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शासन ने भी माना, राजनीतिक कारणों से अर्चना की गई थीं निलंबित
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 19 Dec 2016 01:48 AM IST
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Government admitted, were suspended for political reasons Archana
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सपा नेताओं में एक महीने से चली आ रही रार के चलते कोटे को लेकर निलंबित मीरगंज की एसडीएम अर्चना द्विवेदी को शासन ने बहाल करने का आश्वासन तो दे दिया है, मगर औपचारिकताएं पूरी होने में कुछ दिन लगेंगे। कारण यह है कि एसडीएम की ओर से जो स्पष्टीकरण दिया गया है, उसका पहले परीक्षण किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से सपा सुप्रीमो भी क्षुब्ध थे, वह भी राज्य सरकार के अफसरों को अपनी ओर से आपत्ति जता चुके थे। इसलिए उनकी द्विवेदी की बहाली पहले से तय हो गई थी, वहीं एसोसिएशन के हड़ताल के निर्णय ने इसे और जल्दी करा दिया।
लखनऊ में प्रमुख सचिव (गृह) के साथ रविवार को पीसीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मीरगंज की एसडीएम को राजनीतिक कारणों से निलंबित करने की बात कहते हुए इसके तर्क भी रखे। इन तर्कों को आला अफसरों ने सही माना और उसी के बाद नियुक्ति सचिव और कमिश्नर को बहाली की प्रक्रिया को अपनाने के संकेत भी दे दिए।
बताते हैं कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने इस प्रकरण को लेकर अपनी प्रतिक्रिया से शासन को अवगत करा दिया था। साथ ही पार्टी संगठन को निर्देश भी दिए हैं कि चुनाव के दिनों में ऐसा कोई काम न करें, जिससे प्रदेश में पार्टी की छवि पर विपरीत असर पड़े। उनका मानना है कि इस प्रकरण में संगठन और सत्ता के बीच रार बढ़ने के कारण निलंबन की नौबत आई। वहीं इससे पार्टी की छवि खराब हुई है। मीरगंज के कोटे के मामले में सभी सपा नेताओं को अब इस मामले में चुप्पी साधने के लिए कहा गया है।
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लखनऊ में प्रमुख सचिव (गृह) के साथ रविवार को पीसीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मीरगंज की एसडीएम को राजनीतिक कारणों से निलंबित करने की बात कहते हुए इसके तर्क भी रखे। इन तर्कों को आला अफसरों ने सही माना और उसी के बाद नियुक्ति सचिव और कमिश्नर को बहाली की प्रक्रिया को अपनाने के संकेत भी दे दिए।
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बताते हैं कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने इस प्रकरण को लेकर अपनी प्रतिक्रिया से शासन को अवगत करा दिया था। साथ ही पार्टी संगठन को निर्देश भी दिए हैं कि चुनाव के दिनों में ऐसा कोई काम न करें, जिससे प्रदेश में पार्टी की छवि पर विपरीत असर पड़े। उनका मानना है कि इस प्रकरण में संगठन और सत्ता के बीच रार बढ़ने के कारण निलंबन की नौबत आई। वहीं इससे पार्टी की छवि खराब हुई है। मीरगंज के कोटे के मामले में सभी सपा नेताओं को अब इस मामले में चुप्पी साधने के लिए कहा गया है।
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