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जीएसटी का पहला दिन...

Sun, 02 Jul 2017 01:21 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sun, 02 Jul 2017 01:21 AM IST
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GST first day ...
GST first day ... - फोटो : बरेली, अमर उजाला
बरेली। 
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जीएसटी गरीब और आम आदमी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। पहले दिन ही अनाज और दालें आदि चार प्रतिशत तक सस्ती हो गई हैं। हालांकि नामी गिरामी आटा कारोबारियों ने जीएसटी के तहत बिल नहीं दिए हैं और पुरानी दरों पर ही माल बेचा। 
शनिवार सुबह गेहूं का भाव 1525 रुपये क्विंटल खुला और शाम होते- होते इसी के आसपास चलता रहा। जिन लोगों ने शुक्रवार को एक क्विंटल गेहूं की खरीद की थी उन्हें साढ़े 6 फीसदी अधिक यानी सौ रुपये से अधिक टैक्स के रूप में देना पड़ा था। शनिवार को ग्राहकों को एक क्विंटल गेहूं पर 60 रुपये से अधिक की बजट हुई। यही स्थिति चावल और दाल कारोबार में रही, लेकिन खुदरा कारोबारियों ने कीमतें नहीं घटाई। वे मनमानी कीमतें वसलूते रहे। विभिन्न ब्रांडों से पैक आटा बेचने वालों ने तो हद कर दी। उन्होंने पुरानी दराें पर ही आटा बेचा और बिल भी नहीं दिया। जबकि गेहूं सस्ता होने के बाद आटा स्वत: ही सस्ता हो जाना चाहिए। इस मनमानी से हजाराें ग्राहक परेशान हुए और आम आदमी को पहले दिन जीएसटी का लाभ नहीं मिल पाया। 
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सराफा में सन्नाटा 
शनिवार सुबह देर से सराफा बाजार खुला। व्यापारी ग्रुप में बैठकर जीएसटी पर ही चर्चा करते दिखे। ग्राहकों की आमद बहुत कम थी। बमुश्किल पांच प्रतिशत दुकानदाराें ने नए सिस्टम से बिल जारी किए, जबकि सराफा कारोबार में शनिवार होते हुए भी पांच करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो चुका था। सराफा मंडल अध्यक्ष संदीप मिंटू अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी सिस्टम समझने में समय लगेगा। व्यापारी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं। जीएसटी से सभी को फायदा होने वाला है। इसमें व्यापारी, उपभोक्ता और सरकार को लाभ होगा। छोटे कारोबारियों के लिए अच्छी स्कीम बनाई गई है। कर के जो प्रावधान किए गए हैं वह काफी सरल हैं इन्हें समझने में दिक्कत नहीं होगी। जो व्यापारी 20 लाख रुपये का सालाना कारोबार करते हैं उनको कोई पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं है। जबकि पहले पांच लाख वाले कारोबारी वैट में पंजीकृत थे। फुटकर व्यापारियाें में 75 लाख रुपये साला टर्नओवर वालाें को भी ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। इन्हें कंपोजीशन स्कीम के तहत छूट दी जाएगी और सिर्फ एक प्रतिशत टैक्स इनसे लिया जाएगा। इन्हें जीएसटी के अन्य झंझट जैसे मंथली रिटर्न, अकाउंट बनाना और रिकार्ड रखने की भी जरूरत नहीं है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए खास है कि जिसमें तमाम टैक्स लगकर चीजें महंगी हो जाती थी अब वह सस्ती होंगी। सरकार के पास अब ज्यादा व्यापारी पंजीकृत होंगे और ज्यादा कर आएगा। 
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-सीए अखिल रस्तोगी, चार्टर्ड एकाउंटेंट एसोसिएशन 
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