्च को सूर्य गोचर करके मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में पहले से ही राहु विराजमान हैं।
मीन राशि में सूर्य और राहु की युति से ग्रहण योग बनने जा रहा है। यह ग्रहण योग ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता है। इसके अलावा इस समय मकर, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है। इस कारण शनि, सूर्य और राहु का दुष्प्रभाव कुछ राशि पर पड़ेगा।
इन राशियों पर पड़ सकता है बुरा असर
मकर राशि : होलाष्टक की अवधि में कई क्षेत्रों में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। खर्चों को लेकर थोड़ा सावधान रहें। जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान आपके स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
कुंभ राशि: जातकों को होलाष्टक के दौरान सावधान रहने की आवश्यकता है। आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों के लिए यह समय उत्तम माना गया है। किसी यात्रा पर जा सकते हैं। व्यापार और आर्थिक स्थिति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
मीन राशि: वाहन चलाते समय सावधानी बरतें, वाणी पर संयम रखें, आर्थिक स्थिति को लेकर सतर्क रहें। आपको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जीवन कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इन राशियों को मिलेगा लाभ
मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क और सिंह: इन राशियों के जातकों के लिए होलाष्टक का समय शुभ रहेगा। उन्हें करियर, धन और स्वास्थ्य में लाभ मिल सकता है।
तुला, वृश्चिक : इन राशियों के जातकों को भी होलाष्टक के दौरान कुछ लाभ मिल सकते हैं। नौकरी में प्रमोशन, व्यवसाय में वृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार हो सकता है।
इस लिए अशुभ माने जाते हैं होलाष्टक के दिन
होली के आठ दिन पहले के समय को होलाष्टक कहा जाता है। इसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल की अष्टमी तिथी से होती है और होली दहन के साथ पूर्ण होता है। इस समय पर आमतौर पर सभी मांगलिक कार्य व नये कार्य की शरुआत नहीं करते हैं।
पंडित श्रीकांत शर्मा ने बताया कि अष्टमी तिथि से दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को बंदी बनाकर यातना देना शुरू किया था। इसके साथ उन्हें पूरे आठ दिन तक भयानक यातपाएं दी थी। इसके बाद आठवें दिन उसकी बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था।) उसे गोद में लेकर बैठीं जिसमें प्रहलाद बच गए और होलिका खुद भस्म हो गई। इसलिए इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है।
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इन आठ दिनों में भूमि, पूजन ग्रह प्रवेश, भूमि खरीदना, वाहन खरीदना इसके साथ ही अन्नप्राशन, मुंडन, जनेऊ, विवाह आदि संस्कार करना भी निषिद्ध है। इन दिनों में भगवान विष्णु, हनुमान जी, एवं नृसिंह भगवान का पूजन करें व्यापार में सफलता के लिए श्री सूक्त का पाठ करें। कर्ज से छुटकारा पाने के लिए ऋण मोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें। गरीबों को यथाशक्ति दान व मदद करें।