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मानक तय करके कॉलेजों का हाल लेना भूल गया विवि
बरेली।
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:37 AM IST
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सत्र की शुरुआत में एमजेपी रुहेलखंड की क्रीड़ा परिषद ने खिलाड़ियों के फिजिकल टेस्ट कराने का प्रस्ताव पास किया और सभी कॉलेजों को आदेश जारी किया। कॉलेजों ने आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेजों से यह पूछना मुनासिब नहीं समझा कि फिजिकल को लेकर कॉलेज अपने स्तर से क्या कदम उठा रहे हैं। नजीता अब हमारे सामने हैं, जो खिलाड़ी खेलना भी चाहते हैं प्रशिक्षण के अभाव में फिजिकल के मानकों पर वह फेल हो जाते हैं। वॉलीबाल, खो-खो और हैंडबाल की टीम इसी कारण निरस्त कर दी गई। विश्वविद्यालय के आदेश और कॉलेजों की लापरवाही के बीच नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है। विवि प्रशासन इसका जिम्मेदार कॉलेजों को ठहरा देता है और कॉलेज विवि पर ठीकरा फोड़ते हैं। जबकि हकीकत यह है कि कॉलेजों में स्पोर्ट्स के शिक्षक ही नहीं। विश्वविद्यालय में ही नियमित कोच नहीं है।
कोच के चक्कर में पांच फीसदी कॉलेज भी नहीं लेते हिस्सा
विवि से 519 कॉलेज संबद्ध है जिसमें बमुश्किल पांच फीसदी भी हिस्सा लेते। हैंडबाल में ही पांच कॉलेजों की टीमों ने ही हिस्सा लिया। अधिकतर कॉलेजों में फिजिकल के शिक्षक नहीं और जहां हैं वहां ठीक से छात्रों को तैयार नहीं किया जाता। बरेली कॉलेज में ही प्रशिक्षण के नाम पर खानापूर्ति होती है। अगर ठीक से तैयारी होती तो शायद यह स्थिति न होती।
वर्जन
सभी की सहमति के बाद ही क्रीड़ा परिषद में प्रस्ताव पास किया था। फिजिकल टेस्ट की जिम्मेदारी अब कॉलेजों की है, या हमें अच्छे खिलाड़ी दें हम उनका शिविर लगाकर तैयार करेंगे, लेकिन कॉलेज अपने स्तर से कुछ करते ही नहीं। कॉलेजों में फिजिकल के शिक्षक तो हैं पर उनका उपयोग नहीं हो पाता।
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-प्रोफेसर एके जेटली, क्रीड़ा सचिव
विवि की प्रतियोगिताओं में पहले भी कॉलेजों के छात्र खेलते थे। अगर यही मानक होते तो छात्र खेल ही नहीं पाते। मेरे हिसाब से विवि को तकनीक देखनी चाहिए न की फिजिकल पर फोकस। अगर यही रहा तो कोई भी टीम बाहर जा ही नहीं पाएगी। अगर कॉलेजों में फिजिकल एजूकेशन के शिक्षक नहीं तो उनको नियुक्त कराएं।
-एसएम सीरिया, पूर्व स्पोर्ट्स शिक्षक बरेली कॉलेज
कोच के चक्कर में पांच फीसदी कॉलेज भी नहीं लेते हिस्सा
विवि से 519 कॉलेज संबद्ध है जिसमें बमुश्किल पांच फीसदी भी हिस्सा लेते। हैंडबाल में ही पांच कॉलेजों की टीमों ने ही हिस्सा लिया। अधिकतर कॉलेजों में फिजिकल के शिक्षक नहीं और जहां हैं वहां ठीक से छात्रों को तैयार नहीं किया जाता। बरेली कॉलेज में ही प्रशिक्षण के नाम पर खानापूर्ति होती है। अगर ठीक से तैयारी होती तो शायद यह स्थिति न होती।
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सभी की सहमति के बाद ही क्रीड़ा परिषद में प्रस्ताव पास किया था। फिजिकल टेस्ट की जिम्मेदारी अब कॉलेजों की है, या हमें अच्छे खिलाड़ी दें हम उनका शिविर लगाकर तैयार करेंगे, लेकिन कॉलेज अपने स्तर से कुछ करते ही नहीं। कॉलेजों में फिजिकल के शिक्षक तो हैं पर उनका उपयोग नहीं हो पाता।
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-प्रोफेसर एके जेटली, क्रीड़ा सचिव
विवि की प्रतियोगिताओं में पहले भी कॉलेजों के छात्र खेलते थे। अगर यही मानक होते तो छात्र खेल ही नहीं पाते। मेरे हिसाब से विवि को तकनीक देखनी चाहिए न की फिजिकल पर फोकस। अगर यही रहा तो कोई भी टीम बाहर जा ही नहीं पाएगी। अगर कॉलेजों में फिजिकल एजूकेशन के शिक्षक नहीं तो उनको नियुक्त कराएं।
-एसएम सीरिया, पूर्व स्पोर्ट्स शिक्षक बरेली कॉलेज