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केंद्रीय टीम ने देखे मानसिक अस्पताल के हाल

Sun, 28 Jun 2015 02:00 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 28 Jun 2015 02:00 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मानसिक अस्पताल की स्थिति जानने आई केंद्रीय टीम ने  मानसिक चिकित्सालय के 40 मिनट के निरीक्षण के पहले करीब ढाई घंटे की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित किए गए 35 बिंदुओं पर सवाल जवाब किए।  टीम ने यहां ठीक हो चुके करीब दो दर्जन मरीजों के परिवार वालों से संपर्क कर उन्हें पुनर्वासित कराने के लिए प्रशासन से अपेक्षा की। उनके परिवार वाले उन्हें घर नहीं ले जा रहे हैं। निरीक्षण के लिए टीम को एक बजे आना था लेकिन वह पांच बजे पहुंची और करीब पौने छह बजे वापस चली गई।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंशु प्रकाश के साथ एनएचआरसी के सदस्य, मानवाधिकार आयोग के सदस्य, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नामित सदस्य और प्रदेश के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार की टीम ने मानसिक अस्पताल का दौरा किया। टीम ने जिलाधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियाें के साथ सिविल लाइंस स्थित होटल में बैठक के बाद  सबसे पहले पैथॉलजी लैब देखी फिर परिवार और ईसीटी वार्ड में गए और मरीजों का हाल लिया। कई मरीज यहां सोते भी मिले और उनसे बात नहीं हो पाई। टीम पांचों वार्डों में नहीं जा पाई।  अस्पताल के कर्मचारी ड्रेस में थे।  अस्पताल के निदेशक के साथ एडी हेल्थ, सीएमओ, सीएमएस भी साथ थे।
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खामियां हैं तो दूर कराइए...
बरेली। मानसिक अस्पताल के दौरे से पहले स्वास्थ्य अधिकारियाें की बैठक के दौरान रोगियाें के खानपान, चिकित्सा सुविधा, परेशानी, कमी के बारे में पूछताछ की गई। कुछ मुद्दों पर टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और खामियां दूर करने की अपेक्षा की।
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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने  35 बिंदुओं पर बारी-बारी से मानसिक अस्पताल निदेशक डॉ. सुनील श्रीवास्तव, एडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा और सीएमओ डॉ. विजय यादव से जानकारी ली। इसमें मरीजाें का खाना पीना, उनकी साफ सफाई, दवा,  चिकित्सक, सुविधाएं और तमाम बिंदुओं पर पूछा गया। स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठा। मानसिक अस्पताल में छह मनोचिकित्सक के पदों पर केवल दो तैनात हैं। न्यूरो चिकित्सक हैं न आईसीयू है। बर्न यूनिट है लेकिन त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं है। इनकी विस्तृत रिपोर्ट सीएमओ से मांगी गई है, ताकि कमी दूर कराई जा सके। केंद्रीय टीम ने पोलियो पर ध्यान आकर्षित करके मामले की जानकारी ली।

जांच कमेटी बनी
यहां मीडिया के पूछे सवाल के जवाब में डीएम गौरव दयाल ने बताया कि फरीदपुर में पोलियो दवा के डिब्बे में शराब मिलने के मामले की जांच के लिए टीम बना दी गई है। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

तंबाकू कैसे पहुंच रहा है मनोरोगियों तक
बरेली। केंद्रीय टीम ने वार्ड एक में मरीज राजीव रस्तोगी से सवाल पूछे तो वह चुप रहा। मुंह खुलावाया गया तो दांत पीले और काले मिले। उसने बताया कि वह तंबाकू खाता है। तंबाकू कहां से आता है, तो बताया कि आटो और रिक्शा वाले दे जाते हैं। पूरी तरह से निगरानी न होने पर टीम के सदस्यों ने कड़ी नाराजगी जताई। महिला वार्ड की तरफ कुछ मनोरोगी महिलाएं थी। पता चला कि यहां महिलाआें को बाहर के लोग झांक ते हैं। इस पर दीवार ऊंची करवाने और यूकेलिप्टस के पेड़ लगाने को कहा गया।


दौरे से पहले सुधरी दशा
केंद्रीय टीम के दौरे से पहले कई सुधार दो दिन में हो गए। एमई सीटी मशीन का इस्तेमाल काफी समय बाद हुआ। इस मशीन से मरीजाें को इलेक्ट्रिक शॉक देकर ठीक किया जाता है। इसे दौरे से पहले ठीक कराया गया। जंग खाए कूलर भी ठीक कराए गए। मरीजों को नई ड्रेस मिली।
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