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निजी कॉलेजों की जारी करोड़ों की छात्रवृत्ति का पांच साल बाद भी हिसाब नहीं
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बरेली। निजी कॉलेजों को जारी हुई करोड़ों की छात्रवृत्ति की जांच वर्ष 2014 से लटकी है। छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर घोटाले की शिकायत मिलने पर शासन ने इसकी जांच के आदेश दिए थे लेकिन बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद अब तक इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। शासन की नाराजगी के बाद अब समाज कल्याण विभाग के डीडी ने इसके लिए जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश समाज कल्याण अधिकारी को दिए हैं।
निजी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल और बीएड कॉलेजों को वर्ष 2012-13 और 2013-14 में कई करोड़ का बजट छात्रवृत्ति के लिए जारी किया गया था। शासन ने गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच कराने के लिए वर्ष 2014 से ही लिखा-पढ़ी शुरू कर दी थी। डीएम और कमिश्नर के कई बार पत्राचार के बाद दिसंबर 2017 में सीडीओ के निर्देश पर जिला स्तरीय टीम गठित की गई थी। इसके बाद समाज कल्याण विभाग को इस संबंध में जांच रिपोर्ट सौंपनी थी। फरवरी 2018 में डीएम के फिर से मामले का संज्ञान लेने के बाद जांच के लिए गठित समिति में शामिल जिला कृषि अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और जिला उद्यान अधिकारी को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए लेकिन इसका अनुपालन अब तक नहीं हुआ है। बार-बार रिमाइंडर और निर्देश देने के बाद भी शासन को अब तक इस प्रकरण की रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। इसे लेकर समाज कल्याण निदेशक हरीश चंद्र आर्या ने समाज कल्याण अधिकारी को 23 अक्तूबर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि इस मामले में करीब डेढ़ दर्जन बार अनुस्मरण पत्र जारी हो चुके हैं। लिहाजा अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेने के साथ ही उनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई भी की जाए।
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निजी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल और बीएड कॉलेजों को वर्ष 2012-13 और 2013-14 में कई करोड़ का बजट छात्रवृत्ति के लिए जारी किया गया था। शासन ने गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच कराने के लिए वर्ष 2014 से ही लिखा-पढ़ी शुरू कर दी थी। डीएम और कमिश्नर के कई बार पत्राचार के बाद दिसंबर 2017 में सीडीओ के निर्देश पर जिला स्तरीय टीम गठित की गई थी। इसके बाद समाज कल्याण विभाग को इस संबंध में जांच रिपोर्ट सौंपनी थी। फरवरी 2018 में डीएम के फिर से मामले का संज्ञान लेने के बाद जांच के लिए गठित समिति में शामिल जिला कृषि अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और जिला उद्यान अधिकारी को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए लेकिन इसका अनुपालन अब तक नहीं हुआ है। बार-बार रिमाइंडर और निर्देश देने के बाद भी शासन को अब तक इस प्रकरण की रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। इसे लेकर समाज कल्याण निदेशक हरीश चंद्र आर्या ने समाज कल्याण अधिकारी को 23 अक्तूबर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि इस मामले में करीब डेढ़ दर्जन बार अनुस्मरण पत्र जारी हो चुके हैं। लिहाजा अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेने के साथ ही उनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई भी की जाए।
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