Bareilly: गुलियन बैरे सिंड्रोम से पीड़ित निशांत की मौत, आठ साल पहले मेडिकल कॉलेज में छोड़ गए थे मां-बाप
बरेली में दुर्लभ बीमारी से ग्रसित निशांत को उसके परिवार ने जुलाई 2016 में एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। इसके बाद वह लौटकर नहीं आए। शुक्रवार को निशांत की मौत हो गई। अब सामाजिक संगठन उसका अंतिम संस्कार कराएंगे।
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बरेली के भोजीपुरा स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में पिछले आठ साल से भर्ती मरीज निशांत गंगवार की मौत हो गई। गंभीर बीमारी गुलियन बैरे सिंड्रोम से पीड़ित निशांत को इलाज के लिए जुलाई 2016 में भर्ती कराया गया था। उस वक्त उसकी उम्र 15 साल थी। उसे भर्ती कराने के बाद उसके अभिभावक वापस कभी उसकी हाल खबर लेने नहीं आए। आठ वर्ष तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने उसका इलाज किया, लेकिन शुक्रवार को कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई।
निशांत की मौत के बाद उसके अंत्येष्टि कराने को लेकर कॉलेज प्रशासन ने जिला प्रशासन और भोजीपुरा थाना को सूचना दी। इस पर एसडीएम सदर गोविंद मौर्य का कहना है कि सीएमओ से बात हुई है। पुलिस शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम कराएगी। फिर संबंधित धर्म के एनजीओ के जरिए शव का अंतिम संस्कार कराया जाएगा।
चलने फिरने में असमर्थ था निशांत
बताते हैं कि कि मेडिकल कॉलेज की ओर से निशांत के इलाज की सूचना जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को समय समय पर दी जाती रही। समाचार पत्रों में भी निशांत के संबंध में कई समाचार प्रकाशित हुए, लेकिन निशांत के माता पिता या कोई रिश्तेदार उसे देखने नहीं आए। तब से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ही निशांत का इलाज और तीमारदारी कर रहा था। गुलियन बैरे सिंड्रोम से पीड़ित होने की वजह से निशांत के हाथ-पैर कमजोर हो गए थे और वह चलने फिरने और सामान उठाने में असमर्थ था।
क्या है गुलियन बैरे सिंड्रोम
कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि गुलियन बैरे सिंड्रोम लाइलाज विकार है। इससे पीड़ित के शरीर में दर्द होता है। बाद में मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। धीरे धीरे शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है। प्रतिरोधी क्षमता प्रभावित होने के कारण इसे आटो इम्यून डिजीज भी कहते हैं। इससे तंत्रिका तंत्र पर भी असर पड़ता है और तंत्रिकाएं मस्तिष्क के आदेश नहीं पकड़ पाती हैं, न ही मांसपेशियों को पहुंचा पाती हैं। रोगी को किसी चीज की बनावट पता नहीं चलती। सर्दी, गर्मी और दूसरी अनुभूतियां भी महसूस नहीं होती है।