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माफ करना सलीम! मेडिकल साइंस अभी तुम्हारे परिवार का इलाज करने लायक नहीं
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बरेली। रिठौरा में सलीम और लियाकत का मूक-बधिर परिवार आम लोगों के लिए भले ही अजूबा है लेकिन मेडिकल साइंस की निगाह में किसी परिवार के सभी सदस्यों का मूक-बधिर होना कोई अजूबी बात नहीं है। मेडिकल साइंस कहती है कि यह एक अनुवांशिक बीमारी हैडो क्रोमोसोम यानी गुणसूत्र में दोष की वजह से होती है। गुणसूत्र में दोष की वजह से ही लोगों में स्वर और श्रवण कोशिकाओं का विकास नहीं हो पाता और यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है। इस बीमारी का नाम मेडिकल साइंस में क्रोमोसोम डोमिनेंट है। देश ही विदेशों में भी तमाम परिवार इस बीमारी से ग्रस्त हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जो काफी अमीर और ख्यातिप्राप्त हैं। इसके बावजूद इस अनुवांशिक बीमारी से अपना पीछा नहीं छुड़ा सके हैं।
रिठौरा के खेड़ा मोहल्ले में रहने वाले सलीम और लियाकत के परिवार के दस सदस्य क्रोमोसोम डोमिनेंट बीमारी से ही ग्रसित हैं। इस बीमारी का इलाज फिलहाल मेडिकल साइंस में नहीं है। इस बीमारी की वजह से ही स्वर और श्रवण कोशिकाएं नहीं पनप पातीं और मस्तिष्क भी उन्हें सक्रिय नहीं कर पाता। मेडिकल साइंस में माना गया है कि इस बीमारी को दूर करने के लिए एकमात्र विकल्प स्टेम सेल थेरेपी हो सकती है, हालांकि इसके बावजूद कोई गारंटी नहीं की जा सकती कि पीड़ित लोगों को इससे फायदा होगा। बरेली के प्रमुख डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोग इस बीमारी के इलाज का दावा करते हैं लेकिन वह पूरी तरह गलत है। देश और विदेश में इस बीमारी का कोई गारंटिड इलाज नहीं है। देश नहीं विदेशों में भी इलाज का सुझाव देने वाले डॉक्टर खुद जानते हैं कि जेनेटिक डिसॉर्डर को ठीक करना असंभव जितना कठिन है।
क्या होते हैं क्रोमोसोम
मानव शरीर में क्रोमोसोम तमाम गुण-दोष के वाहक होते हैं। इसी के जरिये डीएनए की प्रकृति तय होती है। पिता या माता से जब ये डीएनए संतान के शरीर में जाते हैं तो उनके तमाम गुण-दोष भी अपने साथ ले जाते हैं। पिता या मां से मिलती शक्ल, रंग और लंबाई आदि भी क्रोमोसोम की वजह से होती है।
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पूर्वजों से आया होगा यह रोग
क्रोमोसोम डोमिनेंट जेनेटिक डिसॉर्डर के बेहद करीब यानी एक तरह का अनुवांशिक रोग है। पीड़ित लोगों के पूर्वजों में भी यह बीमारी रही होगी। रोग के पूरी तरह प्रभावी होने के बाद अब आगे की पीढ़ियों में यह रोग पनपने की 99 फीसदी आशंका है। इसे ठीक करने का एक ही विकल्प स्टेम सेल थेरेपी है जो अभी पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका है। -डॉ. सत्येंद्र सिंह, आईएमए अध्यक्ष
संतान न पैदा करें ऐसे लोग
आनुवांशिक रोगों से ग्रसित यह परिवार आगे फैमिली प्लान न करे तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि आशंका है कि आगे की पीढ़ी भी इसी बीमारी से ग्रसित होगी। मेरी जानकारी के मुताबिक इस बीमारी का इलाज न देश है न विदेश में। ऐसा कोई परिवार जानकारी में कभी नहीं आया जो इस बीमारी से पीछा छुड़ाने में कामयाब हुआ हो। डॉ. सुदीप सरन, फिजिशियन
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रिठौरा के खेड़ा मोहल्ले में रहने वाले सलीम और लियाकत के परिवार के दस सदस्य क्रोमोसोम डोमिनेंट बीमारी से ही ग्रसित हैं। इस बीमारी का इलाज फिलहाल मेडिकल साइंस में नहीं है। इस बीमारी की वजह से ही स्वर और श्रवण कोशिकाएं नहीं पनप पातीं और मस्तिष्क भी उन्हें सक्रिय नहीं कर पाता। मेडिकल साइंस में माना गया है कि इस बीमारी को दूर करने के लिए एकमात्र विकल्प स्टेम सेल थेरेपी हो सकती है, हालांकि इसके बावजूद कोई गारंटी नहीं की जा सकती कि पीड़ित लोगों को इससे फायदा होगा। बरेली के प्रमुख डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोग इस बीमारी के इलाज का दावा करते हैं लेकिन वह पूरी तरह गलत है। देश और विदेश में इस बीमारी का कोई गारंटिड इलाज नहीं है। देश नहीं विदेशों में भी इलाज का सुझाव देने वाले डॉक्टर खुद जानते हैं कि जेनेटिक डिसॉर्डर को ठीक करना असंभव जितना कठिन है।
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क्या होते हैं क्रोमोसोम
मानव शरीर में क्रोमोसोम तमाम गुण-दोष के वाहक होते हैं। इसी के जरिये डीएनए की प्रकृति तय होती है। पिता या माता से जब ये डीएनए संतान के शरीर में जाते हैं तो उनके तमाम गुण-दोष भी अपने साथ ले जाते हैं। पिता या मां से मिलती शक्ल, रंग और लंबाई आदि भी क्रोमोसोम की वजह से होती है।
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पूर्वजों से आया होगा यह रोग
क्रोमोसोम डोमिनेंट जेनेटिक डिसॉर्डर के बेहद करीब यानी एक तरह का अनुवांशिक रोग है। पीड़ित लोगों के पूर्वजों में भी यह बीमारी रही होगी। रोग के पूरी तरह प्रभावी होने के बाद अब आगे की पीढ़ियों में यह रोग पनपने की 99 फीसदी आशंका है। इसे ठीक करने का एक ही विकल्प स्टेम सेल थेरेपी है जो अभी पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका है। -डॉ. सत्येंद्र सिंह, आईएमए अध्यक्ष
संतान न पैदा करें ऐसे लोग
आनुवांशिक रोगों से ग्रसित यह परिवार आगे फैमिली प्लान न करे तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि आशंका है कि आगे की पीढ़ी भी इसी बीमारी से ग्रसित होगी। मेरी जानकारी के मुताबिक इस बीमारी का इलाज न देश है न विदेश में। ऐसा कोई परिवार जानकारी में कभी नहीं आया जो इस बीमारी से पीछा छुड़ाने में कामयाब हुआ हो। डॉ. सुदीप सरन, फिजिशियन