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सालों बाद मिला था मौका.. पता नहीं था आफत भी ला रहा हूं घर
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सुनसान पड़ीं सिविल लाइंस की सड़कें।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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नई रिपोर्ट निगेटिव आए सुभाषनगर के पति-पत्नी ने अमर उजाला से बातचीत में बयां की आपबीती
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बरेली। लॉकडाउन की घोषणा के बाद नोएडा में जब मेरी कंपनी बंद हुई तो यह मेरे लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं था। वैसे तो प्राइवेट नौकरी करते हुए ज्यादा छुट्टी लेना मुमकिन नहीं होता था, लिहाजा कंपनी बंद होते ही पहला ख्याल यही आया कि अब परिवार के साथ लंबा वक्त बिताने का मौका मिलेगा। बहुत खुश होकर लौटा था, यह सोचा भी नहीं था कि नोएडा से अपने पूरे परिवार के लिए ऐसी आफत भी ला रहा हूं जो मेरे साथ उनकी जिंदगी को भी खतरे में डाल देगी।
सुभाषनगर में मिले शहर के पहले संक्रमित युवक ने शुक्रवार को अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बेहद जज्बाती होते हुए यह आपबीती बयां की। नोएडा की सीजफायर कंपनी से कोरोना संक्रमण लेकर घर लौटे इस युवक ने बताया कि वह 22 मार्च को सुभाषनगर लौटा था और तीन दिन बाद 25 मार्च को पहला झटका उसे तब लगा जब यह पता चला कि नोएडा में उसका एक सीनियर कोरोना पॉजीटिव निकला है। उसे भी बुखार हो रहा था, उसने यह बात घर के लोगों को बताई, फिर उनके सुझाव पर जिला अस्पताल जाकर कोरोना टेस्ट कराया। रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो वह स्तब्ध रह गया। पहले ही पल में उसे लगा कि खुद उससे ज्यादा उसके परिवार का कोई गुनहगार नहीं हो सकता। दो दिन बाद घर के बाकी लोगों की भी रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो वह और ज्यादा सदमे में डूब गया। सबसे ज्यादा निराशा इस बात की थी कि वह अपने परिवार को खुशियां तो नहीं दे सका, इसके उलट उन्हें खतरे में डालकर अस्पताल में जरूर भर्ती करा दिया। उसे हताशा से भरा देखकर परिवार वालों ने ही उसे समझाया। बाद में डॉक्टरों ने भी उसकी काउंसलिंग की, तब जाकर उसके मन में गुनहगार होने का एहसास कुछ हद तक कम हुआ।
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सुभाषनगर में मिले शहर के पहले संक्रमित युवक ने शुक्रवार को अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बेहद जज्बाती होते हुए यह आपबीती बयां की। नोएडा की सीजफायर कंपनी से कोरोना संक्रमण लेकर घर लौटे इस युवक ने बताया कि वह 22 मार्च को सुभाषनगर लौटा था और तीन दिन बाद 25 मार्च को पहला झटका उसे तब लगा जब यह पता चला कि नोएडा में उसका एक सीनियर कोरोना पॉजीटिव निकला है। उसे भी बुखार हो रहा था, उसने यह बात घर के लोगों को बताई, फिर उनके सुझाव पर जिला अस्पताल जाकर कोरोना टेस्ट कराया। रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो वह स्तब्ध रह गया। पहले ही पल में उसे लगा कि खुद उससे ज्यादा उसके परिवार का कोई गुनहगार नहीं हो सकता। दो दिन बाद घर के बाकी लोगों की भी रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो वह और ज्यादा सदमे में डूब गया। सबसे ज्यादा निराशा इस बात की थी कि वह अपने परिवार को खुशियां तो नहीं दे सका, इसके उलट उन्हें खतरे में डालकर अस्पताल में जरूर भर्ती करा दिया। उसे हताशा से भरा देखकर परिवार वालों ने ही उसे समझाया। बाद में डॉक्टरों ने भी उसकी काउंसलिंग की, तब जाकर उसके मन में गुनहगार होने का एहसास कुछ हद तक कम हुआ।
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हाथ जोड़ता हूं.. सब घर में रहें और आपस में दूरी बनाए रखें
युवक ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान बार-बार यह आग्रह किया कि उसकी तरफ से पूरे शहर के लोगों से हाथ जोड़कर अपील कर दी जाए कि वे घरों से बाहर निकलकर अपनी और अपने लोगों की जिंदगी के लिए खतरा मोल न लें और आपस में दूरी बनाए रखें। युवक ने कहा कि पिछले दिनों में उसके साथ जो स्थिति गुजरी है, वह इतनी भयावह थी कि वह उसे लफ्जों में बयान नहीं कर सकता। लोगों प्रधानमंत्री की हिदायतों पर पूरी तरह अमल करना चाहिए।
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