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बैंक में घोटाला.. बेकसूर दंपती के गले में फंदा डाला
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लोन दिए बगैर ही जारी कर दी आरसी, तीन साल से सरकारी अफसरों के चक्कर काट रहे पति-पत्नी
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बरेली। अगर बैंक लोन के लिए आवेदन किया है तो उसे खारिज होने की सूचना दिए जाने के बावजूद यह जरूर देख लें कि कहीं चुपचाप लोन मंजूर कर रकम बैंक स्टाफ खुद तो हजम नहीं कर गया। सात साल पहले उप्र अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम में पांच लाख के लोन के लिए आवेदन करने के बाद सुभाषनगर की महिला के साथ कुछ यही बीती है। लोन मंजूर न होने के बावजूद अब पंजाब नेशनल बैंक ने उसे डिफाल्टर घोषित कर आरसी जारी कर दी है। बैंक और समाज कल्याण विभाग ने यह तो मान लिया कि महिला को लोन नहीं मिला लेकिन फिर आरसी रद्द नहीं की है।
सुभाषनगर के वीरभट्टी मोहल्ले के सुनील कुमार की पत्नी निशा ने 2013 में अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के रामपुर बाग कार्यालय में पांच लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। सुनील ने बताया कि निगम के सहायक प्रबंधक ने फाइल मंजूर कर तीन अक्तूबर, 2013 को उसे पीएनबी की नेकपुर मढ़ीनाथ शाखा में भेज दिया। आरोप है कि बैंक स्टाफ ने उनकी अनुपस्थिति में पत्नी से सभी दस्तावेज, वाउचर और कागजात पर हस्ताक्षर भी करा लिए लेकिन लोन नहीं दिया। तीन साल बाद उनको स्पीड पोस्ट से बैंक का नोटिस मिला जिसमें 3.57 लाख रुपये बकाया न देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसकी शिकायत निगम एमडी लखनऊ से की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब आरसी जारी कर दी गई है।
सुनील ने बताया कि वह और उनकी पत्नी लगातार जनप्रतिनिधियों, समाज कल्याण विभाग, बैंक और अनुसूचित वित्त विकास निगम के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। अब उन्होंने डीएम को ज्ञापन देकर गलत तरह से जारी आरसी को निरस्त करने की मांग की है।
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समाज कल्याण विभाग और बैंक ने माना लोन नहीं दिया गया
सुनील ने बताया कि उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया तो वहां से किसी तरह की राशि जारी होने से इंकार किया गया। इसके बाद उन्होंने बैंक शाखा से संपर्क किया तो बताया गया कि उस दौरान जारी हुए लोन की सूची में उनकी पत्नी का नाम दर्ज नहीं है। बावजूद इसके बैंक ने आरसी जारी कर दी है। बैंक शाखा प्रबंधक से संपर्क किया तो उन्होंने दस्तावेजों में ‘लोन प्राप्त किया’ के कागज पर हस्ताक्षर होने की बात कहकर लोन अदा करने की नसीहत दी। इस मामले में जानकारी के लिए समाज कल्याण अधिकारी को कॉल की गई लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
सुभाषनगर के वीरभट्टी मोहल्ले के सुनील कुमार की पत्नी निशा ने 2013 में अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के रामपुर बाग कार्यालय में पांच लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। सुनील ने बताया कि निगम के सहायक प्रबंधक ने फाइल मंजूर कर तीन अक्तूबर, 2013 को उसे पीएनबी की नेकपुर मढ़ीनाथ शाखा में भेज दिया। आरोप है कि बैंक स्टाफ ने उनकी अनुपस्थिति में पत्नी से सभी दस्तावेज, वाउचर और कागजात पर हस्ताक्षर भी करा लिए लेकिन लोन नहीं दिया। तीन साल बाद उनको स्पीड पोस्ट से बैंक का नोटिस मिला जिसमें 3.57 लाख रुपये बकाया न देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसकी शिकायत निगम एमडी लखनऊ से की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब आरसी जारी कर दी गई है।
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सुनील ने बताया कि वह और उनकी पत्नी लगातार जनप्रतिनिधियों, समाज कल्याण विभाग, बैंक और अनुसूचित वित्त विकास निगम के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। अब उन्होंने डीएम को ज्ञापन देकर गलत तरह से जारी आरसी को निरस्त करने की मांग की है।
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समाज कल्याण विभाग और बैंक ने माना लोन नहीं दिया गया
सुनील ने बताया कि उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया तो वहां से किसी तरह की राशि जारी होने से इंकार किया गया। इसके बाद उन्होंने बैंक शाखा से संपर्क किया तो बताया गया कि उस दौरान जारी हुए लोन की सूची में उनकी पत्नी का नाम दर्ज नहीं है। बावजूद इसके बैंक ने आरसी जारी कर दी है। बैंक शाखा प्रबंधक से संपर्क किया तो उन्होंने दस्तावेजों में ‘लोन प्राप्त किया’ के कागज पर हस्ताक्षर होने की बात कहकर लोन अदा करने की नसीहत दी। इस मामले में जानकारी के लिए समाज कल्याण अधिकारी को कॉल की गई लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।