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छह महीने से भटक रहे थैलेसीमिया के मरीज.. नहीं मिल रही दवा

Thu, 23 Jan 2020 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 02:28 AM IST
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Health
मरीजों-तीमारदारों ने सीएमओ दफ्तर में किया हंगामा
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बरेली। छह माह से थैलेसीमिया के मरीजों को जिला अस्पताल से दवाएं नहीं मिल रही है। रोजाना मरीजों को अस्पताल में भटकना पड़ रहा है। बुधवार को गुस्सा फूट पड़ा और मरीजों-तीमारदारों ने सीएमओ कार्यालय पर हंगामा किया। महिलाओं की सीएमओ से कहासुनी भी हुई। सीएमओ ने कहा कि टेंडर हो गया है। जल्द ही दवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
सीएमओ कार्यालय पहुंचे लोग गुस्से में जिला अस्पताल के डॉक्टरों की शिकायत करने लगे। सीएमओ ने कहा कि अगर डॉक्टरों की शिकायत करनी है तो सीएमएस से जाकर करिए। सीएमएस आपकी समस्या का समाधान करेंगे। इस पर दो महिलाएं भड़क गईं। कहने लगी कि फिर आप क्या करेंगे। हमारे बच्चे बीमार हैं, जिला अस्पताल में उनका पंजीकरण है.. लेकिन दवाइयां नहीं मिल रहीं। सीएमएस से शिकायत की तो उनका कहना है कि सीएमओ कार्यालय से इसका टेंडर होता है। आप टेंडर ही नहीं कर रहे हैं तो दवाइयां कैसे मिलेंगी। एजाजनगर निवासी मोहम्मद यासीन ने बताया कि उनका बेटा थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित है। उसे हर 15 दिन में ब्लड चढ़वाना पड़ता है। ऐसे मरीजों में आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसे नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेनी होती हैं, लेकिन कई माह से दवाइयां नहीं मिल रहीं। सीएमएओ डॉ. विनीत कुमार शुक्ल ने कहा कि दवाइयों का टेंडर हो गया है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी। बता दें कि जिले में थैलेसीमिया के 36 रोगी हैं जो जिला अस्पताल में इलाज कराते हैं। मंडल में ऐसे मरीजों की संख्या 136 है।
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ये दवाएं हुई खत्म
डाइक्लोफि निक, फ ोलिक एसिड, डेफ रीफ्रि ल और कैल्फ र।

क्या है थैलेसीमिया
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र 120 दिन होती है, लेकिन थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र घटकर 20 दिन रह जाती है। डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि इसका सीधा प्रभाव हीमोग्लोबीन पर पड़ता है। हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाने से शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है। यह बीमारी बच्चों को ज्यादा होती है। उचित समय पर इलाज न होने से बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है। इस रोग से ग्रसित बच्चे को बचाने के लिए औसतन तीन सप्ताह में एक बोतल खून देना अनिवार्य हो जाता है।
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टेंडर के बाद भी दवाओं का संकट तो रहेगा
बरेली। थैलेसीमियां की दवाओं का टेंडर तो हो गया है, लेकिन मरीजाें को बहुत राहत नहीं मिलेगी। थैलेसीमियां से संबंधित से पंद्रह जरुरी दवाआें का टेंडर निकाला गया था। इसके लिए दो कंपनियां आगे आई हैं, लेकिन वह सिर्फ नौ दवाओं की ही सप्लाई देंगी। छह दवाएं देने कंपनियों ने इन्कार कर दिया है। इसमें तीन दवाएं बेहद जरूरी हैं। सीमएएस डॉ. टीएस आर्या ने बताया कि डेफ्रेक्सामाइन इंजेक्शन, इंजेक्शन की वेनोग्लिस निडिल और डेफ्रीप्रोन कैप्सूल की सप्लाई अभी नहीं हो पाएगी। वहीं इनके बिना दवा का संकट फिलहाल बना रहेगा।
 
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