{"_id":"5e0b9e418ebc3e87e021a9ef","slug":"health-bareilly-news-bly390122694","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में थैलेसीमिया की दवाएं खत्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में थैलेसीमिया की दवाएं खत्म
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। जिला अस्पताल में गंभीर रोगों की दवाओं का लगातार टोटा बना हुआ है। अब थैलेसीमिया की दवा भी खत्म हो गई है। मरीज भटक रहे हैं। एक माह से मरीज रोजाना अस्पताल आ रहे हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल रहा है। जिले में थैलेसीमिया के 36 रोगी हैं जो जिला अस्पताल में इलाज कराते हैं। मंडल में ऐसे मरीजों की संख्या 136 है।
सीएचसी-पीएचसी में तो हमेशा ही दवाओं का अकाल बना रहता है। अब जिला अस्पताल में भी गंभीर बीमारियों की दवाएं खत्म हो रही हैं। थैलेसीमिया की दवा काफी समय से जिला अस्पताल में नहीं है। मरीज भटक रहे हैं। दवाएं महंगी होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इन्हें बाजार से खरीद भी नहीं पा रहे हैं। एजाजनगर निवासी मोहम्मद यासीन ने बताया कि उनका बेटा थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित है। उसे हर पंद्रह दिन में ब्लड चढ़वाना पड़ता है। ऐसे मरीजों में आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है, इसे नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेनी होती हैं लेकिन एक माह से वह अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं पर दवाइयां नहीं मिल रही हैं। सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने बताया कि दवाइयां खत्म होने की जानकारी शासन को दे दी गई है। जल्द ही दवाओं की आपूर्ति हो जाएगी।
ये दवाएं हुई खत्म
डाइक्लोफिनिक, फोलिक एसिड, डेफरीफ्रिल और कैल्फर
क्या है थैलेसीमिया
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र 120 दिन होती है, परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र घटकर 20 दिन रह जाती है। डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि इसका सीधा प्रभाव हीमोग्लोबीन पर पड़ता है। हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाने से शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है। यह बीमारी बच्चों को ज्यादा होती है। उचित समय पर इलाज न होने से बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है। इस रोग से ग्रसित बच्चे को बचाने के लिए औसतन तीन सप्ताह में एक बोतल खून देना अनिवार्य हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीएचसी-पीएचसी में तो हमेशा ही दवाओं का अकाल बना रहता है। अब जिला अस्पताल में भी गंभीर बीमारियों की दवाएं खत्म हो रही हैं। थैलेसीमिया की दवा काफी समय से जिला अस्पताल में नहीं है। मरीज भटक रहे हैं। दवाएं महंगी होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इन्हें बाजार से खरीद भी नहीं पा रहे हैं। एजाजनगर निवासी मोहम्मद यासीन ने बताया कि उनका बेटा थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित है। उसे हर पंद्रह दिन में ब्लड चढ़वाना पड़ता है। ऐसे मरीजों में आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है, इसे नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेनी होती हैं लेकिन एक माह से वह अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं पर दवाइयां नहीं मिल रही हैं। सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने बताया कि दवाइयां खत्म होने की जानकारी शासन को दे दी गई है। जल्द ही दवाओं की आपूर्ति हो जाएगी।
विज्ञापन
ये दवाएं हुई खत्म
डाइक्लोफिनिक, फोलिक एसिड, डेफरीफ्रिल और कैल्फर
क्या है थैलेसीमिया
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र 120 दिन होती है, परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र घटकर 20 दिन रह जाती है। डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि इसका सीधा प्रभाव हीमोग्लोबीन पर पड़ता है। हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाने से शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है। यह बीमारी बच्चों को ज्यादा होती है। उचित समय पर इलाज न होने से बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है। इस रोग से ग्रसित बच्चे को बचाने के लिए औसतन तीन सप्ताह में एक बोतल खून देना अनिवार्य हो जाता है।
विज्ञापन