हेमलता हत्याकांड: रात में हुआ रियल टाइम सीन रिक्रिएशन, मृतका के पति की बातों में उलझे पुलिस अफसर
बरेली के मीरगंज इलाके में 14 मई की रात विवाहिता हेमलता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपने पति के साथ मायके से लौट रही थी। उसके पति को खरोंच तक नहीं आई। पति के मुताबिक बदमाशों ने लूट के विरोध में हेमलता की हत्या की है, लेकिन कोई हथियार बरामद न होने से खुलासे में पेच फंसा हुआ है।
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बरेली के हेमलता हत्याकांड के चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। शुक्रवार को रियल टाइम सीन रिक्रिएशन में हेमलता का पति राजकुमार फिर फेल हो गया। उसके दोस्त की भूमिका भी संदिग्ध दिख रही है। कोई हथियार बरामद न होने से खुलासे में पेच फंसा हुआ है।
मंगलवार से जिले के पुलिस अधिकारी दुनका चौकी में डेरा डाले हुए हैं लेकिन वारदात के खुलासे के लिए न सिरा मिल रहा है न पूंछ। बृहस्पतिवार को किए गए सीन रिक्रिएशन में भी राजकुमार उलझ गया था।
शुक्रवार शाम ठीक घटना के वक्त अधिकारी मृतका के पति राजकुमार को लेकर घटनास्थल पर पहुंचे। वहां वह फिर से वस्तुस्थिति समझाने में असफल रहा। 13 मिनट में उसे बदमाशों से मोर्चा लेकर पैदल 500 मीटर भागना और मदद के लिए लोगों को बुलाना था, जो वह नहीं कर सका। रात नौ बजे उसे उसके पिता व प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया गया। शनिवार सुबह फिर उसे चौकी बुलाया गया।
सभी 24 चूड़ियां मिलीं साबुत, नथ भी बरामद
हेमलता के साथ बदमाशों की जबरदस्ती का कोई साक्ष्य पुलिस को नहीं मिला है। उसे गोली बिल्कुल सटाकर मारी गई थी। उसके हाथ में 24 चूड़ियां थीं, जो सही सलामत थीं। पोस्टमार्टम के दौरान उसके नाक की नथ और चांदी की अंगूठी भी बरामद हुई, जिसे सील कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर बदमाशों ने लूट के लिए हत्या की तो पूरे जेवर क्यों नहीं लूटे?
बोला- कराटे जानता हूं, मुकाबला किया था
राजकुमार की बातें उसकी कद-काठी और हालात से मेल नहीं खा रही हैं। छह बदमाशों से वह कैसे छूटकर भागा? जैसे सवाल के जवाब में उसने अफसरों को बताया कि वह कराटे जानता है। उसने काफी बहादुरी से बदमाशों का मुकाबला किया। तमंचा भी छीन लिया लेकिन जब बदमाशों ने हेमलता को गोली मार दी तो वह वहां से भाग निकला। उसकी काली शर्ट पर धूल या मारपीट के निशान न होने का वह सही जवाब नहीं दे सका।
दोस्त की बातें भी उलझा रहीं
राजकुमार के दोस्त रामबहादुर से भी पुलिस ने पूछताछ की। रामबहादुर को उसने सबसे पहले कॉल कर घटना बताई थी। रामबहादुर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर मिट्टी लाद रहा था। किसी को बताए बगैर वह पैदल ही घटनास्थल की ओर भागा था। यह तथ्य भी अफसरों को चौंका रहा है। आमतौर पर मुश्किल में फंसने के बाद शख्स कई लोगों को कॉल करता है पर रामबहादुर को कॉल करने के करीब सात मिनट बाद उसने दूसरे दोस्त सतीश को कॉल की।