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मलेरिया से हुई पहली मौत को छिपा गया स्वास्थ्य विभाग
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बरेली। पिछले साल जिले में मलेरिया से सैकड़ों मौतें हुई थीं, इससे सबक न लेकर स्वास्थ्य विभाग ने फिर आंकड़ाें में खेल शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल में 31 अगस्त को मलेरिया से मौत हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसे रिकॉर्ड में दर्ज करने के बजाय दबा दिया। वहीं, सोमवार को भी निजी मेडिकल कॉलेज में मलेरिया पीड़ित एक मरीज की मौत हो गई।
21 वर्षीय मनोज नाम के युवक को बुखार के चलते अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उसे मलेरिया की पुष्टि हुई थी। बताया जाता है कि दस दिन से ज्यादा जिला अस्पताल में इलाज चलने के बाद 31 अगस्त को युवक की मौत हो गई। इसके बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मलेरिया से हुई इस मौत को रिकॉर्ड में दर्ज कराने के बजाय फाइलों में दफन कर दिया। वार्ड के कर्मचारियों में इसको लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अफसर अनजान बने हुए हैं। वहीं, सोमवार को निजी मेडिकल कॉलेज में स्वालेनगर निवासी 40 वर्षीय मांझा कारीगर मुश्ताक की मौत हो गई। पत्नी शहनाज ने बताया कि छह दिन पहले मलेरिया बुखार आने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत में सुधार न होने पर रविवार सुबह पांच बजे मेडिकल कॉलेज ले गया था। वहां सोमवार सुबह आठ बजे उनकी मौत हो गई।
महिला अस्पताल से हटाए बुखार के मरीज
एडी हेल्थ के निरीक्षण के बाद सोमवार को जिला अस्पताल प्रशासन ने महिला अस्पताल से बुखार के मरीजों को हटाकर पुराने प्रसूता वार्ड में शिफ्ट कर दिए हैं। एडी हेल्थ ने संक्रमण की आशंका के चलते इन मरीजों को हटाने के निर्देश दिए थे।
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‘जिला अस्पताल में मलेरिया से किसी मरीज की मौत होने की जानकारी नहीं। इस मामले को दिखवाया जाएगा कि स्टाफ ने मलेरिया की मौत को क्यों छिपाया।’
- डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस
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21 वर्षीय मनोज नाम के युवक को बुखार के चलते अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उसे मलेरिया की पुष्टि हुई थी। बताया जाता है कि दस दिन से ज्यादा जिला अस्पताल में इलाज चलने के बाद 31 अगस्त को युवक की मौत हो गई। इसके बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मलेरिया से हुई इस मौत को रिकॉर्ड में दर्ज कराने के बजाय फाइलों में दफन कर दिया। वार्ड के कर्मचारियों में इसको लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अफसर अनजान बने हुए हैं। वहीं, सोमवार को निजी मेडिकल कॉलेज में स्वालेनगर निवासी 40 वर्षीय मांझा कारीगर मुश्ताक की मौत हो गई। पत्नी शहनाज ने बताया कि छह दिन पहले मलेरिया बुखार आने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत में सुधार न होने पर रविवार सुबह पांच बजे मेडिकल कॉलेज ले गया था। वहां सोमवार सुबह आठ बजे उनकी मौत हो गई।
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महिला अस्पताल से हटाए बुखार के मरीज
एडी हेल्थ के निरीक्षण के बाद सोमवार को जिला अस्पताल प्रशासन ने महिला अस्पताल से बुखार के मरीजों को हटाकर पुराने प्रसूता वार्ड में शिफ्ट कर दिए हैं। एडी हेल्थ ने संक्रमण की आशंका के चलते इन मरीजों को हटाने के निर्देश दिए थे।
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‘जिला अस्पताल में मलेरिया से किसी मरीज की मौत होने की जानकारी नहीं। इस मामले को दिखवाया जाएगा कि स्टाफ ने मलेरिया की मौत को क्यों छिपाया।’
- डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस