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बेसहारा मासूमों की मदद करेगी सरकार... आप भी कराएं तलाश
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अमर उजाला अभियान अपनत्व।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
कोरोना से अपने मां-बाप को गंवाने वाले बच्चों के लिए सरकार ने शुरू की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना
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बरेली। कोरोना ने तमाम मासूमों और उनके मां-बाप के ख्वाब चकनाचूर कर दिए। किसी के सिर से मां या पिता का साया छीना और किसी के सिर से दोनों का। ऐसे मासूमों के लिए जिंदगी एक सवाल बनकर रह गई है। प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की। अपनत्व अभियान चला रहे अमर उजाला की कोशिश है कि बेसहारा हुए ज्यादा से ज्यादा मासूमों को सरकार की इस योजना का लाभ मिले। कुछ मासूमों की दास्तां इस उम्मीद के साथ छाप रहे हैं कि सरकार उन्हें और उनके परिवार को सहारा देकर संभालेगी। पाठकों से भी उम्मीद है कि वह कोरोना से अपने माता-पिता को खो देने वाले बच्चों की सूचना हमें दें ताकि अपनत्व का अभियान ज्यादा से ज्यादा मासूमों तक पहुंचे।
कोरोना ने मासूम बच्चों के सिर से माता पिता या इनमें से किसी एक का साया छीन लिया है। ऐसे बच्चों के लिए सरकार ने उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारंभ किया है अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों को ढूंढे और उनको सरकार से मिलने वाली सहायता में सहयोग करें। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों को ढूंढने के लिए अभियान अपनत्व चला रहा है जिसमें प्रतिदिन कई ऐसे बच्चों की सूचनाएं दर्ज की जा रही हैं। कुछ बच्चों को हमने तलाश किया है और उम्मीद करते हैं कि हमारे पाठक भी इस काम में हमारी मदद करेंगे।
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कोरोना ने मासूम बच्चों के सिर से माता पिता या इनमें से किसी एक का साया छीन लिया है। ऐसे बच्चों के लिए सरकार ने उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारंभ किया है अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों को ढूंढे और उनको सरकार से मिलने वाली सहायता में सहयोग करें। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों को ढूंढने के लिए अभियान अपनत्व चला रहा है जिसमें प्रतिदिन कई ऐसे बच्चों की सूचनाएं दर्ज की जा रही हैं। कुछ बच्चों को हमने तलाश किया है और उम्मीद करते हैं कि हमारे पाठक भी इस काम में हमारी मदद करेंगे।
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दोराहे पर है जिंदगी, नौकरी करके घर चलाऊं या बिन मां का बच्चा संभालूं
रिठौरा के मोहल्ला ठाकुरद्वारा में रहने वाले संतोष की पत्नी रिची त्रिगुनायक नौ वर्षीय बेटे आकाश कुमार के साथ घर पर ही रहती थीं। कुछ दिनों तबियत खराब रही तो संतोष ने रिची की जांच कराई। कोरोना संक्रमित पाए जाने पर डॉक्टर की सलाह पर उन्हें एसआरएमएस में 22 अप्रैल को भर्ती कराया जहां 24 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। संतोष निजी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी है। परिवार चलाने के लिए नौकरी पर जाना उनकी मजबूरी है लेकिन बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी ने उन्हें झकझोर दिया है। संतोष ने बताया कि घर में बेटे की देखभाल के लिए अपनी बुजुर्ग मां को बुला लिया है लेकिन फिर भी बेशुमार दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि उनका क्या भविष्य होगा।
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