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मथुरा हाईवे की जमीन अधिग्रहण के लिए नहीं भेजे जा रहे रिकार्ड
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बरेली। एनएचएआई के अधिकारियों की ढिलाई से साल भर बाद भी मथुरा हाईवे का जमीन अधिग्रहण नहीं शुरू हो सका है। एनएचएआई ने प्रशासन के पास बरेली और बदायूं जिलों की जमीनों का रिकार्ड भेजा था लेकिन गड़बड़ी होने के चलते इसे वापस कर दिया गया। दोबारा रिकार्ड मांगा तो सिर्फ बदायूं का ही भेजा लेकिन बार-बार मांगने के बावजूद एनएचएआई के अफसर बरेली का रिकार्ड नहीं उपलब्ध करा रहे हैं।
बरेली-मथुरा हाईवे को मार्च 2018 में पीडब्ल्यूडी से एनएचएआई को ट्रांसफर किया गया था। अभी यह हाईवे बरेली से बदायूं तक करीब 14 मीटर ही चौड़ा है। इस हाईवे को अब जलेसर, सिकंदराराऊ होते हुए करीब 225 किलोमीटर तक 17 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसके लिए एनएचएआई को बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण भी करना है। करीब चार माह पहले एनएचएआई के आगरा मुख्यालय से जिला प्रशासन को पत्र भी भेजा गया। बरेली के एसएलएओ के पास बदायूं जिले का चार्ज भी है इसलिए दोनों ही जिलों की सीमा में इस हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण बरेली जिला प्रशासन को ही करना है। कुछ महीने पहले एनएचएआई ने 113 गांवों में जमीन का अधिग्रहण करने के लिए तत्कालीन एसएलएओ सुल्तान अशरफ सिद्दीकी को रिकार्ड भेजे थे। प्रशासन ने इन गाटा संख्या के आधार पर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की तो अधिकांश के गाटा संख्या गलत मिले। इसके बाद करीब चार माह पहले दोबारा रिकार्ड भेजा तो वह सिर्फ बदायूं जिले के गांवों का ही निकला। बरेली के गांवों में भूमि अधिग्रहण करने के लिए अफसरों को अब तक कोई रिकार्ड ही नहीं मिला है।
बदायूं और बरेली दोनों जिलों के जमीन के रिकार्ड मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण शुरू होगा। कई बार एनएचएआई आगरा के अधिकारियों से बात हुई लेकिन कोई जवाब नहीं आया है। - मदन कुमार, एसएलएओ
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बरेली-मथुरा हाईवे को मार्च 2018 में पीडब्ल्यूडी से एनएचएआई को ट्रांसफर किया गया था। अभी यह हाईवे बरेली से बदायूं तक करीब 14 मीटर ही चौड़ा है। इस हाईवे को अब जलेसर, सिकंदराराऊ होते हुए करीब 225 किलोमीटर तक 17 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसके लिए एनएचएआई को बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण भी करना है। करीब चार माह पहले एनएचएआई के आगरा मुख्यालय से जिला प्रशासन को पत्र भी भेजा गया। बरेली के एसएलएओ के पास बदायूं जिले का चार्ज भी है इसलिए दोनों ही जिलों की सीमा में इस हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण बरेली जिला प्रशासन को ही करना है। कुछ महीने पहले एनएचएआई ने 113 गांवों में जमीन का अधिग्रहण करने के लिए तत्कालीन एसएलएओ सुल्तान अशरफ सिद्दीकी को रिकार्ड भेजे थे। प्रशासन ने इन गाटा संख्या के आधार पर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की तो अधिकांश के गाटा संख्या गलत मिले। इसके बाद करीब चार माह पहले दोबारा रिकार्ड भेजा तो वह सिर्फ बदायूं जिले के गांवों का ही निकला। बरेली के गांवों में भूमि अधिग्रहण करने के लिए अफसरों को अब तक कोई रिकार्ड ही नहीं मिला है।
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बदायूं और बरेली दोनों जिलों के जमीन के रिकार्ड मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण शुरू होगा। कई बार एनएचएआई आगरा के अधिकारियों से बात हुई लेकिन कोई जवाब नहीं आया है। - मदन कुमार, एसएलएओ
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