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घर में प्रसव का करते रहे इंतजार, गर्भवती की बिगड़ी हालत

Fri, 27 Sep 2019 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2019 02:28 AM IST
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Health
बरेली। घरवालों की जिद से गर्भवती की जान पर बन आई। घर पर ही प्रसव का इंतजार कर रहे घरवाले उस समय असहाय हो गए जब महिला की हालत बिगड़ गई। आरोप है कि दस माह तक घरवालों ने गर्भवती को घर में ही रखा। दो दिन पहले जब उसकी हालत बिगड़ी तो अस्पतालों का चक्कर काटते रहे। महिला अस्पताल पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने महिला की रिपोर्ट देखी तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए और महिला को रेफर कर दिया।
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गुरुवार की सुबह महिला अस्पताल में बदायूं के फैजगंज बेहटा धुंधपुर निवासी आरिफ दस माह की गर्भवती हमीदा को गंभीर हालत में लेकर महिला अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी में मौजूद डॉक्टरों ने महिला की रिपोर्ट देखी तो वे चौंक उठे। पता चला कि महिला अस्पताल आने से पहले घरवाले उसे मंगलवार को बदायूं के एक नर्सिंग होम लेकर गए थे। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। फिर बुधवार को गर्भवती को शहर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन, दिन भर भर्ती रखने के बाद डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद घरवाले गुरुवार को महिला अस्पताल पहुंचे थे। जहां डॉक्टरों ने गर्भवती की हालत देखते हुए उसे हायर सेंटर जाने को कह दिया।
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आयुष्मान कार्ड था फिर भी नहीं मिला इलाज
गर्भवती के ससुर निसार अहमद का आरोप है कि डॉक्टरों ने बहू की हालत गंभीर देखकर उसे एक दिन तो भर्ती रखा लेकिन फिर उसे बाहर निकाल दिया। बताया कि दूसरे अस्पताल में भी ऐसा ही रवैया रहा। कहा, अगर गर्भवती का इलाज नहीं कर सकते थे तो तत्काल मना कर देते। आयुष्मान कार्ड से पेमेंट करने की बात पर वे राजी नहीं हुए और बाहर निकाल दिया। हालांकि, महिला अस्पताल में ससुर ने कुबूल किया कि आयुष्मान कार्ड में बहू का नाम दर्ज नहीं था। इसलिए आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल सका।
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सीवियर कोमा में जा सकती थी गर्भवती
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि गर्भवती पीलिया से ग्रसित थी। इसलिए उसकी किडनी फेल और लिवर खराब हो गया था। इसके अलावा उसमें हीमोग्लोबिन भी काफी कम थी। ऐसी हालत में महिला का ऑपरेशन करना मां और बच्चे दोनों की जान पर बन सकती है। अस्पताल में वेंटीलेटर, आईसीयू की सुविधा नहीं है इसलिए उसे अन्य अस्पताल रेफर किया गया है। आसार हैं कि परिजन घर में प्रसव कराना चाहते थे लेकिन हालत बिगड़ी तो अस्पताल पहुंचे।
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