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गोमाता ने ‘सत्ता’ दिलाई..इन्हें गोशाला तो दिलाएं योग जी!
बरेली
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:31 AM IST
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बरेली। चुनाव से पहले हिंदूवादी संगठन और भाजपा नेता गायों की तस्करी पर नारेबाजी करते नहीं थकते थे। सत्ता मिलते ही योगी सरकार ने अवैध स्लाटर हाउस बंद करा दिए। कट्टीघरों में गायों के कटने पर सख्ती से रोक लग गई। मगर, अब दूध न देने पर लोग गायों को लावारिस छोड़ देते हैं। शहर से लेकर कस्बों की सड़कों पर ऐसी गायें मारी-मारी फिर रहीं हैं। अगर कहीं कसाइयों से पुलिस गाय बरामद भी करती है तो उनको पहले से भरी गोशाला में ठूंस दिया जाता है। गोशाला वाले गायों को मैनेजर रख तो ले रहे हैं, लेकिन उनके लिए चारे का पर्याप्त इंतजाम न होने से वे कमजोर और बीमार पड़ रही हैं। गोशाला में चारा, भूसा की कमी और बीमारी से हर साल औसतन सवा सौ गायों की मौत हो जाती है। न तो इसकी चिंता माननीयों को है और न ही भगवा पहनकर सड़क पर नारेबाजी करने वाले हिंदूवादी संगठनों को।
शहर में कालीबाड़ी, साहूकारा, नगर निगम सब्जी मंडी, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, बानखाना, हरूनगला, सुभाषनगर, सिटी सब्जी मंडी, सीबीगंज सब्जीमंडी के अलावा स्टेट और नेशनल हाइवे पर आवारा गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये गायों गली मोहल्लों की गलियों और सड़कों पर भोजन की तलाश में पूरे दिन घूमती दिखती हैं। जब कहीं से इनको खाने को कुछ नहीं मिलता तो सड़कों पर पॉलीथिन या कूड़े के अंदर सब्जी के हरे पत्ते खाते मिलेंगी। ट्रैफिक जाम की वजह भी हैं। बरेली गौशाला सोसायटी में 225 गायों को रखने की क्षमता है। वर्तमान में यहां 210 गाय पहले ही मौजूद हैं। नगर निगम की गोशाला एक करोड़ का बजट मिलने के बाद भी नहीं खुली। वनखंडीनाथ मंदिर और चौबारी में गौशालाएं हाल ही में खोली गई हैं। इनकी क्षमता 20 से 30 गायें पालने की ही है। शहर के अलावा रिठौरा, मीरगंज, भोजीपुरा, बहेड़ी, नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला, सिरौली समेत कस्बों में भी आवारा गायों को रखने के इंतजाम नहीं हैं। गो तस्कर चोरी छिपे इसका फायदा भी उठा रहे हैं।
गाोशाला में हर महीने मर जाती हैं औसतन 10 गायें
गोशाला मैनेजर पंडित रामफल शर्मा बताते हैं कि गोशाला में 250 गायाें को रखने की क्षमता है। अगर इनकी संख्या बढ़ती है तो उनको पीलीभीत रोड स्थित फार्म में भेज दिया जाता है। फिर भी संख्या बढ़ती है तो पीलीभीत की गोशाला में भेजते हैं। गोशाला में गायों की देखरेख पर हर साल 24 से 32 लाख रुपये खर्च होता है। गौशाला सोसाइटी की आमदनी गायों की दूध बिक्री, दान, चंदा, गौ ग्रास गुल्लक और अन्य माध्यमों से उतनी नहीं होती जितना कि गाय पालन पर खर्च आता है। गौशाला में पलने वाली गायों की दूध बिक्री के लिए ग्राहकों को कूपन मिलते हैं। दूध की होम डिलीवरी होती है।
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हिंदूवादी संगठनों के विचार --
सत्ता मिलते ही गायों को भूल गए भाजपा विधायक
शिवसेना जिलाध्यक्ष बंटू सिंह का कहना है कि सरकार बनने से पहले भाजपा के छोटे से लेकर बड़े नेता तक गोवंशीय तस्करी पर चिल्लाते थे। अब भाजपा प्रचंड बहुमत से सत्ता में है। सरकार के अलावा बरेली में भाजपा के नौ विधायक हैं लेकिन वह सत्ता मिलते ही गायों को भूल गए हैं। शिवसेना हर स्तर पर आवारा गायों को बचाने का प्रयास करेगी।
गोशाला खोलने के लिए बात की है
भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया का कहना है कि सड़क पर घूमने वाली गायों की देखरेख के लिए नई गौशाला बनाने की जरूरत है। इसके लिए हमने वित्तमंत्री जी से बात की है। बरेली में जल्द ही बड़ी गौशाला खुलेगी। वहां गायों को रखवाकर देखरेख की जाएगी।
गोशाला की जमीन फाइनल, क्या कहते हैं जिम्मेदार
नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव का कहना है कि गेशाला खोलने के लिए खड़ऊआ में जमीन मिल गई है। पिछली सरकार में 3.5 करोड़ का बजट गेशाला खोलने के लिए स्वीकृत किया गया था। इसमें एक करोड़ रुपये मिल चुके हैं। टेंडर कराया जा चुका है। गोशाला बनाने में कम से कम छह माह का समय लगेगा। गोशाला में बाउंड्रीवाल और टीनशेड के अलावा नांद भी बनेगी। ट्रीटमेंट प्लांट भी लगेगा। साफ पानी की व्यवस्था भी होगी।
क्या कहते हैं माननीय
गोशाला बनी भी तो चलाएंगे कैसे
मेयर डा. आईएस तोमर का कहना है कि सरकारी बजट से भले ही गौशाला बन जाए लेकिन इसे चलाने के लिए हमारे पास कोई संसाधन नहीं है। एक गाय पर प्रतिदिन सौ रुपये खर्च करने का भी बंदोबस्त नगर निगम में नहीं है। हालांकि खड़ऊआ में नगर निगम की गौशाला का निर्माण हम जल्द ही शुरू कराने जा रहे हैं।
गोशाला खुलवाने में मदद करेंगे
शहर विधायक डा. अरुण कुमार का कहना है कि सड़कों पर आवारा गायों की संख्या बढ़ना चिंता की बात है। अगर कोई गौशाला खोलना चाहता है तो वह हमसे मिले। हम उसकी हर संभव मदद करेंगे। गायों को बचाने के लिए गौशाला खोलकर वहां उनकी देखरेख की व्यवस्था कराएंगे।
जमीन मिले तो खोल दूं गोशाला
फरीदपुर विधायक डा. श्याम बिहारी लाल का कहना है कि वह अपनी गोशाला खोलना चाहते हैं लेकिन जमीन नहीं मिल रही। सरकार ने भी गौशालाएं खोलने के लिए बजट जारी किया है। हम अपनी विधायक निधि से भी गौशाला खोलने के लिए पैसा देने को तैयार हैं।
छह महीने में बिथरी क्षेत्र की गाय नहीं दिखेंगी
बिथरी विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल का कहना है कि वह पुरानी जेल की जमीन पर गोशाला खुलवाने के लिए प्रयासरत हैं क्योंकि वहां बंदी गायों की सेवा करते रहेंगे तो गौशाला सफल रहेगी। योगी सरकार भी गौशाला खोलने के लिए आदेश जारी कर चुकी है। अगले छह महीने में हमारे विधानसभा क्षेत्र के अंदर सड़क पर गायें नहीं दिखेंगी।
नवाबगंज में खोलेंगे गोशाला
विधायक केसर सिंह का कहना है कि वह सड़क पर घूमने वाली गायों की देखरेख के लिए वह अपने विधानसभा क्षेत्र नवाबगंज में जल्द ही गोशाला खोलने जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी योजना बन चुकी है। दो गोशालाओं में पर्याप्त गायों की देखरेख हो जाएगी।
शहर में कालीबाड़ी, साहूकारा, नगर निगम सब्जी मंडी, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, बानखाना, हरूनगला, सुभाषनगर, सिटी सब्जी मंडी, सीबीगंज सब्जीमंडी के अलावा स्टेट और नेशनल हाइवे पर आवारा गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये गायों गली मोहल्लों की गलियों और सड़कों पर भोजन की तलाश में पूरे दिन घूमती दिखती हैं। जब कहीं से इनको खाने को कुछ नहीं मिलता तो सड़कों पर पॉलीथिन या कूड़े के अंदर सब्जी के हरे पत्ते खाते मिलेंगी। ट्रैफिक जाम की वजह भी हैं। बरेली गौशाला सोसायटी में 225 गायों को रखने की क्षमता है। वर्तमान में यहां 210 गाय पहले ही मौजूद हैं। नगर निगम की गोशाला एक करोड़ का बजट मिलने के बाद भी नहीं खुली। वनखंडीनाथ मंदिर और चौबारी में गौशालाएं हाल ही में खोली गई हैं। इनकी क्षमता 20 से 30 गायें पालने की ही है। शहर के अलावा रिठौरा, मीरगंज, भोजीपुरा, बहेड़ी, नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला, सिरौली समेत कस्बों में भी आवारा गायों को रखने के इंतजाम नहीं हैं। गो तस्कर चोरी छिपे इसका फायदा भी उठा रहे हैं।
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गाोशाला में हर महीने मर जाती हैं औसतन 10 गायें
गोशाला मैनेजर पंडित रामफल शर्मा बताते हैं कि गोशाला में 250 गायाें को रखने की क्षमता है। अगर इनकी संख्या बढ़ती है तो उनको पीलीभीत रोड स्थित फार्म में भेज दिया जाता है। फिर भी संख्या बढ़ती है तो पीलीभीत की गोशाला में भेजते हैं। गोशाला में गायों की देखरेख पर हर साल 24 से 32 लाख रुपये खर्च होता है। गौशाला सोसाइटी की आमदनी गायों की दूध बिक्री, दान, चंदा, गौ ग्रास गुल्लक और अन्य माध्यमों से उतनी नहीं होती जितना कि गाय पालन पर खर्च आता है। गौशाला में पलने वाली गायों की दूध बिक्री के लिए ग्राहकों को कूपन मिलते हैं। दूध की होम डिलीवरी होती है।
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हिंदूवादी संगठनों के विचार --
सत्ता मिलते ही गायों को भूल गए भाजपा विधायक
शिवसेना जिलाध्यक्ष बंटू सिंह का कहना है कि सरकार बनने से पहले भाजपा के छोटे से लेकर बड़े नेता तक गोवंशीय तस्करी पर चिल्लाते थे। अब भाजपा प्रचंड बहुमत से सत्ता में है। सरकार के अलावा बरेली में भाजपा के नौ विधायक हैं लेकिन वह सत्ता मिलते ही गायों को भूल गए हैं। शिवसेना हर स्तर पर आवारा गायों को बचाने का प्रयास करेगी।
गोशाला खोलने के लिए बात की है
भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया का कहना है कि सड़क पर घूमने वाली गायों की देखरेख के लिए नई गौशाला बनाने की जरूरत है। इसके लिए हमने वित्तमंत्री जी से बात की है। बरेली में जल्द ही बड़ी गौशाला खुलेगी। वहां गायों को रखवाकर देखरेख की जाएगी।
गोशाला की जमीन फाइनल, क्या कहते हैं जिम्मेदार
नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव का कहना है कि गेशाला खोलने के लिए खड़ऊआ में जमीन मिल गई है। पिछली सरकार में 3.5 करोड़ का बजट गेशाला खोलने के लिए स्वीकृत किया गया था। इसमें एक करोड़ रुपये मिल चुके हैं। टेंडर कराया जा चुका है। गोशाला बनाने में कम से कम छह माह का समय लगेगा। गोशाला में बाउंड्रीवाल और टीनशेड के अलावा नांद भी बनेगी। ट्रीटमेंट प्लांट भी लगेगा। साफ पानी की व्यवस्था भी होगी।
क्या कहते हैं माननीय
गोशाला बनी भी तो चलाएंगे कैसे
मेयर डा. आईएस तोमर का कहना है कि सरकारी बजट से भले ही गौशाला बन जाए लेकिन इसे चलाने के लिए हमारे पास कोई संसाधन नहीं है। एक गाय पर प्रतिदिन सौ रुपये खर्च करने का भी बंदोबस्त नगर निगम में नहीं है। हालांकि खड़ऊआ में नगर निगम की गौशाला का निर्माण हम जल्द ही शुरू कराने जा रहे हैं।
गोशाला खुलवाने में मदद करेंगे
शहर विधायक डा. अरुण कुमार का कहना है कि सड़कों पर आवारा गायों की संख्या बढ़ना चिंता की बात है। अगर कोई गौशाला खोलना चाहता है तो वह हमसे मिले। हम उसकी हर संभव मदद करेंगे। गायों को बचाने के लिए गौशाला खोलकर वहां उनकी देखरेख की व्यवस्था कराएंगे।
जमीन मिले तो खोल दूं गोशाला
फरीदपुर विधायक डा. श्याम बिहारी लाल का कहना है कि वह अपनी गोशाला खोलना चाहते हैं लेकिन जमीन नहीं मिल रही। सरकार ने भी गौशालाएं खोलने के लिए बजट जारी किया है। हम अपनी विधायक निधि से भी गौशाला खोलने के लिए पैसा देने को तैयार हैं।
छह महीने में बिथरी क्षेत्र की गाय नहीं दिखेंगी
बिथरी विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल का कहना है कि वह पुरानी जेल की जमीन पर गोशाला खुलवाने के लिए प्रयासरत हैं क्योंकि वहां बंदी गायों की सेवा करते रहेंगे तो गौशाला सफल रहेगी। योगी सरकार भी गौशाला खोलने के लिए आदेश जारी कर चुकी है। अगले छह महीने में हमारे विधानसभा क्षेत्र के अंदर सड़क पर गायें नहीं दिखेंगी।
नवाबगंज में खोलेंगे गोशाला
विधायक केसर सिंह का कहना है कि वह सड़क पर घूमने वाली गायों की देखरेख के लिए वह अपने विधानसभा क्षेत्र नवाबगंज में जल्द ही गोशाला खोलने जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी योजना बन चुकी है। दो गोशालाओं में पर्याप्त गायों की देखरेख हो जाएगी।