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IVRI Bareilly: पशुजनित रोग, पशु चिकित्सा, जीनोम एडिटिंग के चार प्रोजेक्ट लॉन्च, 80 करोड़ का बजट मंजूर

Thu, 07 Nov 2024 02:50 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 07 Nov 2024 02:50 PM IST
सार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के पशु विज्ञान के उपमहानिदेशक डॉ राघवेंद्र भट्टा ने बृहस्पतिवार को आईवीआरआई का दौरा किया। यहां आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आईसीएआर द्वारा स्वीकृत चार महत्पूर्ण प्रोजेक्ट्स को लॉन्च किया।
 

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four projects related to veterinary medicine and genome editing launched in IVRI bareilly
आईवीआरआई बरेली में आयोजित हुआ कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पशुओं को बीमारी से बचाने और पशुधन बढ़ाने पर देश के सौ संस्थानों के वैज्ञानिक शोध करेंगे। इसके तहत वे पशुओं की उभरती बीमारी व पशुओं से मनुष्यों में होने वाले रोगों को रोकने के उपाय खोजेंगे। साथ ही पशुधन बढ़ाने और जीन संरचना में सकारात्मक बदलाव से नई नस्ल विकसित करेंगे। इस शोध से संबंधित चार प्रोजेक्ट बृहस्पतिवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक, सहायक महानिदेशक ने शुरू किए हैं।

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प्रोजेक्ट शुभारंभ का कार्यक्रम बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर में आयोजित हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली के पशु विज्ञान के उपमहानिदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोग्राम के तहत आईसीएआर की ओर से स्वीकृत चारों महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की। 
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उन्होंने वैज्ञानिकों को वर्ष 2026 तक हर हाल में सभी प्रोजेक्ट में गुणवत्तापूर्ण शोध करने का सुझाव दिया। हिदायत दी कि प्राेजेक्ट की सफलता का सत्यापन भी होगा। संतोषजनक परिणाम न मिलने पर कार्रवाई भी होगी। आईसीएआर के सहायक महानिदेशक पशुविज्ञान डॉ. दिवाकर हेमाद्री ने भी विचार साझा किए। चारों प्राेजेक्ट का बजट 80 करोड़ रुपये है। 

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क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी आईवीआरआई करेगा आवेदन 
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान में विकसित प्रौद्योगिकी, नैदानिकी की जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में आईवीआरआई एनआईआरएफ रैंकिंग में पहले स्थान पर रहा। अब क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी आवेदन करने की तैयारी है। इसके अलावा बंगलूरू के संस्थान में बायो सेफ्टी लैब-3 की स्थापना समेत संस्थान में चल रहे पांच अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यों की जानकारी साझा की।

इस दौरान केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी, संयुक्त निदेशकों में डॉ. रूपसी तिवारी, डॉ. एसके मेंदीरत्ता, डॉ. सोहिनी डे समेत अन्य वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, विद्यार्थी, शोधार्थी मौजूद रहे।

चार प्रोजेक्टों का संक्षिप्त विवरण
1- श्वानों पर उन्नत अनुसंधान परियोजना: श्वान (कुत्तों) के स्वास्थ्य, व्यवहार, आनुवंशिक संरचना पर प्रोजेक्ट के तहत शोध होगा। श्वान स्वास्थ्य प्रबंधन, संरक्षण, प्रजनन, संक्रामक रोग और पशुजन्य, मोटापा, मधुमेह, कैंसर निदान, स्टेम सेल थेरेपी, परजीवी, कवक संक्रमण, हृदय, गुर्दे संबंधी रोग, आनुवंशिक पदार्थ अध्ययन, पोषण यकृत और त्वचा विज्ञान, टीकाकरण प्रतिरक्षा विज्ञान आदि पर शोध होगा। श्वान स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद के व्यावसायिक अवसर खुलेंगे।

2- पशुओं की चुनौतीपूर्ण और उभरती बीमारियां : प्रोजेक्ट के तहत पशुओं में उभरती बीमारियों के महामारी विज्ञान का अध्ययन होगा। रोग प्रसार पर अंकुश लगाना, टीके, नैदानिकी, चिकित्सकीय उपाय विकसित करना है। अफ्रीकी शूकर ज्वर, शूकर श्वसन, प्रजनन सिंड्रोम, शूकर सर्कोवायरस अन्य संबंधित वायरल रोग, ब्लूटंग, कुक्कुट का मैरेक रोग, बछड़ों में दस्त, बकरी, भेड़ में माइकोप्लाजमोसिस, ट्रिपेनोसोमियोसिस, थिलेरियोसिस बीमारियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान करेंगे।

3- पशुजन्य रोगों के लिए एक स्वास्थ्य परियोजना : मनुष्यों की बीमारियों में 61 फीसदी पशुजनित हैं। एक स्वास्थ्य (वन हेल्थ) परियोजना के तहत पशुजनित रोग की प्रकृति पहचानकर 15 अलग-अलग पशुजनित रोगों पर देश के 15 संस्थान शोधकार्य करेंगे। परियोजना का बजट 12.48 करोड़ है। उद्देश्य पशु, मानव, पर्यावरण के स्वास्थ्य पर अनुसंधान को एकीकृत कर भारत की जैव-जलवायु क्षेत्रों में पशुजनित रोगों को समझना, नियंत्रित करना और प्रभावी अंकुश लगाना है।

4- जीनोम एडिटिंग प्रौद्योगिकी द्वारा पशुधन स्वास्थ्य, उत्पादन नेटवर्क परियोजना : प्रोजेक्ट पर 13 संस्थान मिलकर शोध करेंगे। ब्रायलर पशुधन, ब्रायलर मुर्गे की पैदावार बढ़ाने समेत उन्नत नस्ल की मुर्गियां, मादा पशु विकसित करना, संक्रामक रोग से बचाव के लिए नई जेनरेशन के उन्नत कम मूल्य के टीकों के विकास का लक्ष्य है। एवियन इन्फ्लुएंजा (एच1एन1) अन्य संक्रामक रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता युक्त मुर्गियों की प्रजाति, डायग्नोस्टिक टेस्ट विकसित करेंगे। प्राेजेक्ट की लागत 38 करोड़ है।
 
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