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सिविल लाइंस की जमीन ठिकाने लगाने में बीडीए के चार इंजीनियर भी लपेटे में
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बीडीए ने विजिलेंस को भेजी तीन एई और एक जेई की तैनाती की जानकारी
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कुछ और अफसरों के भी फंसने की आशंका
बरेली। सिविल लाइंस में अरबों कीमत की करीब 16 हजार वर्ग मीटर जमीन ठिकाने लगाने के खेल में बीडीए के तीन पूर्व सहायक अभियंता (एई) और एक अवर अभियंता (जेई) लपेटे में आ गए हैं। विजिलेंस की ओर से पत्र लिखे जाने के बाद बीडीए ने इन चारों की तैनाती की जानकारी उसे भेज दी है। बीडीए के कुछ और अफसरों के भी इस घोटाले में फंसने की आशंका जताई जा रही है।
शासन से 1990 में सिविल लाइंस में स्टेशन रोड तिराहे के आसपास 15619 वर्ग मीटर सीलिंग की जमीन को खुर्द-बुर्द कर बेच देने की शिकायत की गई थी। राजस्व रिकॉर्ड में बतौर कोठी नंबर 166 दर्ज इस जमीन को ठिकाने लगाने में नगर निगम, बीडीए और सीलिंग के तत्कालीन अफसरों का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। शासन के आदेश पर विजिलेंस ने मामले की जांच शुरू की जो 30 साल बाद पूरी हो पाई। पांच महीने पहले जांच रिपोर्ट विजिलेंस मुख्यालय भेजी गई जिसके मुताबिक जमीन पर 50-60 लोगों का कब्जा बताते हुए सीलिंग अधिकारी, नगर महापालिका के तत्कालीन उप प्रशासक व बीडीए के करीब 20 अफसरों को दोषी करार दिया गया है।
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विजिलेंस के अफसरों ने कुछ समय पहले बीडीए को पत्र लिखकर घोटाले के दौरान बरेली में तैनात रहे एई और जेई का ब्योरा मांगा था। बीडीए ने विजिलेंस को 1996-1999 के दौरान यहां तैनात रहे तीन एई और एक जेई का ब्योरा भेज दिया है। बताया जा रहा है कि सीलिंग की जिस जमीन पर अवैध कब्जा कराया गया, वहां बीडीए से नक्शे पास कराकर लगातार निर्माण किए जाते रहे। माना जा रहा है कि बीडीए के कई और अफसर भी इस जांच में फंस सकते हैं।
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सिविल लाइंस की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में विजिलेंस ने जो जानकारी मांगी थी, वह उसे भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई के विजिलेंस अपने स्तर से करेगी। - जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष, बीडीए
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कुछ और अफसरों के भी फंसने की आशंका बरेली। सिविल लाइंस में अरबों कीमत की करीब 16 हजार वर्ग मीटर जमीन ठिकाने लगाने के खेल में बीडीए के तीन पूर्व सहायक अभियंता (एई) और एक अवर अभियंता (जेई) लपेटे में आ गए हैं। विजिलेंस की ओर से पत्र लिखे जाने के बाद बीडीए ने इन चारों की तैनाती की जानकारी उसे भेज दी है। बीडीए के कुछ और अफसरों के भी इस घोटाले में फंसने की आशंका जताई जा रही है।
शासन से 1990 में सिविल लाइंस में स्टेशन रोड तिराहे के आसपास 15619 वर्ग मीटर सीलिंग की जमीन को खुर्द-बुर्द कर बेच देने की शिकायत की गई थी। राजस्व रिकॉर्ड में बतौर कोठी नंबर 166 दर्ज इस जमीन को ठिकाने लगाने में नगर निगम, बीडीए और सीलिंग के तत्कालीन अफसरों का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। शासन के आदेश पर विजिलेंस ने मामले की जांच शुरू की जो 30 साल बाद पूरी हो पाई। पांच महीने पहले जांच रिपोर्ट विजिलेंस मुख्यालय भेजी गई जिसके मुताबिक जमीन पर 50-60 लोगों का कब्जा बताते हुए सीलिंग अधिकारी, नगर महापालिका के तत्कालीन उप प्रशासक व बीडीए के करीब 20 अफसरों को दोषी करार दिया गया है।
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विजिलेंस के अफसरों ने कुछ समय पहले बीडीए को पत्र लिखकर घोटाले के दौरान बरेली में तैनात रहे एई और जेई का ब्योरा मांगा था। बीडीए ने विजिलेंस को 1996-1999 के दौरान यहां तैनात रहे तीन एई और एक जेई का ब्योरा भेज दिया है। बताया जा रहा है कि सीलिंग की जिस जमीन पर अवैध कब्जा कराया गया, वहां बीडीए से नक्शे पास कराकर लगातार निर्माण किए जाते रहे। माना जा रहा है कि बीडीए के कई और अफसर भी इस जांच में फंस सकते हैं।
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सिविल लाइंस की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में विजिलेंस ने जो जानकारी मांगी थी, वह उसे भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई के विजिलेंस अपने स्तर से करेगी। - जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष, बीडीए