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उच्च रक्तचाप : नजरंदाज न करें.. जोखिम में पड़ सकती है जान
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बरेली। साइलेंट किलर के तौर पर पहचाने जाने वाली बीमारी हाइपरटेंशन यानी हाइपरटेंशन को नजरंदाज करने से जान जोखिम में पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरटेंशन का इलाज समय रहते होना बेहद जरूरी है। अन्यथा हृदय, किडनी, मस्तिष्क आदि पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक उच्च रक्तचाप से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी की बड़ी वजह असंतुलित जीवनशैली और मानसिक तनाव होता है। चिंता की बात यह है कि दुनियाभर में हृदय रोग और असमय मौत की प्रमुख वजहों में से हाइपरटेंशन एक है। यह उच्च रक्तचाप की क्रोनिक स्थिति होती है। इससे रक्त धमनियों में खून का दबाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक खून का दबाव बने रहने से शरीर के सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। बताया कि शुरुआत में इसका स्पष्ट लक्षण नजर न आने से इसकी पहचान कठिन होती है।
लिहाजा, मरीज होने वाले शारीरिक दुष्प्रभाव को नजरंदाज करते रहते हैं। समस्या बढ़ने पर लक्षण के आधार पर चिकित्सक जांच कराते हैं, तब बीमारी पता चलती है। प्रमुख लक्षण में सिर दर्द, चक्कर आना, थकान, सुस्ती, नींद न आना, धड़कन बढ़ना, सीने में दर्द, तेज सांस चलना आदि हैं। जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों की जांच में हर दिन करीब दर्जनभर लोग चपेट में मिलते हैं। उन्हें दवा और बचाव का सुझाव देते हैं।
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संतुलित आहार, वजन नियंत्रित होने से राहत
विशेषज्ञ के मुताबिक सेहतमंद जीवनशैली, नियमित व्यायाम, संतुलित खुराक और परिवार, दोस्तों के साथ घुलने-मिलने से हाइपरटेंशन का जोखिम कम होता है। जो लोग इसकी चपेट में होते हैं, उन्हें नियमित ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए। इस बार की थीम- अपने ब्लड प्रेशर को सटीक रूप से मापें, नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवित रहें, है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक उच्च रक्तचाप से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी की बड़ी वजह असंतुलित जीवनशैली और मानसिक तनाव होता है। चिंता की बात यह है कि दुनियाभर में हृदय रोग और असमय मौत की प्रमुख वजहों में से हाइपरटेंशन एक है। यह उच्च रक्तचाप की क्रोनिक स्थिति होती है। इससे रक्त धमनियों में खून का दबाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक खून का दबाव बने रहने से शरीर के सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। बताया कि शुरुआत में इसका स्पष्ट लक्षण नजर न आने से इसकी पहचान कठिन होती है।
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लिहाजा, मरीज होने वाले शारीरिक दुष्प्रभाव को नजरंदाज करते रहते हैं। समस्या बढ़ने पर लक्षण के आधार पर चिकित्सक जांच कराते हैं, तब बीमारी पता चलती है। प्रमुख लक्षण में सिर दर्द, चक्कर आना, थकान, सुस्ती, नींद न आना, धड़कन बढ़ना, सीने में दर्द, तेज सांस चलना आदि हैं। जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों की जांच में हर दिन करीब दर्जनभर लोग चपेट में मिलते हैं। उन्हें दवा और बचाव का सुझाव देते हैं।
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संतुलित आहार, वजन नियंत्रित होने से राहत
विशेषज्ञ के मुताबिक सेहतमंद जीवनशैली, नियमित व्यायाम, संतुलित खुराक और परिवार, दोस्तों के साथ घुलने-मिलने से हाइपरटेंशन का जोखिम कम होता है। जो लोग इसकी चपेट में होते हैं, उन्हें नियमित ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए। इस बार की थीम- अपने ब्लड प्रेशर को सटीक रूप से मापें, नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवित रहें, है।