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तीन तलाक पीड़िता का हाथ थामा तो मिलीं धमकियां, धर्म परिवर्तन कर मंदिर में रचाई शादी
Fri, 17 May 2019 12:25 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली/पीलीभीत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली/पीलीभीत
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 17 May 2019 12:25 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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पीलीभीत की तीन तलाक पीड़िता रेशमा ने बुधवार को धर्म परिवर्तन कर पीलीभीत के ही दीपू से बरेली के मंदिर में शादी कर ली। वह नाम बदलकर रेशमा से रानी बन गई है। लेकिन तीन तलाक पीड़िता का हाथ थामने के बाद दीपू को धमकियां मिल रही हैं। दोनों ने एडीजी दफ्तर में पत्र देकर सुरक्षा मांगी है। हालांकि अधिकारी ऐसा पत्र मिलने से इंकार कर रहे हैं। एडीजी के पीआरओ विप्लव शर्मा ने कहा कि नवदंपती आएंगे तो उनकी सुरक्षा को लेकर संबंधित थाना पुलिस को निर्देश दिए जाएंगे।
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पीलीभीत शहर के मोहल्ला देशनगर की रेशमा पुत्री मोहम्मद इस्लाम का निकाह तीन साल पूर्व कांशीराम कॉलोनी ईदगाह निवासी मोहम्मद रईस से हुआ था। आरोप है कि निकाह के बाद से ही रईस प्रताड़ित करने लगा और 5 अप्रैल 2019 को रईस ने रेशमा को तीन तलाक दे दिया। सात माह पहले ही रेशमा की मुलाकात कांशीराम कॉलोनी ईदगाह निवासी दीपू उर्फ दीपक राठौर से हुई थी। दोनों एकदूसरे को पहले से जानते थे। बुधवार शाम बरेली की बड़ी बमनपुरी स्थित एक मंदिर में रेशमा ने पहले हिंदू धर्म अपनाया और नया नाम रानी रख लिया। इसके बाद दीपू के साथ शादी रचा ली। दीपू ने बताया कि दोनों अलग समुदाय के हैं इसलिए उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उनकी जान का खतरा है। विवाह कराने वाले अखिल भारतीय हिंदू महासभा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित केशव शंखधार ने बताया कि रेशमा परेशान थी। दीपू ने उसे सहारा
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दिया है।
बच्चों को ले गया पति, घर में लटका ताला
रेशमा को तलाक देने वाले पति रईस के मकान पर ताला लटका मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि वह मजदूरी करता है। पहले पति को छोड़ने के बाद तीन साल पहले रेशमा ने रईस से निकाह किया था। रेशमा के जाने के बाद वह बच्चों को लेकर दो दिन पहले ही कहीं चला गया। वह बरेली में कबाड़ का काम करता था। अनुमान है कि वह वहीं गया होगा। कॉलोनी के लोग उनके बीच तलाक होने की बात स्पष्ट नहीं कर सके। रेशमा उर्फ रानी के मायके वाले भी मजदूरी करते हैं। वे भी घर पर नहीं मिले।
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दीपू के परिजन बोले- बेटे ने फैसला लिया है तो स्वीकार करेंगे
पीलीभीत। दीपू उर्फ दीपक के पिता लालाराम ने बताया कि वह रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। वह मूल रूप से कलीनगर के रहने वाले हैं। तीन दशक पहले पीलीभीत आकर बस गए थे। उनके छह लड़के और एक बेटी रोशनी है। दीपू तीसरे नंबर का है। वह बेकरी में काम करता है। मां चंद्रादेवी ने बताया कि उनको दीपू के प्रेमप्रसंग की जानकारी थी। समझाया था, लेकिन वह मन बना चुका था। दीपू 15 दिन पहले घर से चला गया। अब तक नहीं आया है। जब शादी करने की खबर मिली तो थोड़ा दुख हुआ, लेकिन अब वह है तो हमारा ही बेटा। ज्यादा दिन तक नाराज भी तो नहीं रह सकते। दोनों ने सोच-समझकर रजामंदी से फैसला लिया है। वह हमारे पास आते हैं, तो हम दोनों को स्वीकार कर लेंगे।