Bareilly Firing Case: जल्द जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे आरोपी, गैंगस्टर व रासुका लगाने की तैयारी में पुलिस
बरेली फायरिंग मामले में जेल भेजे गए आरोपियों पर गैंगस्टर और रासुका के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके मद्देनजर पुलिस ने दबिश के साथ ही दर्ज मुकदमों की विवेचना भी तेज कर दी है।
विस्तार
बरेली के पीलीभीत बाइपास पर प्लॉट पर कब्जे को लेकर फायरिंग के मामले में जेल भेजे गए आरोपी जल्द सलाखों के पीछे से बाहर नहीं आ सकेंगे। उन पर गैंगस्टर और रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने तैयारी है। इसके लिए दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर पुलिस ने दबिश के साथ ही दर्ज मुकदमों की विवेचना भी तेज कर दी है। आरोपपत्र दाखिल होते ही आरोपियों पर गैंगस्टर और रासुका की कार्रवाई कर दी जाएगी।
22 जून को घटना के बाद इज्जतनगर थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। एक मुकदमा दरोगा राजीव की तरफ से तो दूसरा आदित्य उपाध्याय के चौकीदार की तरफ से दर्ज कराया गया था। अब जिन लोगों का नाम प्रकाश में आ रहा है, उनके नाम दोनों मुकदमों में बढ़ाए जा रहे हैं।
इज्जतनगर इंस्पेक्टर राधेश्याम ने बताया कि जिनके नाम बढ़ाए जा रहे हैं, घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी के साक्ष्य पुलिस के पास हैं। कई आरोपियों के चेहरे सीसीटीवी फुटेज में सामने आए हैं।
शहर में सक्रिय हैं असलहा तस्कर
असलहा सप्लायरों के पकड़े जाने के बाद यह साफ हो गया कि शहर में असलहों की खरीद फरोख्त की जा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार शहर में तमंचे व कारतूस कहां से आ रहे हैं? तीन साल पहले एसटीएफ ने तमंचों की खेप पकड़ी थी। तब फर्रुखाबाद की तरफ कटरी में बन रहे तमंचों की खासी चर्चा हुई थी।
मुंगेर की पिस्टल भी चर्चा में आई थी। अब सवाल यह है कि कहीं शहर के आसपास ही तो नहीं असलहे बनाए जा रहे हैं? इस मामले में पुलिस अब तक पांच से ज्यादा तमंचे बरामद कर चुकी है। अब विवेचना में उसे यह भी बताना होगा कि आरोपियों के पास ये तमंचे आए कहां से?
घरों पर पड़े ताले, रिश्तेदार भी गायब
पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। इन आरोपियों के घरों पर ताले पड़े हुए हैं।
राजीव राना पर हो सकते हैं और मुकदमे
राजीव राना भले ही जेल चला गया हो, लेकिन उसके खिलाफ अभी और एफआईआर दर्ज हो सकती हैं। पुलिस की छानबीन में पता चला है कि वह लंबे समय से प्रॉपर्टी के धंधे में लगा हुआ था। विवादित प्लॉटों को औने-पौने दामों में लेकर उस पर कब्जा करना ही उसका काम है। इसमें राजीव का केपी यादव, सुभाष आदि की टीम साथ देती थी।
ध्वस्त व सील की गई संपत्ति के अलावा यह भी पता किया जा रहा है कि पूर्व में किन-किन प्लॉटों पर दबंगई से कब्जा किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही राजीव व उसके साथियों पर एक-दो एफआईआर और दर्ज हो सकती हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि मुठभेड़ में पकड़े गए आरोपियों ने घटना के लिए असलहे मुहैया कराए थे। प्रकरण से जुड़े सभी आरोपियों की संपत्तियों के बारे में पता किया जा रहा है। किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। गैंगस्टर और रासुका के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
अभी और आरोपियों की सपत्तियां हो सकती हैं सील
फायरिंग के मामले में आरोपियों की संपत्तियों की सीलिंग की कार्रवाई अभी नहीं रुकेगी। पुलिस को निर्देश मिले हैं कि इस मामले में जिसने भी आपराधिक कृत्य कर संपत्ति अर्जित की है, सबकी छानबीन कर उसे सील किया जाए। पुलिस अब केपी यादव की संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है।
फरार चल रहे राजीव राना के भाई संजीव राना की संपत्तियों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। बताया जा रहा है पीलीभीत बाइपास पर राजीव राना का राज चलता था। आरोपी ने वहां कई प्लॉट व मकानों को बेचा है। पुलिस राजस्व विभाग की मदद से इन संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है।