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स्वास्थ्य मेला : डॉक्टरों का दिलचस्पी न मरीजों को
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शाहजहापुर में पीएचसी पर दवा को दिखाते फार्मासिस्ट अनुराग श्रीवास्तव। संवाद
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शाहजहांपुर। मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं व जांच का लाभ देने के नाम पर रविवार को लगने वाले स्वास्थ्य मेलों में धीरे-धीरे भीड़ कम होती जा रही है। डॉक्टर व अन्य स्टाफ सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं तो मरीज लाभ नहीं मिलने के कारण मेलों से दूर होते जा रहे हैं। स्थिति जानने के लिए अमर उजाला ने पड़ताल की तो कई जगह अव्यवस्थाएं मिलीं।
पुराने जिला अस्पताल में संचालित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलीकोठी में रविवार को करीब एक बजे पहुंचे तो पर्चा काउंटर खाली पड़ा था। खून की जांच करने वाले एलटी के कक्ष के दरवाजे के सामने कुर्सी रखकर दी थी। दोनों ही अपनी सीट पर नहीं थे। अपने कक्ष में अभिलेखों को दुरुस्त करने में लगी डॉ. आसमा हिकमत से पूछा तो वह बोलीं कि स्वास्थ्य मेला खत्म होने वाला है। कितने मरीज आए? का जवाब भी उनके पास नहीं था। इस बीच एक मरीज आई तो वह पर्चा बनाने वाले को तलाशती रही। जबकि पर्चा बनाने वाला गेट पर बेंच पर बैठकर धूप सेंक रहा था।
करीब सवा बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोदीपुर में पहुंचे। डॉक्टर के चैंबर में महिला मरीज बैठकर डॉक्टर का इंतजार कर रही थीं। जबकि डॉक्टर अंदर मरम्मत के कार्य में लगे थे। बुलाने पर डॉ. आलोक ने बताया कि कायाकल्प का सर्वे होने वाला है। उसी की तैयारी में लगे हैं। काफी देर के बाद मरीज को देखकर दवा दी गई। पीएचसी पर उस समय तक 18 मरीज देखे जा चुके थे।
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पुराने एआरटीओ आफिस के पीछे स्थित पीएचसी पर कार्यरत डॉक्टर ने दो महीने पहले इस्तीफा देने के चलते उनकी जगह पर फार्मासिस्ट अनुराग श्रीवास्तव जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। स्वास्थ्य मेले में डेढ़ जे तक 40 मरीज देखे जा चुके थे, लेकिन मेले में आयुर्वेदिक दवा लेने आने वाले मरीजों को पुराने जिला अस्पताल व ककरा स्थित सेंटर पर भेजा जा रहा था। श्रीवास्तव ने बताया कि मेले में पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर आते थे। कुछ सप्ताह से उनका आना बंद हो गया। उनके पास पर्याप्त दवाएं हैं।
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शासन की मंशा के अनुरूप मेलों को लगाया जा रहा है। जहां पर गड़बड़ी मिली है, उन्हें ठीक कराया जाएगा।
डॉ. पीपी श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी
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पुराने जिला अस्पताल में संचालित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलीकोठी में रविवार को करीब एक बजे पहुंचे तो पर्चा काउंटर खाली पड़ा था। खून की जांच करने वाले एलटी के कक्ष के दरवाजे के सामने कुर्सी रखकर दी थी। दोनों ही अपनी सीट पर नहीं थे। अपने कक्ष में अभिलेखों को दुरुस्त करने में लगी डॉ. आसमा हिकमत से पूछा तो वह बोलीं कि स्वास्थ्य मेला खत्म होने वाला है। कितने मरीज आए? का जवाब भी उनके पास नहीं था। इस बीच एक मरीज आई तो वह पर्चा बनाने वाले को तलाशती रही। जबकि पर्चा बनाने वाला गेट पर बेंच पर बैठकर धूप सेंक रहा था।
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करीब सवा बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोदीपुर में पहुंचे। डॉक्टर के चैंबर में महिला मरीज बैठकर डॉक्टर का इंतजार कर रही थीं। जबकि डॉक्टर अंदर मरम्मत के कार्य में लगे थे। बुलाने पर डॉ. आलोक ने बताया कि कायाकल्प का सर्वे होने वाला है। उसी की तैयारी में लगे हैं। काफी देर के बाद मरीज को देखकर दवा दी गई। पीएचसी पर उस समय तक 18 मरीज देखे जा चुके थे।
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पुराने एआरटीओ आफिस के पीछे स्थित पीएचसी पर कार्यरत डॉक्टर ने दो महीने पहले इस्तीफा देने के चलते उनकी जगह पर फार्मासिस्ट अनुराग श्रीवास्तव जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। स्वास्थ्य मेले में डेढ़ जे तक 40 मरीज देखे जा चुके थे, लेकिन मेले में आयुर्वेदिक दवा लेने आने वाले मरीजों को पुराने जिला अस्पताल व ककरा स्थित सेंटर पर भेजा जा रहा था। श्रीवास्तव ने बताया कि मेले में पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर आते थे। कुछ सप्ताह से उनका आना बंद हो गया। उनके पास पर्याप्त दवाएं हैं।
शासन की मंशा के अनुरूप मेलों को लगाया जा रहा है। जहां पर गड़बड़ी मिली है, उन्हें ठीक कराया जाएगा।
डॉ. पीपी श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी

शाहजहापुर में पीएचसी पर दवा को दिखाते फार्मासिस्ट अनुराग श्रीवास्तव। संवाद

शाहजहापुर में पीएचसी पर दवा को दिखाते फार्मासिस्ट अनुराग श्रीवास्तव। संवाद