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Bareilly News: वैकल्पिक ईंधन से सरकारी राजस्व को चपत लगा रहे भट्ठा संचालक

Mon, 24 Mar 2025 02:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 24 Mar 2025 02:26 AM IST
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Furnace operators are defrauding government revenue by using alternative fuel
बरेली। कोयला और लकड़ी से ईंट उत्पादन का आकलन कर रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों के लिए वैकल्पिक ईंधन परेशानी का सबब बन रहे हैं। निरीक्षण में कई भट्ठों पर खरपतवार, गन्ने की खोई और मैली, ब्रिकेट्स आदि का प्रयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा रहा है।
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कोयला और लकड़ी के अलावा अन्य विधि से तैयार ईंधन का प्रयोग ईंट उत्पादन में किया जा रहा है। जीएसटी के अधिकारियों ने बताया कि वैकल्पिक ईंधन का प्रयोग करके भट्ठा संचालक सरकारी राजस्व को चपत लगा रहे हैं। कई भट्ठा परिसर में क्रशर लगे हुए हैं। गन्ने की पेराई के बाद खोई और मैली को भी भट्ठे में इस्तेमाल किया जा रहा है। मामला संज्ञान में आने पर राज्यकर द्वारा प्रदूषण विभाग से एनओसी और उद्योग विभाग से क्रशर प्लांटों के पंजीकरण, मानक संबंधी जानकारी जुटाने की योजना बनाई है।
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जहां प्लांट वहां 90 फीसदी वैकल्पिक ईंधन हो रहा प्रयोग
राज्यकर अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र के मुताबिक राज्यकर देने से बचने के लिए कई कारोबारी कोयले के स्थान पर 90 फीसदी वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयले की धूल, गुल्ला, खोई, मैली आदि का प्रयोग कर रहे हैं। प्लांट भी भट्ठा परिसर में लगा लिया है, जिससे उत्पादन का आकलन न हो सके। कहा कि भट्ठा संचालक जांच टीम को कितना भी गुमराह करें, उत्पादन के आकलन के कई विकल्प हैं। कर चोर बच नहीं पाएंगे।
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कोयले खपत और ब्लाक से पता चलता है ईंट उत्पादन

मानक के अनुरूप 18 मीट्रिक टन कोयले के प्रयोग से न्यूनतम एक लाख ईंट का उत्पादन होता है। इतनी ही ईंट का उत्पादन जिगजैग भट्ठे में 12 मीट्रिक से टन होता है। वहीं, एक लाख ईंट उत्पादन के लिए लकड़ी की मात्रा कोयले के सापेक्ष करीब डेढ़ गुने से ज्यादा होती है। इसके अलावा ईंट रखने के लिए बनाए गए ब्लाक से भी उत्पादन का आकलन होता है। भट्ठे में कम से कम 15 ब्लाक होते हैं। कई कारोबारियों ने 10 से 12 ब्लाक बनाने की ही जानकारी दी है। ब्यूरो
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