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अभी दी नहीं, बाद में चहेतों को देकर ठिकाने लगा दी जाएगी सब्सिडी
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बरेली। कृषि विभाग में सब्सिडी वाली कीटनाशक दवाइयों के नाम पर खेल की तैयारी चल रही है। धान सहित दूसरी खरीफ फसलों के लिए किसानों को अब तक कीटनाशक दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हुई हैं, जबकि यह दवाइयां मई-जून में ही मिल जानी चाहिए थीं। बताते हैं कि ये दवाएं लाखों रुपये की सब्सिडी को ठिकाने लगाने के चक्कर में किसानों को समय से उपलब्ध नहीं कराई जातीं। बाद में जब डिमांड खत्म हो जाती है तो अधिकारी-कर्मचारी मिलकर इसे दुकानदारों और चहेते खास किसानों को देकर लाखों का वारा-न्यारा कर लेते हैं। यह खेल ‘ऊपर’ बैठे अफसरों से शुरू होता है, इसलिए इसमें जांच और कार्रवाई भी नहीं होती।
किसानों को सब्सिडी वाली कीटनाशक दवाइयों में 50 से 75 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है। जिला कृषि रक्षा विभाग ने नौ अप्रैल को शासन में कीटनाशक दवाइयां की डिमांड भेज दी थी, जो शासन से अब तक नहीं आई हैं, जबकि धान की फसल का सीजन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से ऊंचे रेट पर बगैर सब्सिडी वाले कीटनाशक, फफूंदी नाशक, बायोपेस्टीसाइड सहित दूसरी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। सरकारी दुकानों पर अब तक दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। सूत्र बताते हैं कि यह सब विभागीय अफसरों की सोची समझी चाल है। पहले जान बूझकर दवाइयां मंगवाने में देरी की जाती है, बाद में जब इनकी कोई मांग नहीं रह जाती तो इन्हें निजी दुकानों पर देकर लाखों की सब्सिडी हड़प ली जाती है। हालांकि स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि उनके स्तर से समय से दवाइयों की डिमांड कर ली गई थी, शासन स्तर से ही दवाइयां नहीं मिल पाईं।
यह भेजी गई थी डिमांड
कृषि विभाग ने इस साल कीटनाशक फिप्रोनिल पांच किलो की 10 हजार पैकेट, कारटाप हाइड्रोक्लोराइड पांच किलो की 10 हजार पैकेट, फफूंदी नाशक कार्वान्डाजिम सौ ग्राम के पांच सौ डिब्बी, घुलनशील गंधन पांच सौ ग्राम के तीन हजार पैकेट, बायो पेस्टीसाइड नीम आयल पांच सौ एमएल तीन सौ केन सहित दूसरी तमाम तरह की दवाइयां मंगवाई थीं।
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किसानों से बातचीत
-खेती की लागत वैसे भी बढ़ रही है। किसानों को जो राहत मिलती भी है उसमें भी गड़बड़ी हो जाने से काश्तकारों को इसका कोई फायदा नहीं मिलता। -अशोक कुमार, टियूलिया
-सरकारी केंद्रों पर दवाइयां मिल नहीं रहीं। कई बार चक्कर काटने के बावजूद कोई जब कीटनाशक नहीं मिली तो मजबूरी में दोगुने रेट पर बाहर से पेस्टीसाइड खरीदनी पड़ी।- चिरौंजी लाल, आलमपुर गजरौला
-यह सरकारी सिस्टम की नाकामी ही है कि किसानों को समय से कीटनाशक भी नहीं मिल रहा। अब कीटनाशक मिल भी जाएं तो किसानों को इससे कोई फायदा नहीं मिलने वाला।-ज्ञान सिंह, गोपालपुर नगरी
मैंने समय से कीटनाशक दवाईयों की डिमांड मई में ही भेज दी थी। कई बार निदेशालय की मीटिंग में भी ये मामला उठा चुकी हूं। यह दिक्कत पूरे प्रदेशभर में हैं। मेरे स्तर से इसका समाधान नहीं हो सकता।
-अर्चना प्रकाश वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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किसानों को सब्सिडी वाली कीटनाशक दवाइयों में 50 से 75 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है। जिला कृषि रक्षा विभाग ने नौ अप्रैल को शासन में कीटनाशक दवाइयां की डिमांड भेज दी थी, जो शासन से अब तक नहीं आई हैं, जबकि धान की फसल का सीजन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से ऊंचे रेट पर बगैर सब्सिडी वाले कीटनाशक, फफूंदी नाशक, बायोपेस्टीसाइड सहित दूसरी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। सरकारी दुकानों पर अब तक दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। सूत्र बताते हैं कि यह सब विभागीय अफसरों की सोची समझी चाल है। पहले जान बूझकर दवाइयां मंगवाने में देरी की जाती है, बाद में जब इनकी कोई मांग नहीं रह जाती तो इन्हें निजी दुकानों पर देकर लाखों की सब्सिडी हड़प ली जाती है। हालांकि स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि उनके स्तर से समय से दवाइयों की डिमांड कर ली गई थी, शासन स्तर से ही दवाइयां नहीं मिल पाईं।
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यह भेजी गई थी डिमांड
कृषि विभाग ने इस साल कीटनाशक फिप्रोनिल पांच किलो की 10 हजार पैकेट, कारटाप हाइड्रोक्लोराइड पांच किलो की 10 हजार पैकेट, फफूंदी नाशक कार्वान्डाजिम सौ ग्राम के पांच सौ डिब्बी, घुलनशील गंधन पांच सौ ग्राम के तीन हजार पैकेट, बायो पेस्टीसाइड नीम आयल पांच सौ एमएल तीन सौ केन सहित दूसरी तमाम तरह की दवाइयां मंगवाई थीं।
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किसानों से बातचीत
-खेती की लागत वैसे भी बढ़ रही है। किसानों को जो राहत मिलती भी है उसमें भी गड़बड़ी हो जाने से काश्तकारों को इसका कोई फायदा नहीं मिलता। -अशोक कुमार, टियूलिया
-सरकारी केंद्रों पर दवाइयां मिल नहीं रहीं। कई बार चक्कर काटने के बावजूद कोई जब कीटनाशक नहीं मिली तो मजबूरी में दोगुने रेट पर बाहर से पेस्टीसाइड खरीदनी पड़ी।- चिरौंजी लाल, आलमपुर गजरौला
-यह सरकारी सिस्टम की नाकामी ही है कि किसानों को समय से कीटनाशक भी नहीं मिल रहा। अब कीटनाशक मिल भी जाएं तो किसानों को इससे कोई फायदा नहीं मिलने वाला।-ज्ञान सिंह, गोपालपुर नगरी
मैंने समय से कीटनाशक दवाईयों की डिमांड मई में ही भेज दी थी। कई बार निदेशालय की मीटिंग में भी ये मामला उठा चुकी हूं। यह दिक्कत पूरे प्रदेशभर में हैं। मेरे स्तर से इसका समाधान नहीं हो सकता।
-अर्चना प्रकाश वर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी