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Bareilly News: बजट की बारिश में भी मजबूर... मनरेगा मजदूर
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बरेली। ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के मजदूरों को काम उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा अपने लक्ष्य से भटक गई है। साल दर साल बढ़ते बजट के बावजूद मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। जिले में मनरेगा के 3,23,893 जॉब कार्डधारक हैं। इनमें सक्रिय मजदूरों की संख्या 2,81,379 है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में सिर्फ 5866 श्रमिकों को ही 100 दिन का काम मिल सका। पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में 147 करोड़ खर्च हुए। इस बार यह बजट बढ़ाकर 169 करोड़ कर दिया गया है। इसके बाद भी मजदूर के हाथ खाली हैं।
जिले के 15 ब्लॉकों में क्यारा सबसे पीछे रहा। लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 68.09 प्रतिशत उपलब्धि रही। भोजीपुरा, मझगवां, मीरगंज, बहेड़ी विकास खंड ने 80 फीसदी उपलब्धि हासिल की। आमलपुर जाफराबाद, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पूर्वी, रामनगर, फरीदपुर, रिछा, शीशगढ़ ब्लॉक लक्ष्य के करीब भी न पहुंच सके और मजदूर काम के लिए भटकते रहे।
भोजीपुरा, भुता और नवाबगंज ब्लाकों की उपलब्धि 100 फीसदी से अधिक रही। अधिकारियों की मेहनत की बदौलत हर हाथ को काम मिला, लेकिन अन्य 12 ब्लॉकों के गई गांवों में मजदूरों को काम के लिए महानगरों का रुख करना पड़ा।
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मजदूरी बढ़ी पर नहीं मिल रहा है लाभ
मनरेगा के तहत मजदूरी 213 रुपये से बढ़ाकर 230 रुपये कर दी गई है, लेकिन काम नहीं मिलने से मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्राम पंचायत सचिवों और प्रधानों की खींचतान में कई गांवों में बीते वित्तीय वर्ष में काम ही नहीं हुए। पहली अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू हुआ है, लेकिन उसमें भी काम नहीं हो रहे हैं।
सपने जैसा है 100 दिन काम मिलना
2009 में जाॅबकार्ड बना। किसी भी वर्ष 100 दिन काम नहीं मिला। मजबूरन कम मजदूरी पर दूसरों के खेतों में काम करते हुए गुजारा किया। - छोटे लाल, बंडिया
जॉबकार्ड बना है, लेकिन एक भी दिन काम नहीं मिला। जिम्मेदार यही कहते रहे जब काम होगा तो बताएंगे। मजबूरन दूसरे काम करने पड़ रहे हैं। - राजवीर, खजुरिया उधरनपुर
कोट
जिन विकास खंडों में कम काम हुआ, उन खंड विकास अधिकारियों को नोटिस दिए गए हैं। इस वर्ष प्रत्येक जॉब कार्डधारक को मांगने पर काम मिले, इसका इंतजाम किया गया है। - गंगाराम, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार
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जिले के 15 ब्लॉकों में क्यारा सबसे पीछे रहा। लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 68.09 प्रतिशत उपलब्धि रही। भोजीपुरा, मझगवां, मीरगंज, बहेड़ी विकास खंड ने 80 फीसदी उपलब्धि हासिल की। आमलपुर जाफराबाद, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पूर्वी, रामनगर, फरीदपुर, रिछा, शीशगढ़ ब्लॉक लक्ष्य के करीब भी न पहुंच सके और मजदूर काम के लिए भटकते रहे।
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भोजीपुरा, भुता और नवाबगंज ब्लाकों की उपलब्धि 100 फीसदी से अधिक रही। अधिकारियों की मेहनत की बदौलत हर हाथ को काम मिला, लेकिन अन्य 12 ब्लॉकों के गई गांवों में मजदूरों को काम के लिए महानगरों का रुख करना पड़ा।
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मजदूरी बढ़ी पर नहीं मिल रहा है लाभ
मनरेगा के तहत मजदूरी 213 रुपये से बढ़ाकर 230 रुपये कर दी गई है, लेकिन काम नहीं मिलने से मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्राम पंचायत सचिवों और प्रधानों की खींचतान में कई गांवों में बीते वित्तीय वर्ष में काम ही नहीं हुए। पहली अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू हुआ है, लेकिन उसमें भी काम नहीं हो रहे हैं।
सपने जैसा है 100 दिन काम मिलना
2009 में जाॅबकार्ड बना। किसी भी वर्ष 100 दिन काम नहीं मिला। मजबूरन कम मजदूरी पर दूसरों के खेतों में काम करते हुए गुजारा किया। - छोटे लाल, बंडिया
जॉबकार्ड बना है, लेकिन एक भी दिन काम नहीं मिला। जिम्मेदार यही कहते रहे जब काम होगा तो बताएंगे। मजबूरन दूसरे काम करने पड़ रहे हैं। - राजवीर, खजुरिया उधरनपुर
कोट
जिन विकास खंडों में कम काम हुआ, उन खंड विकास अधिकारियों को नोटिस दिए गए हैं। इस वर्ष प्रत्येक जॉब कार्डधारक को मांगने पर काम मिले, इसका इंतजाम किया गया है। - गंगाराम, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार