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Bareilly News: कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर फर्जी आइएएस ने की ठगी
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बरेली। कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी लगवाने के बहाने फर्जी आईएएस विप्रा ने साढ़े तीन लाख रुपये ऐंठ लिए। एसएसपी के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बारादरी के घेर जाफर खां निवासी शरीफ ने बारादरी इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह को बताया कि वर्ष 2023 में उनका परिचय विप्रा शर्मा से हुआ था। विप्रा ने खुद को प्रशिक्षु आईएएस बताया था। कहा था कि वह इस समय एडीएम वित्त एवं राजस्व पद पर वाराणसी में तैनात है। विप्रा ने शरीफ से पहचान बढ़ाई और उनके परिवार के बारे में जानकारी ली। शरीफ ने बताया कि उनका बेटा बिलाल सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है। विप्रा ने उनसे कहा कि वह उसकी कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी लगवा सकती है।
शरीफ ने बताया कि वह विप्रा की हूटर लगी गाड़ी और रसूख देखकर उसे असली अधिकारी समझ बैठे और झांसे में आ गए। विप्रा शर्मा ने उनसे साढ़े तीन लाख रुपये लेकर हड़प लिए। तब से विप्रा उन्हें टरका रही थी। उन्होंने ज्यादा जिद की तो इस साल अप्रैल में विप्रा ने डाक से उनके बेटे का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा। इसके बाद विप्रा ने कहा कि वेतन उनके बेटे के खाते में आने लगेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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अखबार में छपी खबर तो खुलीं आंखें
शरीफ ने बताया कि काफी समय से वह विप्रा की बातों पर भरोसा करने के लिए मजबूर थे। फिर एक दिन अखबार में पढ़ा कि विप्रा अधिकारी नहीं है। पता चला कि विप्रा ने गिरोह बना रखा है जो सरकारी नौकरी का झांसा देकर लोगों से ठगी करता है। तब से वह विप्रा के पिता व अन्य लोगों को तलाश कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने एसएसपी अनुराग आर्य को अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में बताया। एसएसपी के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गैंगस्टर लगाकर जब्त की जाएगी संपत्ति
फर्जी आइएएस के मामले में तीस से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें से करीब 28 मामले बारादरी थाने में ही दर्ज हुए हैं। पुलिस इस मामले में गैंगस्टर व संपत्ति जब्तीकरण समेत अन्य बिंदुओं पर कार्रवाई का खाका तैयार कर रही है। - अनुराग आर्य, एसएसपी
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बारादरी के घेर जाफर खां निवासी शरीफ ने बारादरी इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह को बताया कि वर्ष 2023 में उनका परिचय विप्रा शर्मा से हुआ था। विप्रा ने खुद को प्रशिक्षु आईएएस बताया था। कहा था कि वह इस समय एडीएम वित्त एवं राजस्व पद पर वाराणसी में तैनात है। विप्रा ने शरीफ से पहचान बढ़ाई और उनके परिवार के बारे में जानकारी ली। शरीफ ने बताया कि उनका बेटा बिलाल सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है। विप्रा ने उनसे कहा कि वह उसकी कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी लगवा सकती है।
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शरीफ ने बताया कि वह विप्रा की हूटर लगी गाड़ी और रसूख देखकर उसे असली अधिकारी समझ बैठे और झांसे में आ गए। विप्रा शर्मा ने उनसे साढ़े तीन लाख रुपये लेकर हड़प लिए। तब से विप्रा उन्हें टरका रही थी। उन्होंने ज्यादा जिद की तो इस साल अप्रैल में विप्रा ने डाक से उनके बेटे का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा। इसके बाद विप्रा ने कहा कि वेतन उनके बेटे के खाते में आने लगेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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अखबार में छपी खबर तो खुलीं आंखें
शरीफ ने बताया कि काफी समय से वह विप्रा की बातों पर भरोसा करने के लिए मजबूर थे। फिर एक दिन अखबार में पढ़ा कि विप्रा अधिकारी नहीं है। पता चला कि विप्रा ने गिरोह बना रखा है जो सरकारी नौकरी का झांसा देकर लोगों से ठगी करता है। तब से वह विप्रा के पिता व अन्य लोगों को तलाश कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने एसएसपी अनुराग आर्य को अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में बताया। एसएसपी के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गैंगस्टर लगाकर जब्त की जाएगी संपत्ति
फर्जी आइएएस के मामले में तीस से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें से करीब 28 मामले बारादरी थाने में ही दर्ज हुए हैं। पुलिस इस मामले में गैंगस्टर व संपत्ति जब्तीकरण समेत अन्य बिंदुओं पर कार्रवाई का खाका तैयार कर रही है। - अनुराग आर्य, एसएसपी