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नेपाली खाद्य तेल कारोबार को लेकर एफएसडीए एक मत नहीं
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बरेली। तस्करी के जरिये बड़े पैमाने पर शहर के बाजार में पहुंचे प्रतिबंधित नेपाली तेल के नमूने भरने के बाद एफएसडीए की कार्रवाई थम गई है। दिलचस्प यह है कि विभागीय अधिकारी जनवरी की शुरुआत में वाणिज्य मंत्रालय की ओर से इस तेल के आयात पर लगाई पाबंदी की जानकारी होने से भी इनकार कर रहे हैं। उधर, गोदामों में तेल का स्टॉक इकट्ठा किए बैठे कारोबारी जल्द से जल्द उसे खपाने की कोशिशों में जुट गए हैं। हालांकि इस बीच डीएम नितीश कुमार ने एफएसडीए अफसरों से नेपाली तेल के अवैध कारोबार की जानकारी मांगी है।
नेपाली तेल की शहर के बाजार में बड़े पैमाने पर मौजूदगी का खुलासा पिछले हफ्ते तब हुआ था जब एफएसडीए के अफसरों ने श्यामगंज के दो गोदामों पर छापा मारा था। इन गोदामों में नेपाल से लाए गए तेल के सैकड़ों टिन मिलने के बाद उसके सैंपल भरे गए थे लेकिन उसके बाद एफएसडीए ने कोई एक्शन नहीं लिया। इससे पहले आठ जनवरी को ही केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने सभी तरह के रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर पाबंदी लगा दी थी। चूंकि एफएसडीए के अफसर खुद मान रहे हैं कि शहर के गोदामों में मिला नेपाली तेल का स्टाक कुछ ही दिनों पहले आया था लिहाजा यह भी साफ हो गया कि इस तेल की आमद शहर में गैरकानूनी तरीके से हुई है।
दिलचस्प यह भी है कि नेपाली तेल के खिलाफ छापा मारने की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के सहायक आयुक्त संजय पांडेय की अगुवाई में हुई थी, उन्होंने ही यह भी बताया था कि नेपाली तेल के आयात पर प्रतिबंध है लेकिन एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा इस प्रतिबंध की जानकारी होने से ही इनकार कर रहे हैं। धर्मराज का कहना है कि उनके विभाग की ओर से इस बारे में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है लिहाजा नेपाली तेल को प्रतिबंधित मानकर कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश प्रदेश शासन की ओर से अब तक सरकुलेट क्यों नहीं हुआ।
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वाणिज्य विभाग को भी नहीं दी जानकारी
एक तरफ नेपाली तेल के मामले में एफएसडीए अफसर आपस में ही एकमत नहीं दिख रहे हैं तो दूसरी ओर विधिवत ढंग से कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। नेपाली तेल पर किसी किस्म की पाबंदी होने से इनकार कर रहे जिला अभिहित अधिकारी का कहना है कि बाजार में मौजूद स्टाक को बेचने से नहीं रोका जा सकता। नेपाली तेल का कारोबार करने वालों से मिले बिलों का सत्यापन वाणिज्य कर विभाग से कराए जाने के सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया। इतना जरूर कहा कि विभाग के ही कुछ अफसरों ने इस मुद्दे पर भ्रम फैला दिया है।
मिलावट का अंदेशा पर उसकी भी अनदेखी
बाजार के सूत्रों के मुताबिक नेपाली तेल को देसी रिफाइंड बताकर बेचा जा रहा है, साथ ही अपेक्षाकृत काफी सस्ता होने की वजह से देसी रिफाइंड में इसकी मिलावट भी की जा रही है। एफएसडीए के अफसर इस मामले में भी कोई जांच करने को तैयार नहीं हैं। उधर, नेपाली खाद्य तेल से जुड़े कारोबारियों और एक व्यापार मंडल के प्रमुख नेता का कहना है कि नेपाल से आयातित तेल प्रतिबंध से पहले ही आ गया था। इसलिए उसका स्टाक और बिक्री अवैध नहीं है। इस उत्पाद पर प्रतिबंध लगने के बाद कोई रिफाइंड नहीं आया है।
नेपाली रिफाइंड इडेबल ऑयल का कारोबार अवैध नहीं है। आयातित खाद्य तेल निर्धारित शर्तों के अनुसार ही बाजार में आया है। मुख्यालय से हमें पाबंदी लगाने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। इसलिए कारोबारी पर एक्शन नहीं ले सकते। पिछले दिनों नेपाली खाद्य तेल की बरामदगी के बाद सैंपल लैब में परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने पर ही कोई कार्रवाई होगी। - धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी
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नेपाली तेल की शहर के बाजार में बड़े पैमाने पर मौजूदगी का खुलासा पिछले हफ्ते तब हुआ था जब एफएसडीए के अफसरों ने श्यामगंज के दो गोदामों पर छापा मारा था। इन गोदामों में नेपाल से लाए गए तेल के सैकड़ों टिन मिलने के बाद उसके सैंपल भरे गए थे लेकिन उसके बाद एफएसडीए ने कोई एक्शन नहीं लिया। इससे पहले आठ जनवरी को ही केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने सभी तरह के रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर पाबंदी लगा दी थी। चूंकि एफएसडीए के अफसर खुद मान रहे हैं कि शहर के गोदामों में मिला नेपाली तेल का स्टाक कुछ ही दिनों पहले आया था लिहाजा यह भी साफ हो गया कि इस तेल की आमद शहर में गैरकानूनी तरीके से हुई है।
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दिलचस्प यह भी है कि नेपाली तेल के खिलाफ छापा मारने की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के सहायक आयुक्त संजय पांडेय की अगुवाई में हुई थी, उन्होंने ही यह भी बताया था कि नेपाली तेल के आयात पर प्रतिबंध है लेकिन एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा इस प्रतिबंध की जानकारी होने से ही इनकार कर रहे हैं। धर्मराज का कहना है कि उनके विभाग की ओर से इस बारे में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है लिहाजा नेपाली तेल को प्रतिबंधित मानकर कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश प्रदेश शासन की ओर से अब तक सरकुलेट क्यों नहीं हुआ।
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वाणिज्य विभाग को भी नहीं दी जानकारी
एक तरफ नेपाली तेल के मामले में एफएसडीए अफसर आपस में ही एकमत नहीं दिख रहे हैं तो दूसरी ओर विधिवत ढंग से कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। नेपाली तेल पर किसी किस्म की पाबंदी होने से इनकार कर रहे जिला अभिहित अधिकारी का कहना है कि बाजार में मौजूद स्टाक को बेचने से नहीं रोका जा सकता। नेपाली तेल का कारोबार करने वालों से मिले बिलों का सत्यापन वाणिज्य कर विभाग से कराए जाने के सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया। इतना जरूर कहा कि विभाग के ही कुछ अफसरों ने इस मुद्दे पर भ्रम फैला दिया है।
मिलावट का अंदेशा पर उसकी भी अनदेखी
बाजार के सूत्रों के मुताबिक नेपाली तेल को देसी रिफाइंड बताकर बेचा जा रहा है, साथ ही अपेक्षाकृत काफी सस्ता होने की वजह से देसी रिफाइंड में इसकी मिलावट भी की जा रही है। एफएसडीए के अफसर इस मामले में भी कोई जांच करने को तैयार नहीं हैं। उधर, नेपाली खाद्य तेल से जुड़े कारोबारियों और एक व्यापार मंडल के प्रमुख नेता का कहना है कि नेपाल से आयातित तेल प्रतिबंध से पहले ही आ गया था। इसलिए उसका स्टाक और बिक्री अवैध नहीं है। इस उत्पाद पर प्रतिबंध लगने के बाद कोई रिफाइंड नहीं आया है।
नेपाली रिफाइंड इडेबल ऑयल का कारोबार अवैध नहीं है। आयातित खाद्य तेल निर्धारित शर्तों के अनुसार ही बाजार में आया है। मुख्यालय से हमें पाबंदी लगाने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। इसलिए कारोबारी पर एक्शन नहीं ले सकते। पिछले दिनों नेपाली खाद्य तेल की बरामदगी के बाद सैंपल लैब में परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने पर ही कोई कार्रवाई होगी। - धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी