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शास्त्रीय संगीत से ऊपर है लोक संगीत: रघुवीर
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
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From classical music Folk music: raghuveer
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाकर पूरे देश के दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी कलाकार रघुवीर यादव लोक गायकी के भी बेहतरीन फनकार हैं। उनका मानना है कि लोक संगीत जमीन से निकला हुआ लगता है और शास्त्रीय संगीत से बहुत ऊपर दिखाई देता है।
अभिनेता रघुवीर यादव यहां थियेटर फेस्ट में आए हुए हैं। प्रेस से बात करते हुए बताया कि अब तो लोक संगीत उनके लिए शौकिया रह गया है। वरना निकला तो संगीत के लिए था, एक्टिंग गले पड़े गई। फिर लगा कि एक्टिंग को अपना लेना चाहिए, क्योंकि जीने के लिए जो कुछ भी चाहिए वो सब एक्टिंग में है। फिर लोक संगीत की कला मेरे अंदर जिंदा रहे और एक्टिंग भी विकसित हो इसके लिए पारसी थियेटर में शामिल हो गया। यहां शास्त्रीय संगीत भी सीखने को मिला। फिर एनएसडी ज्वाइन कर ली यहां संगीत सीखना चाहा। तब महसूस हुआ कि शास्त्रीय संगीत ने बांध दिया, जबकि लोक संगीत में सिंगर को गायकी में पूरी आजादी है। उन्होंने कुछ फिल्मों में गाया भी है बल्कि फिल्म ‘दिल्ली-6’ मेें गेंदा फूल.... उनका ही गीत था जो निर्देशक ने अपनी फिल्म में ले लिया और बदले में सिर्फ मेहरबानी मिली।
हास्य के पीछे के दर्द को भी समझना जरूरी
हास्य अभिनय पर रघुवीर यादव का कहना है कि हास्य क्या है पहले इसका मतलब समझना पड़ेगा। चार्ली चैप्लिन और मोलियर की बात करते हुए कहा कि हास्य के पीछे की ट्रेजडी को समझना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसा हो जिससे लोग हंसे। माना कि कोई साइकिल से चलते हुए गिर पड़े या टकरा जाए और लोग उस पर हंस पड़ें। लेकिन जो गिरा है उनके दर्द को समझना चाहिए।
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अभिनेता रघुवीर यादव यहां थियेटर फेस्ट में आए हुए हैं। प्रेस से बात करते हुए बताया कि अब तो लोक संगीत उनके लिए शौकिया रह गया है। वरना निकला तो संगीत के लिए था, एक्टिंग गले पड़े गई। फिर लगा कि एक्टिंग को अपना लेना चाहिए, क्योंकि जीने के लिए जो कुछ भी चाहिए वो सब एक्टिंग में है। फिर लोक संगीत की कला मेरे अंदर जिंदा रहे और एक्टिंग भी विकसित हो इसके लिए पारसी थियेटर में शामिल हो गया। यहां शास्त्रीय संगीत भी सीखने को मिला। फिर एनएसडी ज्वाइन कर ली यहां संगीत सीखना चाहा। तब महसूस हुआ कि शास्त्रीय संगीत ने बांध दिया, जबकि लोक संगीत में सिंगर को गायकी में पूरी आजादी है। उन्होंने कुछ फिल्मों में गाया भी है बल्कि फिल्म ‘दिल्ली-6’ मेें गेंदा फूल.... उनका ही गीत था जो निर्देशक ने अपनी फिल्म में ले लिया और बदले में सिर्फ मेहरबानी मिली।
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हास्य के पीछे के दर्द को भी समझना जरूरी
हास्य अभिनय पर रघुवीर यादव का कहना है कि हास्य क्या है पहले इसका मतलब समझना पड़ेगा। चार्ली चैप्लिन और मोलियर की बात करते हुए कहा कि हास्य के पीछे की ट्रेजडी को समझना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसा हो जिससे लोग हंसे। माना कि कोई साइकिल से चलते हुए गिर पड़े या टकरा जाए और लोग उस पर हंस पड़ें। लेकिन जो गिरा है उनके दर्द को समझना चाहिए।
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