फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Health

आयुष्मान कार्ड रिजेक्ट करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान

Tue, 24 Dec 2019 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 01:47 AM IST
विज्ञापन
Health
बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को धता बताकर आयुष्मान कार्ड पर गंभीर बीमार लोगों का इलाज न करने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान है। इन अस्पतालों की हीलाहवाली के चलते कई मरीजों की जानें भी जा चुकी हैं। इन्हें सबक सिखाने के लिए परिवार वालों ने शिकायती पत्र लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के यहां खूब चक्कर भी लगाए मगर किसी ने इन पर कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चेतावनी देकर सभी मामले रफा-दफा कर दिए गए।
विज्ञापन

इलाज के इंतजार में दम तोड़ गए मतलूब
सितंबर माह में दीवानखाना के मतलूब हुसैन को आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद शहर के चार बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं मिला। परिवार के सदस्य पूरी रात उन्हें एक अस्पताल से लेकर दूसरे अस्पताल तक दौड़ते रहे। आखिरकार उनकी जान चली गई। परिवार वालों की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच कराई तो अस्पतालों की हीलाहवाली सामने आ गई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मामला मीडिया में उछला तो अस्पतालों को चेतावनी जारी कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
विज्ञापन

खराब बता दिया आयुष्मान कार्ड
सुभाषनगर निवासी शिखा ने पिता कन्हईलाल को न्यूरो संबंधी दिक्कत होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां कुछ दिन रखने के बाद कह दिया कि उसका आयुष्मान कार्ड खराब है और वे लोग इलाज नहीं कर सकते। दो दिसंबर को शिखा के पिता की मौत हो गई। उन्होंने निजी अस्पताल को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए डीएम, सीएमओ और सीएम पोर्टल पर शिकायत की लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इलाज के लिए बेचना पड़ा टेंपो और मकान
कटरा चांद खां निवासी सुरेश के पैर में असहनीय दर्द हुआ। कुछ दिन जिला अस्पताल में इलाज कराया लेकिन आराम नहीं मिला। कुछ दिनों बाद पैर काला पड़ गया और चलना-फिरना बंद हो गया। इलाज के लिए उसे टेंपो और मकान भी बेचना पड़ा। आयुष्मान कार्ड लेकर शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचे तो पैर काटने की बात कही। सुरेश तैयार हो गया लेकिन अस्पताल वालों ने आज तक ऑपरेशन नहीं किया। एक सप्ताह बाद आने को कहकर काफी दिन से टाल रहे हैं।


जो भी शिकायत आती है, उस पर जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को बयान के लिए बुलाया जाता है और वे नहीं आते हैं। ऐसे में भी जांचे प्रभावित होती हैं। कई ऐसी भी शिकायतें हैं, जिन्हें करने के बाद शिकायतकर्ता ही नहीं लौटे।
- डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed