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30 साल से रुकी हई है बरेली की धड़कन
बरेली।
Updated Sun, 19 Feb 2017 01:25 AM IST
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Hath stopped beating 30 years, Bareilly
- फोटो : Hath stopped beating 30 years, Bareilly
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कहते हैं कि घर में रुकी हुई घड़ी नहीं होनी चाहिए इससेे जीवन की रफ्तार भी रुक जाती है। अपने शहर के कुतुबखाना घंटाघर की बंद घड़ी काफी ऊपर से शायद शहर के लोगों को यही संदेश दे रही है। इसकी धड़कन रुकी हुई है। घड़ी की सुइयां और अंदर के पुर्जे तक गायब हो चुके हैं। जहां घंटाघर है वहां आसपास अब पार्किंग होती है। घंटाघर से 50 कदम की दूरी पर निकली सड़क दो हाइवे को जोड़ती है। अगर यहां जाम लगा तो दो से तीन घंटा यातायात सामान्य होने में लग जाता है।
कुतुबखाना इलाका वैसे ही कंजेस्टेड है, गंदगी भी इधर खूब है। जिला अस्पताल की तरफ बढ़ते हैं तो लोगों ने सड़क को बाजार बना लिया है। न पब्लिक को सिविक सेंस रहा न यहां के जिम्मेदार लोगों को कोई इसकी फिक्र है। तो घड़ी सही बता रही है कि यहां के लोग ही नहीं सिस्टम भी निष्प्राण सा ठिठका पड़ा है इसी घड़ी की तरह। पता है कि ये घड़ी ऐसे ठीक नहीं हो गई लेकिन नगर निगम के अफसर कह देते हैं कि ठीक हो जाएगी। कब? इसका जवाब भी नहीं दे सकते क्योंकि उनकी भी घड़ी बंद है और उनके अफसरों की भी।
पहले थी यहां लाइब्रेरी
जिस जगह घंटाघर बनाया गया है वहां पहले कुतुबखाना लाइब्रेरी थी। करीब 45 साल पहले इसे तोड़कर यहां घंटाघर बनाया गया। मोतीपार्क की तरफ ही बस स्टैंड बनाया गया था और तांगा स्टैंड भी यहीं था। घंटाघर में लगी घड़ी बैलेंसिंग सिस्टम से चलती है, फिर इसे इलेक्ट्रानिक सिस्टम से चलाने की कोशिश की गई, लेकिन यह फेल साबित हुआ। पिछले 30 सालों से यह घड़ी यूं ही बंद है।
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बोले बुजुर्ग ---
इसे ठीक करने वाला एक ही व्यक्ति कुतुबखाना में था, वह भी यहां से जा चुका है। मेरे सामने तीन बार घड़ी को ठीक करने की कोशिश हुई लेकिन सफलता नहीं मिली। इसमें घंटा भी बोलता था। - सरफराज, दुकानदार
जिम्मेदार--
घड़ी का सिस्टम पुराना है इसे जो लोग ठीक कर सकते हैं उनको ढूंढना मुश्किल है। पुर्जे चोरी हो चुके हैं और बैलेंसिंग सिस्टम से यह चलती है। कई परेशानियां हैं, लेकिन कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द ठीक करवा दिया जाए।
गयूर अहमद, एक्सईएन, नगर निगम
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कुतुबखाना इलाका वैसे ही कंजेस्टेड है, गंदगी भी इधर खूब है। जिला अस्पताल की तरफ बढ़ते हैं तो लोगों ने सड़क को बाजार बना लिया है। न पब्लिक को सिविक सेंस रहा न यहां के जिम्मेदार लोगों को कोई इसकी फिक्र है। तो घड़ी सही बता रही है कि यहां के लोग ही नहीं सिस्टम भी निष्प्राण सा ठिठका पड़ा है इसी घड़ी की तरह। पता है कि ये घड़ी ऐसे ठीक नहीं हो गई लेकिन नगर निगम के अफसर कह देते हैं कि ठीक हो जाएगी। कब? इसका जवाब भी नहीं दे सकते क्योंकि उनकी भी घड़ी बंद है और उनके अफसरों की भी।
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पहले थी यहां लाइब्रेरी
जिस जगह घंटाघर बनाया गया है वहां पहले कुतुबखाना लाइब्रेरी थी। करीब 45 साल पहले इसे तोड़कर यहां घंटाघर बनाया गया। मोतीपार्क की तरफ ही बस स्टैंड बनाया गया था और तांगा स्टैंड भी यहीं था। घंटाघर में लगी घड़ी बैलेंसिंग सिस्टम से चलती है, फिर इसे इलेक्ट्रानिक सिस्टम से चलाने की कोशिश की गई, लेकिन यह फेल साबित हुआ। पिछले 30 सालों से यह घड़ी यूं ही बंद है।
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बोले बुजुर्ग ---
इसे ठीक करने वाला एक ही व्यक्ति कुतुबखाना में था, वह भी यहां से जा चुका है। मेरे सामने तीन बार घड़ी को ठीक करने की कोशिश हुई लेकिन सफलता नहीं मिली। इसमें घंटा भी बोलता था। - सरफराज, दुकानदार
जिम्मेदार--
घड़ी का सिस्टम पुराना है इसे जो लोग ठीक कर सकते हैं उनको ढूंढना मुश्किल है। पुर्जे चोरी हो चुके हैं और बैलेंसिंग सिस्टम से यह चलती है। कई परेशानियां हैं, लेकिन कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द ठीक करवा दिया जाए।
गयूर अहमद, एक्सईएन, नगर निगम