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छह लेखपाल दोषी, विभागीय कार्रवाई की संस्तुति
बरेली
Updated Sun, 25 Jan 2015 01:40 AM IST
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राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और अल्पसंख्यक विवाह अनुदान योजना में फर्जीवाड़े की जांच के डीएम के आदेश को दबाए बैठा तहसील प्रशासन खबर छपने के बाद नींद से जाग गया। तहसीलदार ने मामले की जांच रिपोर्ट एसडीएम को भेज दी है। जांच रिपोर्ट में छह लेखपालों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और फर्जी प्रमाणपत्रों से पारिवारिक लाभ योजना का लाभ लेने वाली लाभार्थियों पर मुकदमा कराने की संस्तुति की गई है।
तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि डीएम के आदेश के हुई जांच में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ के 16 और अल्पसंख्यक विवाह अनुदान योजना के 40 फर्जी मामले में छह लेखपाल दोषी पाए गए हैं। एसडीएम को दस जनवरी को भेजी गई रिपोर्ट में लेखपाल प्रदीप कुमार आनंद, विजय सक्सेना, फकीर चंद्र, सत्यवीर सिंह, अमर सिंह व श्रीराम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। साथ ही फर्जीवाड़े से लाभ लेने वाले लाभार्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। शुक्रवार को एसडीएम के आने पर कार्रवाई की बात करने वाले तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय का शनिवार को कहना था कि जांच रिपोर्ट दस जनवरी को ही भेज दी गई। एसडीएम साहब छुटटी पर गए हुए हैं। उनके आते ही एफआईआर दर्ज करा दी जायेगी।
तहसीलदार से पहले दलाल पहुंच गए बैरमनगर
दलालों ने ली आकाओं की शरण, हो गए भूमिगत
दुनका। दुनका और बैरमनगर में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के फर्जीवाड़े में डीएम के विशेष जांच के आदेश के बाद भी तहसीलदार को बैरमनगर जाने की फुर्सत नहीं मिल पाई है और दलाल गांव में पहुंच कर लाभार्थियों महिलाओं से अपना नाम नहीं लेने का दबाव बना रहे हैं। वह भी तब जब एसडीएम मीरगंज शुक्रवार को खुद दुनका गए थे और वहां के 27 आवेदनों की जांच में 25 मामले फर्जी पाए गए थे। तहसीलदार मीरंगज कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि वह हाईकोर्ट के एक आदेश का अनुपालन कराने में व्यस्त थे। 26 जनवरी के बाद वह बैरमनगर जाकर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उधर, लाभार्थ परिवारों में भी एफआईआर के बाद गिरफ्तारी के भय से हड़कंप मचा हुआ है।
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दुनका में एसडीएम की जांच में 27 में से 25 आवेदन फर्जी निकले थे और फर्जीवाड़े में तीन दलालों, गिरधरपुर के पूर्व प्रधान केसरी लाल, बकैनिया वीरपुर के विष्णु शर्मा और दुनका के राशन कोटेदार मुस्तफा बेग का नाम आया था। शनिवार को इन तीनों दलालों ने बरेली को दो आकाओं की पनाह ले ली है। शुक्रवार रात भूमिगत होने के बाद तीनों ने बरेली में दो बड़े नेताओं की शरण ले रखी है। एक बड़ा जनप्रतिनिधि है तो दूसरा सूबे से दिल्ली तक दखल रखने वाला बड़ा रसूखदार।
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तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि डीएम के आदेश के हुई जांच में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ के 16 और अल्पसंख्यक विवाह अनुदान योजना के 40 फर्जी मामले में छह लेखपाल दोषी पाए गए हैं। एसडीएम को दस जनवरी को भेजी गई रिपोर्ट में लेखपाल प्रदीप कुमार आनंद, विजय सक्सेना, फकीर चंद्र, सत्यवीर सिंह, अमर सिंह व श्रीराम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। साथ ही फर्जीवाड़े से लाभ लेने वाले लाभार्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। शुक्रवार को एसडीएम के आने पर कार्रवाई की बात करने वाले तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय का शनिवार को कहना था कि जांच रिपोर्ट दस जनवरी को ही भेज दी गई। एसडीएम साहब छुटटी पर गए हुए हैं। उनके आते ही एफआईआर दर्ज करा दी जायेगी।
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तहसीलदार से पहले दलाल पहुंच गए बैरमनगर
दलालों ने ली आकाओं की शरण, हो गए भूमिगत
दुनका। दुनका और बैरमनगर में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के फर्जीवाड़े में डीएम के विशेष जांच के आदेश के बाद भी तहसीलदार को बैरमनगर जाने की फुर्सत नहीं मिल पाई है और दलाल गांव में पहुंच कर लाभार्थियों महिलाओं से अपना नाम नहीं लेने का दबाव बना रहे हैं। वह भी तब जब एसडीएम मीरगंज शुक्रवार को खुद दुनका गए थे और वहां के 27 आवेदनों की जांच में 25 मामले फर्जी पाए गए थे। तहसीलदार मीरंगज कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि वह हाईकोर्ट के एक आदेश का अनुपालन कराने में व्यस्त थे। 26 जनवरी के बाद वह बैरमनगर जाकर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उधर, लाभार्थ परिवारों में भी एफआईआर के बाद गिरफ्तारी के भय से हड़कंप मचा हुआ है।
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दुनका में एसडीएम की जांच में 27 में से 25 आवेदन फर्जी निकले थे और फर्जीवाड़े में तीन दलालों, गिरधरपुर के पूर्व प्रधान केसरी लाल, बकैनिया वीरपुर के विष्णु शर्मा और दुनका के राशन कोटेदार मुस्तफा बेग का नाम आया था। शनिवार को इन तीनों दलालों ने बरेली को दो आकाओं की पनाह ले ली है। शुक्रवार रात भूमिगत होने के बाद तीनों ने बरेली में दो बड़े नेताओं की शरण ले रखी है। एक बड़ा जनप्रतिनिधि है तो दूसरा सूबे से दिल्ली तक दखल रखने वाला बड़ा रसूखदार।
उधर, लाभार्थियों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वह नोटरी एफिडेविट दे दें कि, उन्होंने जांच में नाम नहीं बताया है। सूत्रों को कहना है कि मामले में हलफनामा लगाने की तैयारी चल रही है। उधर, बैरमनगर में भी फर्जीवाड़ा करने के संकेत मिल रहे हैं। योजना का लाभ दिलाने वाले दलाल शनिवार को यहां पहुंचे और लाभार्थियों से बात कर अपना नाम न लेने का दबाव बनाया। लाभार्थियों से कहा गया है कि दलालों का नाम लोगे तो फंस जाओगे। नाम नहीं लिया तो कोई मामले को फर्जी नहीं बता पाएगा।