{"_id":"5df542eb8ebc3e881c6b8b9a","slug":"fraud-bareilly-news-bly3879948126","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर्वराकार के बेटों के नाम जमीन दर्ज होना ठीक था या गलत.. तय करेगा कोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्वराकार के बेटों के नाम जमीन दर्ज होना ठीक था या गलत.. तय करेगा कोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठाकुर जी महाराज मंदिर जमीन प्रकरण
एसडीएम ने डीएम को रिपोर्ट भेजकर शासकीय अधिवक्ता से भी ली राय
बरेली। परसाखेड़ा के गांव नंदौसी में ठाकुर जी महाराज मंदिर की 12 बीघा जमीन का असली वारिस कौन है? अब यह एसडीएम कोर्ट में तय होगा। इस जमीन के खुर्दबुर्द होने का मामला सामने आने के बाद डीएम के निर्देश पर राई गई हुई जांच में पता चला कि मंदिर के सर्वराकार ने वर्ष 1986 मेें जमीन का बैनामा अपने दो बेटों के नाम कर दिया था, जबकि मंदिर की जमीन बेची नहीं जा सकती है। तहसीलदार सदर ने जब मामले की जांच की तो पाया कि सर्वराकार के बेटों ने अपने नाम बैनामा होने के बाद यह जमीन 12 लोगों को बेच दी। एसडीएम सदर ने इस मामले में रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
डीएम के पास यह शिकायत पहुंची थी कि नंदौसी के प्राचीन ठाकुर जी महाराज मंदिर की जमीन खाता संख्या-16 पर अंकित गाटा संख्या 148ए, 149ए, 151 और 616 पर 12 बीघा रकबा मंदिर के सर्वराकार कैलाश नारायन निवासी साहूकारा के नाम संक्रमणीय भूमि के रूप में दर्ज था। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से यह शिकायत की गई कि इस जमीन का अवैध तरीके से बैनामा कर उसकी बिक्री कर दी गई है। 20 जून को डीएम ने एसडीएम सदर अमरेश कुमार को अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। जांच अधिकारी तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता ने खतौनी और अभिलेख खंगाले तो पता चला कि कैलाश नारायन के स्थान पर भूमि उनके दो पुत्रों के नाम दर्ज है, जबकि तहसीलदार का कहना है कि सर्वराकार इस जमीन का बैनामा नहीं कर सकता। दूसरे सर्वराकार की नियुक्ति भी सिविल कोर्ट के आदेश पर की जाती है। तहसीलदार ने जमीन के 12 खातेदारों के बयान भी लिए हैं। इन सभी ने जमीन पर अपना दावा किया है, जबकि अफसरों ने सरकारी वकीलों से राय ली तो उनका कहना था कि सर्वराकार अपने बेटों के नाम मंदिर की जमीन का बैनामा नहीं कर सकता है। इस जमीन के वारिसान तय करने के लिए अब एसडीएम कोर्ट में सुनवाई होगी। साथ ही इस केस को लड़ने के लिए सरकार की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल को पैरोकार नामित कर दिया गया है।
कोर्ट के आदेश पर ही खतौनी में दर्ज नाम हटाए जा सकते हैं। यह मामला मेरी कोर्ट में ही चलेगा। इसके लिए डीएम को बता दिया गया है। साथ ही शासकीय अधिवक्ता से भी इसमें राय मशविरा लिया जा चुका है। - ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर
विज्ञापन
विज्ञापन
एसडीएम ने डीएम को रिपोर्ट भेजकर शासकीय अधिवक्ता से भी ली राय
तहसीलदार ने जांच में जमीन की बिक्री और बैनामा को माना अनुचित
बरेली। परसाखेड़ा के गांव नंदौसी में ठाकुर जी महाराज मंदिर की 12 बीघा जमीन का असली वारिस कौन है? अब यह एसडीएम कोर्ट में तय होगा। इस जमीन के खुर्दबुर्द होने का मामला सामने आने के बाद डीएम के निर्देश पर राई गई हुई जांच में पता चला कि मंदिर के सर्वराकार ने वर्ष 1986 मेें जमीन का बैनामा अपने दो बेटों के नाम कर दिया था, जबकि मंदिर की जमीन बेची नहीं जा सकती है। तहसीलदार सदर ने जब मामले की जांच की तो पाया कि सर्वराकार के बेटों ने अपने नाम बैनामा होने के बाद यह जमीन 12 लोगों को बेच दी। एसडीएम सदर ने इस मामले में रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
डीएम के पास यह शिकायत पहुंची थी कि नंदौसी के प्राचीन ठाकुर जी महाराज मंदिर की जमीन खाता संख्या-16 पर अंकित गाटा संख्या 148ए, 149ए, 151 और 616 पर 12 बीघा रकबा मंदिर के सर्वराकार कैलाश नारायन निवासी साहूकारा के नाम संक्रमणीय भूमि के रूप में दर्ज था। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से यह शिकायत की गई कि इस जमीन का अवैध तरीके से बैनामा कर उसकी बिक्री कर दी गई है। 20 जून को डीएम ने एसडीएम सदर अमरेश कुमार को अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। जांच अधिकारी तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता ने खतौनी और अभिलेख खंगाले तो पता चला कि कैलाश नारायन के स्थान पर भूमि उनके दो पुत्रों के नाम दर्ज है, जबकि तहसीलदार का कहना है कि सर्वराकार इस जमीन का बैनामा नहीं कर सकता। दूसरे सर्वराकार की नियुक्ति भी सिविल कोर्ट के आदेश पर की जाती है। तहसीलदार ने जमीन के 12 खातेदारों के बयान भी लिए हैं। इन सभी ने जमीन पर अपना दावा किया है, जबकि अफसरों ने सरकारी वकीलों से राय ली तो उनका कहना था कि सर्वराकार अपने बेटों के नाम मंदिर की जमीन का बैनामा नहीं कर सकता है। इस जमीन के वारिसान तय करने के लिए अब एसडीएम कोर्ट में सुनवाई होगी। साथ ही इस केस को लड़ने के लिए सरकार की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल को पैरोकार नामित कर दिया गया है।
विज्ञापन
कोर्ट के आदेश पर ही खतौनी में दर्ज नाम हटाए जा सकते हैं। यह मामला मेरी कोर्ट में ही चलेगा। इसके लिए डीएम को बता दिया गया है। साथ ही शासकीय अधिवक्ता से भी इसमें राय मशविरा लिया जा चुका है। - ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर
विज्ञापन