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Bareilly News: आईवीआरआई में स्थापित होगा थारपारकर गायों का जर्मप्लाज्म केंद्र, नस्ल सुधार के होंगे कार्य
Wed, 22 Jan 2025 02:45 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 22 Jan 2025 02:45 PM IST
सार
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि संस्थान में थारपारकर गायों के लीड जर्मप्लाज्म सेंटर के रूप में कार्य किया जाएगा। संस्थान के फार्म में उन्नत थारपारकर नस्ल के गोवंश हैं।
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आईवीआरआई के वैज्ञानिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) को देसी थारपारकर गायों के संरक्षण एवं नस्ल सुधार के लिए अखिल भारतीय परियोजना के तहत लीड केंद्र स्थापित करने की जिम्मेदारी मिली है। इसके तहत उनके संरक्षण और नस्ल सुधार के कार्य होंगे। केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ और आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के बीच एआईसीआरपी की स्थापना और तकनीकी कार्यक्रम की बैठक में मंगलवार को ये जानकारी साझा की गई।
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आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि संस्थान में थारपारकर गायों के लीड जर्मप्लाज्म सेंटर के रूप में कार्य किया जाएगा। संस्थान के फार्म में उन्नत थारपारकर नस्ल के गोवंश हैं। सीमेन उत्पादन, प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधा समेत कुशल वैज्ञानिकों की टीम भी है। थारपारकार नस्ल को बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
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इसके लिए ब्रीडिंग क्षेत्र का चयन किया जाएगा। साथ ही, आईवीआरआई के डेयरी फार्म में थारपारकार गायों की संख्या को बढ़ाई जाएगी। सांड़ों के सीमेन सुरक्षित किए जाएंगे। शुरुआत में सीमेन की पांच हजार डोज जर्मप्लाज्म केंद्र में तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
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केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के डॉ. एके दास ने भी विचार साझा किए। गाय एवं भैंस प्रक्षेत्र के प्रभारी डॉ. अनुज चौहान ने थारपारकर गायों के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत की। पीएमई सेल प्रभारी डॉ. समीर श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। यहां पशुधन उत्पादन, प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. अयोन तरफदार, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह मौजूद रहे।
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जोधपुर, बीकानेर के शोध केंद्र का लेंगे सहयोग
केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ के डॉ. सुशील कुमार के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान जोधपुर की डाटा रिकॉर्डिंग यूनिट और जर्मप्लाज्म यूनिट का सहयोग लेंगे। आईवीआरआई सभी यूनिट के डाटा का संग्रह करेगा।
केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ के डॉ. सुशील कुमार के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान जोधपुर की डाटा रिकॉर्डिंग यूनिट और जर्मप्लाज्म यूनिट का सहयोग लेंगे। आईवीआरआई सभी यूनिट के डाटा का संग्रह करेगा।