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भावी वैज्ञानिकों ने गढ़े कारगर मॉडल
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 17 Nov 2016 01:28 AM IST
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Future Scientists Fabricated effective model
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश की ओर से शहर के जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में लगी 44वीं राज्य स्तरीय जवाहरलाल नेहरू विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में भावी वैज्ञानिकों ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा का दुरुपयोग रोकने के उपाय और खाद्य सुरक्षा जैसे कई मॉडल पेश किए हैं, जिनको अमल में लाकर दोहन रोका जा सकता है। चार दिवसीय प्रदर्शनी में लगे प्रदेश के 18 मंडलों के विभिन्न विद्यालयों के तीन हजार से ज्यादा मॉडल और प्रोजेक्ट को देखने के लिए बुधवार को बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को बेहद सराहा।
सभी मॉडलों को स्वास्थ्य, उद्योग, परिवहन, पर्यावरण नवाचार, संचार, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा तथा गणितीय समाधान विषयों में विभाजित करके निर्णायकों ने पुरस्कार के लिए चयनित किया। भावी वैज्ञानिकों के मॉडलों के अवलोकन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राएं भी पहुंचे। निर्णायकों में डॉ. डीके गुप्ता, डॉ. श्वेतकेतु शर्मा, डॉ. शमीम अहमद, डॉ. वीनम सक्सेना, डॉ. राजेन्द्र सिंह, डॉ. एसएल पांडेय, डॉ. क्षमा द्विवेदी आदि प्रमुख थे। कार्यक्रमों का संचालन डॉ. संदीप इंदवार ने किया। बृजमोहन शर्मा, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. एसपी पांडेय, डॉ. महेन्द्र गंगवार, डॉ. कुलदीप विश्नोई, डॉ. रामश्री, मीना जैन और डॉ. रश्मि जायसवाल ने सहयोग दिया। सांध्यकालीन सत्र में विज्ञान से संबन्धित विविध नाटकों का मंचन हुआ। प्रदर्शनी 18 नवंबर तक खुली रहेगी।
इको फ्रेंडली हीटर
आगरा के छात्र अतुल का बनाया इको फ्रेंडली वाटर हीटर के मॉडल में सिर्फ कापर विधि से यानी तांबे के छिद्रित तार का प्रयोग करके गर्म पानी तैयार किया जा सकता है।
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उर्वरक, वर्षा जलसंचय
इस मॉडल में वर्षा जल का संयोजन इस प्रकार किया गया है कि उसका उपयोग सिंचाई में किया जा सके, उसके साथ उर्वरक, कीटनाशक और फफूंदीनाशक का प्रयोग भी किया गया है। उस जल को ड्रिप सिंचाई विधि या बौछार विधि से खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसको बरेली के डॉ. अभय शर्मा और मोहम्मद शारिक ने बनाया है।
मच्छर भगाने वाला मॉडल
बनारस के छात्र अर्पित पांडेय का मॉडल एक यंत्र के रूप में है। यह सौर ऊर्जा से संचालित होता है, जिसका प्रयोग पढ़ने के लिए लाइट, एलईडी बल्व और पंखा चलाने में किया जा सकता है। इसमें नीम, नीबू, गुलाब के पत्तों का पेस्ट तैयार करके रखने से उसकी खुशबू के कारण मच्छर भाग जाते हैं।
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सभी मॉडलों को स्वास्थ्य, उद्योग, परिवहन, पर्यावरण नवाचार, संचार, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा तथा गणितीय समाधान विषयों में विभाजित करके निर्णायकों ने पुरस्कार के लिए चयनित किया। भावी वैज्ञानिकों के मॉडलों के अवलोकन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राएं भी पहुंचे। निर्णायकों में डॉ. डीके गुप्ता, डॉ. श्वेतकेतु शर्मा, डॉ. शमीम अहमद, डॉ. वीनम सक्सेना, डॉ. राजेन्द्र सिंह, डॉ. एसएल पांडेय, डॉ. क्षमा द्विवेदी आदि प्रमुख थे। कार्यक्रमों का संचालन डॉ. संदीप इंदवार ने किया। बृजमोहन शर्मा, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. एसपी पांडेय, डॉ. महेन्द्र गंगवार, डॉ. कुलदीप विश्नोई, डॉ. रामश्री, मीना जैन और डॉ. रश्मि जायसवाल ने सहयोग दिया। सांध्यकालीन सत्र में विज्ञान से संबन्धित विविध नाटकों का मंचन हुआ। प्रदर्शनी 18 नवंबर तक खुली रहेगी।
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इको फ्रेंडली हीटर
आगरा के छात्र अतुल का बनाया इको फ्रेंडली वाटर हीटर के मॉडल में सिर्फ कापर विधि से यानी तांबे के छिद्रित तार का प्रयोग करके गर्म पानी तैयार किया जा सकता है।
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उर्वरक, वर्षा जलसंचय
इस मॉडल में वर्षा जल का संयोजन इस प्रकार किया गया है कि उसका उपयोग सिंचाई में किया जा सके, उसके साथ उर्वरक, कीटनाशक और फफूंदीनाशक का प्रयोग भी किया गया है। उस जल को ड्रिप सिंचाई विधि या बौछार विधि से खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसको बरेली के डॉ. अभय शर्मा और मोहम्मद शारिक ने बनाया है।
मच्छर भगाने वाला मॉडल
बनारस के छात्र अर्पित पांडेय का मॉडल एक यंत्र के रूप में है। यह सौर ऊर्जा से संचालित होता है, जिसका प्रयोग पढ़ने के लिए लाइट, एलईडी बल्व और पंखा चलाने में किया जा सकता है। इसमें नीम, नीबू, गुलाब के पत्तों का पेस्ट तैयार करके रखने से उसकी खुशबू के कारण मच्छर भाग जाते हैं।